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Jharkhand Politics: अब कांग्रेस के बंधु तिर्की हटायेंगे भाजपा के बाबूलाल का नेता प्रतिपक्ष बनने का पॉलिटिकल बैरियर!

Amit Jha

Ranchi: कांग्रेस आलाकमान ने राजेश ठाकुर को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी है. उनके साथ साथ बंधु तिर्की, गीता कोड़ा, शहजादा अनवर और जलेश्वर महतो को भी कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी है. चूंकि बंधु के खिलाफ अभी विधानसभा स्पीकर के पास दल बदल का केस चल रहा है. कहा जा रहा है कि वे कायदे से कांग्रेसी तक नहीं हैं पर उन्हें उपाध्यक्ष की कमान सौंप दिया जाना दिलचस्प है. अब ऐसी स्थिति में मुमकिन है कि पूर्व सीएम और भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष बनाये जाने की राह आसान हो. कम से कम प्रदेश कांग्रेस को तो अपनी हामी भरनी होगी. भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री भानू प्रताप शाही ने इसे लेकर कांग्रेस पर कटाक्ष भी किया है. कांग्रेस पर दोहरा चरित्र अपनाने का आरोप मढ़ दिया है.

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कांग्रेस की खुली पोल

भानू प्रताप शाही ने ट्विटर पर कांग्रेस की घेराबंदी की है. बंधु तिर्की पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उन पर दल बदल का मामला चल रहा है. उन्हें कांग्रेस ने कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है. यह कांग्रेस के दोहरे चरित्र को दिखाता है. अपने ही दल के एमएलए के साथ भी कांग्रेस ने ऐसा ही कैरेक्टर दिखाया है. अब ऐसी स्थिति में कांग्रेस को बाबूलाल मरांडी को नेता विरोधी दल मान लेना चाहिये.

बंधु और प्रदीप हैं भाजपा के निशाने पर

गौरतलब है कि झाविमो से कांग्रेस में शामिल होनेवाले विधायक प्रदीप यादव व बंधु तिर्की के खिलाफ भाजपा लगातार स्पीकर रबींद्रनाथ महतो के न्यायाधिकरण में पहुंचती रही है. भाजपा ने 21 जनवरी, 2021 को तीसरी बार 10वीं अनुसूची के तहत दोनों की सदस्यता रद्द करने का आवेदन दिया था. इससे पहले पार्टी के उपाध्यक्ष बिनोद सिंह और विधायक समरी लाल ने इन विधायकों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था. भाजपा प्रवक्ता सरोज सिंह ने 21 जनवरी को न्यायाधिकरण में आवेदन देकर कहा कि प्रदीप यादव और बंधु तिर्की ने दलबदल कानून का उल्लंघन किया है. 10वीं अनुसूची के तहत इन पर मामला बनता है. आवेदन में कहा गया कि प्रदीप पोड़ैयाहाट और बंधु मांडर से झाविमो की टिकट पर चुनाव जीत कर आये हैं. दोनों विधायक झाविमो से बर्खास्त किये जा चुके हैं. विधायक निर्वाचित होने के बाद पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल रहे थे. उस समय झाविमो ने इन विधायकों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था. दोनों की बर्खास्तगी की सूचना विधानसभाध्यक्ष और चुनाव आयोग को दी गयी थी. चुनाव आयोग ने बाबूलाल मरांडी को भाजपा विधायक और प्रदीप यादव व बंधु तिर्की को निर्दलीय विधायक की मान्यता दी थी. इन दोनों की सदस्यता 10वीं अनुसूची के तहत रद्द करने के लिए पर्याप्त प्रमाण हैं.

बाबूलाल का भी मसला है अटका

दलबदल मामले में स्पीकर के पास अब तक आठ शिकायतें पहुंचने की सूचना है. भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी, कांग्रेस में जाने वाले प्रदीप यादव और बंधु तिर्की के खिलाफ दलबदल का मामला उनके यहां लंबित है. तीनों नेता झाविमो से चुनाव जीतकर विधायक बने थे़. इसके बाद मरांडी ने झाविमो का भाजपा में विलय कर लिया. यादव व तिर्की कांग्रेस चले गये़. फिलहाल मरांडी का मामला स्पीकर के पास है. उनके खिलाफ झामुमो विधायक भूषण तिर्की, कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय और प्रदीप यादव व बंधु तिर्की ने स्पीकर के न्यायाधिकरण में शिकायत कर रखी है जिस पर सुनवाई जारी है़. हालांकि प्रदीप और बंधु का कहना है कि प्रदीप-बंधु ने कहा दो तिहाई विधायक कांग्रेस में शामिल हुए. संख्या बल के आधार पर 10वीं अनुसूची का मामला नहीं बनेगा. कांग्रेस में विलय विधि-सम्मत हुआ है़.

Nayika

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