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पलामू: गुजरात जा रही बस मजदूरों सहित 12 घंटे डिटेन, उपायुक्त-एसपी ने बिना फाइन वसूले भेजा देवघर

Palamu. झारखंड के देवघर से गुजरात मजदूरों को लेकर जा रही यात्री बस मंगलवार को 12 घंटे तक डिटेन रही. पूर्वाहन से देर शाम तक जुर्माना लगाने के लिए बस को मजदूरों सहित टीओपी 2 में रोककर रखा गया. इससे मजदूरों को भारी परेशानी हुई. मजदूर दिन भर भूखे प्यासे तड़पते रहे. हालांकि रात करीब 10 बजे जिले के उपायुक्त शशि रंजन और पुलिस अधीक्षक अजय लिंडा ने संवेदना दिखाते हुए बिना फाइन लगाए बस को वापस देवघर भेज दिया.
 
कोविड नियम के विपरीत यात्रा करते हुई थी कार्रवाई
 
गौरतलब है कि पलामू जिला ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन की सूचना पर देवघर से गुजरात जा रही यात्री बस शिव रथ ( जीजे 03बीवी 9887 ) को सद्वीक चौक समीप से जब्त किया गया था. बस में कोविड नियमों का उल्लंघन कर 58 मजदूरों को सवार कर ले जाया जा रहा था. जबकि कोविड नियमों के अनुसार सिर्फ 29 लोग ही बस में सफर कर सकते थे.

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कार्रवाई करते हुए पुलिस एवं परिवहन विभाग के पदाधिकारियों ने बस को कब्जे में ले लिया था. बस टू बाई टू स्लीपर कोच थी. परमिट मात्र 20 मजदूरों का ही था. बिना निबंधन के ही सारे मजदूरों को गुजरात ले जाया जा रहा था. बस सुबह करीब 7 बजे रोकी गई थी, लेकिन देर शाम तक फाइन या बस को छोड़ने पर फैसला नहीं हुआ.
 
समय पर संवेदना क्यों नहीं दिखायी गई?

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बस को 12 घंटे तक रोककर रखना और फिर बिना फाइन लगाए पुनः देवघर भेज देना, कहां तक नियमानुसार है? अगर मानवता दिखानी थी तो दूसरी बसों से मजदूरों को देवघर भेजा जाना चाहिए था. जब्त बस को फाइन लगाना चाहिए था. इससे झारखंड में मजदूरों को लेने आने वाले बस संचालकों को सबक मिलता, लेकिन ऐसा दूर-दूर तक नहीं हो सका. प्रशासन की इस कार्रवाई से पलामू के बस मालिकों में रोष देखा जा रहा है. नाम नहीं छापने की शर्त पर बस मालिकों ने कहा कि एक राज्य में बस संचालन को लेकर दो तरह के नियम कहां तक जायज है? भरपूर घाटा सहकर एक तरफ राज्य सरकार की गाइडलाइन के अनुसार बसों का संचालन कर रहे हैं, वहीं दूसरे राज्यों के बसों को अवैध यात्रा पर जब्त करने के बाद बिना फाइन लगाए मानवता दिखाकर छोड़ दिया जा रहा है.
 
जब्त बस के साथ मजदूरों को थाना में रखना कहां तक न्यायोचित: राजीव

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दिहाड़ी मजदूर यूनियन के राजीव कुमार ने कहा कि मजदूरों के साथ बराबर अमानवीय व्यवहार होता रहा है. इस बार भी वैसा ही हुआ. सुबह में मजदूरों से भरी बस को पकड़ा जाता है और मजदूरों को भी थाना में रखा गया, जबकि उनका कोई कसूर नहीं था और देर रात उन्हें अपने घर रवाना किया जाता है. वह भी तब जब जिले के उपायुक्त और एसपी पहल करते हैं. इस बीच दिनभर जिला परिवहन पदाधिकारी गायब रहे. उनका मोबाइल बंद रहा, उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका. इस बीच एसडीओ ने भी पल्ला झाड़ लिया. बाद में डीसी की पहल पर मजदूरों को उसी बस से घर भेजा गया. राजीव ने मांग की है कि मजदूरों का पलायन रोकने के लिए जिला प्रशासन को पहल करनी चाहिए. मजदूरों को स्थानीय स्तर पर काम मिलेगा, तो वह बाहर नहीं जाएंगे. 

मानवता दिखाते हुए बस को मुक्त किया गया: डीटीओ

पलामू के परिवहन पदाधिकारी अनवर हुसैन ने कहा कि मानवता दिखाते हुए मजदूरों के हित में जब्त बस को छोड़ा गया. यह पूछे जाने पर कि दूसरी बसों से मजदूरों को भी देवघर भेजा जा सकता था और पकड़े गए बस संचालक को जुर्माना लगाया जा सकता था, इस पर डीटीओ ने कहा कि तत्काल ऐसा कोई साधन नहीं था, इसलिए मजदूरों के हित ऐसा निर्णय लिया गया. 

मजदूर यूनियन ने सुनी मजदूरों की पीड़ा
  
सूचना पर मौके पर पहुंचे झारखंड राज्य दिहाड़ी मजदूर यूनियन के राजीव कुमार, गौतम चटर्जी, संजीव कुमार ने मजदूरों से मिलकर उनकी समस्या को सुना और जानकारी ली. उन्हें भोजन कराया. सभी के लिए रात में यूनियन रहने की व्यवस्था कर रही थी. गुरूतेग बहादुर मेमोरियल में मजदूरों को ठहराने की तैयारी थी.

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