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सीएम के रूप में ना देखें लोग, बड़े भाई-छोटे भाई, हेमंत बाबू जैसे शब्दों से करें संबोधन: हेमंत

Ranchi. झारखंड की उपराजधानी दुमका दौरे पर सोमवार को पहुंचे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नए सिरे से नए झारखंड के नवनिर्माण की बात है. राजभवन में क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों के साथ संवाद कर उनकी मागों और समस्या को सुन सोरेन ने कहा कि सरकार ने तय कर लिया है कि किस दिशा में आगे बढ़ना है. इसके लिए कार्य योजना तैयार कर ली गई है. इस दिशा में झारखंड के प्रतीक चिन्ह में बदलाव एक शुरुआत है. 

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सीएम ने कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी मिली है, उसमें राज्य पहले आता है और पार्टी बाद में. उन्होंने चुनाव के पहले जो भी वादें किये थे, उसे वे जरूर पूरा करेंगे. सभी लोगों से सीएम ने यह कहा कि उन्हें वे मुख्यमंत्री के रुप में ना देखें. बड़े भाई, छोटे भाई या हेमन्त बाबू अथवा अपने व हमारे संबंधों के लिहाज से संबोधित करें. इस मौके पर विधायक स्टीफन मरांडी, विधायक नलिन सोरेन, बसंत सोरेन, सहित कई अधिकारी उपस्थित थे. 

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कोरोना संक्रमण से नियंत्रण में सरकार ने पेश की मिसाल  

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमित संसाधनों के साथ झारखंड ने जिस तरह कोरोना संक्रमण को रोकने, बचाव और इलाज को लेकर हमारे सरकारी तंत्र ने प्रबंधन किया, वह पूरे देश के लिए एक मिसाल है. सरकार के प्रयास से ही आज दुमका, हजारीबाग और पलामू मेडिकल कॉलेज में हाईटेक लैब स्थापित हो सका. इससे लोगों को रांची या कोलकाता जाने से बचना पड़ा. आज कोरोना संक्रमितों के लिए सभी पंचायतों में आक्सीमीटर और आक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था के निर्देश भी सरकार ने दे दी है. 

रोजगार सृजन की दिशा में सरकार कर रही काम

लॉकडाउन में मजदूरों को हुए दर्द को साझा करते हुए सीएम ने कहा कि राज्य के मजदूर देश के विभिन्न इलाकों में अपने कार्य की बदौलत विकास में योगदान दे रहे हैं. लेकिन कोरोना में वे काफी परेशान हुए. इन दर्द को देख सरकार ने मजदूरों की आग्रह को सुना. इन प्रवासी मजदूरों को हवाई जहाज और ट्रेन ने वापस लाने का काम किया.

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इसी तरह राज्य के लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है. मनरेगा में 3, शहरों में भी रोजगार सृजन की योजनाएं सरकार का एक सराहनीय कार्य है. सरकार ने खनिज संसाधनों पर सेस लगाने का काम किया, ताकि सरकार के राजस्व में बढोतरी हो और इसका इस्तेमाल राज्य के विकास और लोगों के कल्याण में हो सके. 

प्रबुद्ध नागरिकों ने सीएम के समक्ष रखी कई मांगें

•  झारखंड उच्च न्यायायलय की बेंच दुमका में खोलने की दिशा में हो पहल. 
•  दुमका में पदाधिकारियों और कर्मचारियों की कमी दूर हो. ताकि विकास काम प्रभावित न हो.
•  दुमका के अस्पतालों में सुविधाओं का जो अभाव है, उसे दूर किया जाए.
•  नई शिक्षा को लागू करने से पहले झारखंड के हितों को सरकार ध्यान दें.
•  नर्सिंग शिक्षा के लिए जो केंद्र बंद हैं, उन्हें सरकार चालू करें.
•  दुमका में जर्जर हो चुकी सड़के, सीवरेज-ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर बनाया जाए.
•  रिटायर्ड शिक्षकों को छठे वेतनमान का लाभ मिले. 
•  तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की सरकारी नियुक्तियों में आदिवासी-मूलवासी की ही नियुक्ति हो.
•  आरक्षण का दायरा बढ़ाय़ा जाए.
•  पेंशनर्स समाज के लिए 2016 में कुछ लाभों की घोषणा की गई थी, उसे सरकार पूरा करें.
•  दुमका शहर से सटे पंचायतों को नगर निकाय में शामिल करने की दिशा में सरकार पहल करें.
•  अल्पसंख्यक समुदाय की बच्चियों के लिए हर जिले में आवासीय विद्यालय खोले जाएं.
•  लैंड म्यूटेशन बिल की जो खामियां हैं उसे दूर किया जाए.
•  दुमका शहर में स्थित कचरा डंपिग यार्ड को वर्तमान स्थल से दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए.

सभी मांगों को सुन सीएम ने आश्वासन दिया कि इस दिशा में सरकार उचित कदम उठाएगी.

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