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Jharkhand Panchayat Election 2022 : जमशेदुपर प्रखंड के शहरी-अर्द्ध शहरी पंचायतों का कैसे होगा विकास, लोग मांग रहे जवाब

Raj kishor, Jamshedpur : झारखंड में पंचायत चुनाव-2022 का बिगुल बजने के बाद से ही पूरे राज्य में चुनावी सरगर्मी बढ़ने लगी. अब तो आलम यह है चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे प्रत्याशी जनता को रिझाने में जुट गये हैं. इससे जमशेदपुर प्रखंड का पंचायत क्षेत्र भी अछूता नहीं है. इस प्रखंड के अंतर्गत कुल 55 पंचायत हैं. इनमें करीब 40 पंचायत शहरी और अर्द्ध शहरी पंचायत के रूप में आते हैं. इन क्षेत्रों में भी दिन-ब-दिन चुनावी सरगर्मी बढ़ती जा रही है. चुनावी मैदान में उतरनेवाले प्रत्याशी अपनी जीत का समीकरण जोड़ने में लग गये हैं. साथ ही, जनता का विश्वास जीतने की भी जी-तोड़ कोशिश शुरू कर दी गयी है. बावजूद इसके इन क्षेत्रों की जनता का एक ही सवाल है- आखिर प्रखंड के शहरी और अर्द्ध शहरी पंचायत क्षेत्रों का विकास होगा तो कैसै होगा ? फिलहाल हालत यह है कि जनता के इस सवाल का सही जवाब देना प्रत्याशी तो क्या किसी के लिए भी मुश्किल साबित हो रहा है.
यह है वजह
इसकी खास वजह है प्रखंड के अर्द्ध शहरी पंचायत क्षेत्रों में बीते करीब बीस वर्षों से विकास कार्य की गति कम होना. वह भी एक क्षेत्र में नहीं, बल्कि कई क्षेत्रों में. जानकार बताते हैं कि इन पंचायतों में मनरेगा जैसी योजना नहीं होना विकास के कार्य को गति देने की दिशा में सबसे बड़ा बाधक है. कई क्षेत्र ऐसे भी बताये जा रहे हैं जहां इंदिरा आवास जैसी योजना भी नहीं है. इतना ही नहीं, एक ओर कृषि के विकास के क्षेत्र में नहीं के बराबर काम हुए हैं, वहीं शिक्षा और चिकित्सा के मामले में भी क्षेत्र में कम ही काम हुये हैं. रही बात साफ-सफाई की व्यवस्था की तो वह भी ढ़ंग से नहीं होता है. शिक्षा के विकास की बात करें तो पूरे पंचायत क्षेत्र में एक भी ढंग का सरकारी स्कूल तक नहीं है. परसूडीह के करनडीह में एकमात्र लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल कॉलेज है भी तो वह आजादी के समय का है. ऐसे में प्रखंड के अर्द्ध शहरी पंचायतों के विकास की बात कैसे की जा सकती है?
उठती रही है सरकार से सर्वे की मांग
इस बीच सरकार से प्रखंडवार पंचायतों का सर्वे करने की मांग भी वर्षों से उठती रही है. इसमें शहरी और अर्द्ध शहरी पंचायतों को नगर परिषद या नगरपालिका घोषित करने की मांग शामिल है. इतना ही नहीं, यदि संभव हो तो चार-पांच बड़े पंचायतों को मिलाकर नगर निगम का दर्जा देने की मांग भी वर्षों पुरानी है ताकि क्षेत्र का विकास तेजी से हो सके. अब देखना है कि इस मांग पर आगे भी कोई संज्ञान लिया जाता है या स्थिति ज्यों की त्यों बनी रहती है.

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