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झारखंड: सात साल पहले प्लस टू हाई स्कूलों में टीआरएल शिक्षक नियुक्ति के लिए हुए थे प्रयास, अब भी बाट जो रहे स्कूल

Ranchi : झारखंड में सरकारी नौकरी वही कर सकेंगे जिन्हें यहां की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा की समझ होगी. भाषा पर पकड़ होगी. अब तक यहां के स्टूडेंट्स जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा की पढ़ाई स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर करते थे. इन भाषाओं के प्रति स्कूली बच्चों की आत्मीयता बढ़ाने के लिए राज्य प्लस टू हाई स्कूलों में पढाई शुरू करायी गयी. लगभग सात साल पहले पढाई शुरू हुई. पर जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा की पढाई को लेकर राज्य से स्कूली बच्चों का दुर्भाग्य ऐसा है कि मैट्रिक और इंटर के स्टूडेंट्स जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा की पढाई सेल्फ स्टडी से ही पूरी कर रहे हैं. ऐसे में कहा जा रहा है कि जब स्कूल स्तर पर ही जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा की पढाई की व्यवस्था नहीं है. ऐसे में इस भाषा की समझ कैसे होगी.

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बिना शिक्षक के पढ़ रहे हैं बच्चे

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राज्य के प्लस टू हाई स्कूलों में हर साल हजारों की संख्या में स्टूडेंट्स एडमिशन लेते हैं. हर साल स्टूडेंट पढ़ाई भी करते हैं और परीक्षाओं में पास भी करते हैं. लेकिन यह बच्चे बिना शिक्षक के ही क्षेत्रीय भाषा की पढ़ाई करते हैं. दरअसल राज्य में 510 प्लस टू हाईस्कूल हैं. इनमें झारखंड की क्षेत्रीय भाषाओं को विस्तार देने, पहचान दिलाने और इसमें अवसर पैदा करने को लेकर पढ़ाई शुरू की गयी. कई साल से क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई हो रही है. पर इनकी पढ़ाई के लिए टीआरएल (Tribal and regional languages) शिक्षकों की बहाली हुई ही नहीं. शिक्षा विभाग की ओर से प्रक्रिया सात साल पहले शुरू हुई थी. जानकारी के अनुसार शिक्षकों के पद सृजन का प्रयास 2013-14 में शिक्षा विभाग द्वारा की गयी थी.

 

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Pitambara
Sanjeevani
Pushpanjali

राज्य गठन के बाद 451 प्लस टू हाई स्कूल

जब राज्य गठन हुआ तब राज्य में 59 प्लस टू हाई स्कूल थे. राज्य गठन के बाद 451 प्लस टू स्कूल की शुरुआत की गयी. इस तरह से राज्य में 510 प्लस टू स्कूल हो गये. इन सभी 510 प्लस टू स्कूलों में क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई हो रही है. 510 प्लस टू स्कूलों में मुंडारी, संताली, उरांव, पंच परगनिया, नागपुरी, कुरमाली व खोरठा की पढ़ाई होती है. लेकिन इन भाषाओं की पढ़ाई बिना शिक्षकों के हो रही है. विभाग से मिली जानकारी के अनुसार क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई सही तरीके से हो इसके लिए क्षेत्रीय भाषा के शिक्षकों की बहाली को लेकर विभाग सजग रहा है. पर अब तक शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो पायी है.

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