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श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए अधिकारियों को मिले निर्देश भी बेअसर, मात्र इतने मजदूरों को ही मिला मनरेगा में काम

Ranchi. सूबे में राज्यव्यापी मनरेगाकर्मियों के हड़ताल के प्रभावो को काम करने के लिय ग्रामीण विकास विभाग भरसक प्रयास कर रहा है लेकिन सूबे में मनरेगा योजनाओं में रोजगार की उपलब्धता में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है. हड़ताल के तीसरे दिन काम की उपलब्धता में 30,000 से अधिक गिरावट दर्ज किया गया.

बुधवार को मनरेगा योजना में मात्र 2 लाख 71 हजार 250 मजदूरों को ही काम मिल सका. मनरेगा योजना के तहत बिरसा हरित ग्राम योजना एवं जल समृद्धि योजना पर ग्रामीण विकास विभाग फोकस किए हुये है, लेकिन अब ग्रामीण इलाको में पूर्व की भांति मनरेगा में रोजगार उपल्बध नहीं हो रहे हैं.

मंगलवार को ग्रामीण विकास विभाग के जारी बयान के अनुसार, 60 प्रतिशत मनरेगा कर्मी काम कर रहे हैं. अगर यह सच है तो रोजगार की उपलब्धता में दिन -प्रतिदिन गिरावट विभागीय दावे का पोल खोल रहा है.

श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए अधिकारियों को निर्देश भी बेअसर

ग्रामीण विकास विभाग के मनरेगा द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के तहत काम शुरू कर श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने स्थानीय और प्रवासी श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है. राज्य के ग्रामीण विकास सचिव ने सभी डीसी और डीडीसी को मनरेगा के तहत संचालित योजनाओं पर अविलंब काम शुरू करने का निर्देश दिया है, साथ ही लंबित योजनाओं पर भी समय रहते काम करने को कहा है.

उन्होंने कहा है कि कोविड-19 के दौरान राज्य या बाहर से आए प्रवासी मजदूरों को काम उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है. स्थानीय स्तर पर सभी श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये गये है. इसके बाद भी रोजगार की उपल्बधता में भारी गिरवाट दर्ज की जा रही है.

किस जिला में 27 जुलाई से 29 जुलाई तक कितने मजदूरों को मिला काम

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