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झारखंड स्टेट स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसाइटी में नहीं है सब कुछ ठीक-ठाक

1400 खिलाड़ियों का चयन कर देना था प्रशिक्षण, फिलहाल 400 के आसपास ही खिलाड़ी हैं

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Deepak

Ranchi: झारखंड सरकार और सीसीएल के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे राज्य स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसाइटी में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है. राजधानी के मेगा स्पोर्ट्स कांप्लेक्स परिसर और मोरहाबादी में तीरंदाजी, एथेलेटिक्स, टाइक्वांडो, कुश्ती और फुटबाल के खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए सोसाइटी बनी थी. सोसाइटी की तरफ से वर्तमान में फुटबाल, बास्केटबॉल, हैंडबॉल और वॉलीबॉल के लिए प्रशिक्षण देने की व्यवस्था समाप्त कर दी गयी है. इसका कोई ठोस जवाब भी नहीं दिया गया है. झारखंड में इन खेलों पर अधिक ध्यान दिया जाता है. लब्बो-लुआब यह है कि सोसाइटी में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है. सोसाइटी की तरफ से हाल ही में एथेलेटिक्स, साइक्लिंग, स्वीमिंग, बैडमिंटन, वेटलिफ्टिंग, टेबल-टेनिस, कराटे, हॉकी, फेंसिंग के कोच और सहायक कोच की नियुक्ति का विज्ञापन निकाला गया था. इसमें उपरोक्त खेल के कोच का कोई जिक्र भी नहीं है.

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2016 में शुरू हुई थी सोसाइटी

2016 में शुरू हुई सोसाइटी के तहत फिलहाल 400 बच्चे हैं, जो यहां प्रशिक्षण पा रहे हैं. सालाना 25 करोड़ रुपये बच्चों के प्रशिक्षण, उनके रहने-खाने और स्टाइपेंड के नाम पर खर्च हो रहे हैं. सरकार का दावा है कि 2024 में होनेवाले पेरिस ओलंपिक में यहां से प्रशिक्षण पा रहे बच्चे गोल्ड मेडल जीतेंगे. सरकार की तरफ से एक खिलाड़ी के पीछे प्रत्येक वर्ष 1.35 लाख रुपये खर्च किया जा रहा है. यहां पर अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के उन बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाना था जो खेलों में बढ़िया प्रदर्शन कर रहे हों. इन्हें प्रत्येक महीने 500 रुपये का वजीफा भी दिया जाना था. सीसीएल की तरफ से सोसाइटी में 350 बच्चों का चयन करना था, जबकि इतने ही बच्चे (खिलाड़ी) झारखंड सरकार को भी देने थे. 700 खिलाड़ियों का चयन राष्ट्रीय स्तर पर किया जाना था.  प्रावधानों के अनुसार सरकार को सिर्फ अपने कोटे के तहत अनुशंसित 350 बच्चों का ही खर्च वहन करना है.

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सरकार और सीसीएल के बीच तनातनी शुरू

राज्य सरकार के खेलकूद, युवा कार्य और संस्कृति विभाग, पार्टनर एजेंसी सीसीएल के कार्यकलापों से संतुष्ट नहीं है. सरकार की तरफ से अब तक 25 करोड़ रुपये से अधिक की राशि इस सोसाइटी को दी गयी है, जबकि इतनी ही राशि सीसीएल को भी खर्च करनी थी. सीसीएल की तरफ से सरकार की तरफ से उपलब्ध करायी गयी राशि का कोई लेखा-जोखा नहीं दिया गया है, न ही कोई उपयोगिता प्रमाण पत्र दिया गया है. सीसीएल प्रबंधन ने पूर्व में सोसाइटी से जुड़े आलोक कुमार को हटा दिया है. अब विक्रांत मल्हान सारा कामकाज देख रहे हैं. इसको लेकर भी सरकार में कई तरह की बातें हो रही हैं. यहां यह बताते चलें कि मुख्य सचिव सोसाइटी के अध्यक्ष और पैट्रोन हैं, जबकि सीसीएल के सीएमडी मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. समिति में खेल कूद विभाग के सचिव, निदेशक के अलावा 10 सदस्य भी नामित हैं, जो महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं.

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