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कड़ाके की ठंड में शराब नीति पर झूम रही झारखंड की राजनीति

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Ranchi: झारखंड ठंड से ठिठुर रहा है. पर शराब बेचने के मामले ने यहां की राजनीति गर्म है. तपिश सरकार की शराब नीति के बाद झारखंड की राजनीति में साफ तौर से महसूस की जा रही है. राजनीतिक बयानबाजी का नशा सर चढ़ कर बोल रहा है. सबसे पहले शराब नीति पर जेएमएम ने सरकार को घेरा. बीजेपी के प्रवक्ता दीनदयाल बर्णवाल ने सरकार की शराब नीति का बचाव करते हुए जेएमएम को करारा जवाब देने की कोशिश की है. कहा है कि रघुवर सरकार ने शराब नीति पर जनहित को देखते हुए निर्णय लिया है. उन्होंने जेएमएम के बयान के बाद कहा है कि जेएमएम और हेमंत सोरेने के परिवार ने शराब के ऊपर काफी राजनीति की है. जेएमएम को अपने गिरेबान में झांकने की जरूरत है. कहा कि जेएमएम ने झारखंड में युवाओं और महिलाओं को शराब पिला कर ठगी का काम किया है. कहा कि मॉल में शराब बिकने से किसी को आपत्ति नहीं हो सकती. जब एयरपोर्ट में शराब बिक सकती है, तो मॉल में शराब क्यों नहीं बिक सकती. कहा कि जेएमएम ने यहां के लोगों को शराब पिला कर सारी गड़बड़ी की. उनकी जमीन हड़पी और रघुवर सरकार झारखंड में विकास करने का काम कर रहे हैं.

जनता माफ नहीं करेगीः जेएमएम

सरकार की शराब पर नीति मीडिया में आने के बाद बहरागोड़ा से जेएमएम विधायक कुणाल षाड़ंगी ने ट्विटर पर लिखा कि “कमल का कमाल. जितनी शिद्दत से शराब बेच कर राजस्व कमाने की चिंता इस सरकार को है. काश उतनी चिंता मानव संसाधन का सही इस्तेमाल करने की होती! हज़ारों विद्यालयों को बंद करके शिक्षा को भी निजी हाथों में ना सौंप दे यह सरकार, अगर ऐसा हुआ तो जनता माफ नहीं करेगी”. इस ट्वीट को बाद में हेमंत सोरेन ने रिट्वीट किया.

पलटू है रघुवर सरकार, हो शराबबंदीः जेवीएम

शराब नीति पर जेवीएम के केन्द्रीय प्रवक्ता योगेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा है कि झारखंड सरकार की पहचान अब यू-टर्न सरकार के रूप में होने लगी है. सरकार ने अपने ही कई निर्णयों को पलटकर यह साबित किया है कि सरकार पलटू है. शराब नीति पर पलटना यह प्रमाणित करता है कि रघुवर सरकार बगैर जनभावना का ख्याल किए और अपरिपक्व सरकार की तरह ही कोई भी निर्णय ले लेती है, जिसका खामियाजा बाद में जनता को भुगतना पड़ता है. ताजा उदाहरण शराब बिक्री पर सरकार द्वारा यू-टर्न का है. सरकार ने मंत्रिपरिषद की बैठक में फिर से शराब को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय लिया है.

सरकार का शराब मसले पर लिया गया दोनों निर्णय गलत था. चाहे वह खुद शराब बेचने का हो या निजी हाथों में सौंपने का. सरकार द्वारा खुद शराब बेचने पर 120 करोड़ के राजस्व का अतिरिक्त लाभ होने का तर्क दिया गया था. जबकि हकीकत इसके विपरीत रही. दरअसल सरकार को बिहार की तरह झारखंड में भी अविलंब शराबबंदी की घोषणा करनी चाहिए. जब बिहार जैसा प्रदेश शराबबंदी से कम हुए राजस्व की भरपाई दूसरे मदों से कर सकता है तो झारखंड सरकार ऐसा क्यों नहीं कर सकती है.

झाविमो प्रारंभ से ही झारखंड में शराबबंदी की पक्षधर रही है और हमारी पार्टी अविलंब शराबबंदी की मांग दुहराती है. वहीं सीएनटी-एसपीटी एक्ट संशोधन विधेयक में भी रघुवर सरकार को भारी जनविरोध के कारण यू-टर्न लेना पड़ा था. इसके अलावा और कई मामलों में सरकार ने अपनी किरकिरी कराने का काम खुद किया है.

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