न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

किसानों को बाजार उपलब्ध करवाने में 18 राज्यों में झारखंड 12वें नंबर पर

महाराष्ट्र नंबर वन, गुजरात दूसरा और तेलंगाना तीसरे स्थान पर

577

New Delhi: किसानों को बाजार उपलब्ध कराने में झारखंड देश भर में 12वें नंबर पर है. केन्द्र सरकार ने नेशनल एग्रीकल्चरल मार्केट (ई-नाम) से 18 राज्यों को जोड़ा था. इन 18 राज्यों में झारखंड 12वें नंबर पर है.

इसे भी पढ़ें-राजमहल विधायक अनंत ओझा को मिली जान से मारने की धमकी

झारखंड को मिले 49.4 अंक, महाराष्ट्र को 81.7 अंक

किसानों के साथ सरकार का दोस्ताना व्यवहार और उनकी फसलों को बाजार उपलब्ध कराने को लेकर अलग-अलग मानक बनाए गये थे. मानकों में कुछ बेहद महत्वपूर्ण हैं. कितने किसानों ने ई-नाम सेवा से अपना निबंधन करवाया है, राज्य की कितनी मंडियों का निबंधन इस सेवा के साथ हुआ है, मंडियों में कितने रुपये का कारोबार हो रहा है, कितने किसान मंडी आकर अनाज बेच रहे हैं. उन्हे फसल लागत का कितना मूल्य मिल रहा है आदि. इन्ही मानकों के आधार पर ये रैंकिंग जारी की गई है. झारखंड में कुल 28 सरकारी मंडियां हैं. उनमे से 19 मंडियों को ही ‘ई-नाम’ सेवा से जोड़ा गया है.

इसे भी पढ़ें- ईसाई मिशनरियों को बदनाम कर रही सरकार, मदर टेरेसा से भारत रत्न वापस लेने की मांग BJP-RSS की चाल:…

गढ़वा अव्वल, गुमला सबसे फिसड्डी जिला

झारखंड में सरकारी मंडियों के अलावा ग्रामीण हाटों को भी ई-नाम सेवा से जोड़ा गया है. निबंधित ग्रामीण हाटों की संख्या 59 है. इस तरह अब तक 32 हजार 138 किसानों ने इस सेवा के लिए रजिस्टेशन कराया है. प्रदेश में कृषि से संबंधित करीब 2 हजार 698 कारोबार का भी निबंधन ‘ई-नाम’ सेवा से हो चुका है. सबसे अधिक 24 प्रकार का कारोबार गढ़वा जिले में होता है. सबसे कम तीन प्रकार का कारोबार गुमला से हो रहा है.

इसे भी पढ़ें-जयंत जी! पूर्व विधायक विनोद सिंह से बहस करेंगे क्या?

किस मंडी से कितना कारोबार ‘ई-नाम’ सेवा से जुड़ा

राजधानी रांची के पंडरा बाजार से करीब एक करोड़ रुपये का कारोबार होता है. सबसे कम कारोबार चाईबासा अनाज मंडी से होता है. किसानों की भागीदारी की बात करें तो धनबाद, बोकारो और जमशेदपुर जिले के सबसे ज्यादा किसानों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

%d bloggers like this: