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#JharkhandPolice ने HC को सौंपे दागी जनप्रतिनिधियों के ब्योरे में CM, तीन मंत्रियों व सांसद का नाम छिपाया

Akshay Kumar Jha

Jharkhand Rai

Ranchi : झारखंड अगेंस्ट करप्शन  की याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाइकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि झारखंड के सभी दागी जन प्रतिनिधियों (मंत्री, सांसद व विधायकों) पर दर्ज आपराधिक मामलों में  सरकार क्या रही है.

सुनवाई के दौरान हाइकोर्ट ने सरकार से एक स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी. सरकार की तरफ से पुलिस विभाग की CID (Crime Investigation Department) ने जन प्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मामलों की स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में सौंपा है. रिपोर्ट में 62 जन प्रतिनिधियों (सांसद, विधायक और पूर्व विधायक) के नामों का जिक्र है.

सीआइडी की रिपोर्ट में सभी के खिलाफ दर्ज मामलों का पूरा ब्योरा है. रिपोर्ट में उनका भी नाम है, जो मामले में बरी हो चुके हैं, जिनकी पेशी चल रही है, जिनका केस अंडर ट्रायल है या जिनके केस में चार्ज फ्रेम हो चुका है.

Samford

चौंकाने वाली बात यह है कि सीआइडी ने हाइकोर्ट में जो रिपोर्ट सौंपी है, उसमें मुख्यमंत्री रघुवर दास, राज्य सरकार के तीन मंत्री और एक सांसद के नाम का जिक्र नहीं है. जबकि इन सभी के खिलाफ भी आपराधिक मामले दर्ज हैं या अदालत में सुनवाई चल रहा है. हाइ कोर्ट का भी साफ आदेश था कि ऐसे सभी जनप्रतिनिधियों का ब्योरा उपलब्ध करायें, जिनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा पेंडिंग है.

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क्या कोई दबाव था?

मौजूदा विधायकों और मंत्रियों ने 2014 में चुनाव लड़ने से पहले चुनाव आयोग को जो ब्योरा दिया है, उस ब्योरे में उन पर चल रहे सभी आपराधिक और फौजदारी मुकदमों का जिक्र है.

जिन दिग्गज जन प्रतिनिधियों के नाम का जिक्र CID ने नहीं किया है, उनमें मुख्यमंत्री रघुवर दास का नाम भी शामिल है.

इनके अलावा विधायक से सांसद बने आजसू के दिग्गज नेता चंद्रप्रकाश चौधरी, सरकार में दूसरे नंबर पर आने वाले मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा और नगर विकास मंत्री सीपी सिंह के नाम भी शामिल हैं.

ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर CID को इन सभी मंत्रियों के नाम को कोर्ट से छिपाना क्यों पड़ा ? CID ने ऐसा अपनी मर्जी से किया या ऐसा करने का उस पर कोई दबाव था ?

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इनके नामों का जिक्र नहीं 

मुख्यमंत्री रघुवर दास

2014 में चुनाव लड़ते वक्त रघुवर दास ने चुनाव आयोग को जो ब्योरा उपलब्ध कराया था, उसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज कुल आठ केस का जिक्र किया है. इनमें दो केस IPC की गंभीर धाराओं के तहत दर्ज हैं.

दर्ज ब्योरे में IPC की कुल 23 धाराओं के तहत रघुवर दास पर आठ केस दर्ज है. इनमें से पांच केस पर कोर्ट में आरोपी रघुवर दास पर चार्ज फ्रेम होने का जिक्र है. बाकी तीन केसों पर कोर्ट ने संज्ञान लिया.

रघुवर दास ने दिये गये ब्योरे में यह भी कहा था कि उन्हें किसी केस में दोषी नहीं माना गया है. आरोपी रघुवर दास के खिलाफ जिन तीन केस में कोर्ट ने संज्ञान लिया है, उनमें IPC की धारा 188, 171, 147, 143, 341, 353, 186, 427, 149 और 447 के तहत दर्ज मामले शामिल हैं.

जिन पांच केस में कोर्ट ने रघुवर दास पर चार्ज फ्रेम किया है, उन मामलों में रघुवर दास को आइपीसी की धारा 147, 149, 353, 224, 225, 452, 171 और 188 के तहत आरोपित किया गया है.

सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी

2014 में विधानसभा चुनाव लड़ने वक्त चंद्रप्रकाश चौधरी ने चुनाव आयोग को जो ब्योरा सौंपा उसमें उन्होंने अपने ऊपर कुल पांच केस बताये थे. इनमें आठ केसों में तीन में IPC की गंभीर धाराएं लगी हैं.

पांच केसों में IPC की कुल 19 धाराओं के तहत इनपर केस दर्ज हैं. पांच में चार केस में कोर्ट की तरफ से संज्ञान लिया गया है. वहीं एक केस में कोर्ट ने चार्ज फ्रेम कर दिया है.

जिन केस पर कोर्ट ने संज्ञान लिया है, उनमें चंद्रप्रकाश चौधरी को IPC की धारा 143, 149, 148, 147, 323, 337, 332, 353, 427, 183, 426 और 427 के तहत आरोपी बनाया गया है. जिस एक केस में उन पर चार्ज फ्रेम हुआ है, उस केस में उन्हें  IPC की धारा 143, 144, 149, 353, 452, 440 और 341 के तहत आरोपित किया गया है.

मंत्री सीपी सिंह

2014 में चुनाव लड़ते वक्त सीपी सिंह ने चुनाव आयोग को जो ब्योरा सौंपा था, उसमें उन्होंने अपने ऊपर दर्ज कुल चार मामलों की जानकारी दी थी.  इन चार मामलों में एक मामला IPC की गंभीर धारा के तहत दर्ज है.

चार केसों में IPC की कुल चार धाराओं के तहत केस दर्ज है. चारों केस में कोर्ट की तरफ से संज्ञान लिया गया है. चारो में श्री सिंह को  IPC की धारा 188, 171, 323, 504 और 506 के तहत आऱोपी बनाया गया है.

मंत्री लुईस मरांडी

सीआइडी ने हाइकोर्ट को जो रिपोर्ट सौंपी है, उसमें मंत्री लुईस मरांडी के खिलाफ चल रहे एक मामले का जिक्र है. रिपोर्ट में जिस कांड संख्या 309/2014 का जिक्र है, उस केस का जिक्र मंत्री लुईस मरांडी में वर्ष 2014 में चुनाव आयोग को दिये गये हलफनामे में किया ही नहीं था.

हलफनामे में उन्होंने दो केस का जिक्र किया था, जिसका केस नंबर 244/09 और 138/09 है. साथ ही यह बताया था कि किसी केस पर चुनाव आयोग को ब्योरा देते वक्त तक कोर्ट ने संज्ञान नहीं लिया था.

लेकिन दोनों केस  में चार्ज फ्रेम हो चुके थे और एक मामला IPC की गंभीर धारा के तहत दर्ज था.

मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा

मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने वर्ष 2014 में चुनाव आयोग को जो जानकारी दी थी, उसमें उन्होंने अपने ऊपर दर्ज एक मामले का जिक्र किया था.

साथ ही यह बताया था कि किसी केस में कोर्ट ने उस वक्त तक संज्ञान में नहीं लिया था. लेकिन चार्ज फ्रेम हो चुके थे. उन पर IPC की धारा 143, 341, 501 और 506  के तहत केस चल रहे थे.

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