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JHARKHAND: 7 साल में एक भी गांव नहीं बना आदर्श, 100 अनुसूचित जाति बहुल गांवों का हुआ था चयन, केंद्र नाराज

केंद्रीय सचिव ने झारखंड के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर- जल्द करायें काम

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NIKHIL KUMAR

Ranchi: 15 अगस्त 2022 को भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर देश भर के 10 हजार गांवों को आदर्श गांव घोषित करने का लक्ष्य है. जिन गांवों को आदर्श गांव के पारामीटर (मापदंडों) पर विकसित किया जा चुका है या अगस्त 2022 के पहले विकसित कर लिया जायेगा, उन्हें 15 अगस्त को आदर्श ग्राम सम्मान से नवाजा जायेगा. लेकिन झारखंड में जिन 100 गांवों को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने के लिए चुना गया था, वहां धरातल पर नहीं के बराबर काम हुआ है. भारत सरकार ने आदर्श ग्राम योजना के तहत फेज वन के तहत 2014-15 में ही इन गांवों को चुना था, लेकिन छह-सात साल बीत जाने के बाद भी झारखंड के एक भी गांव में वो बुनियादी सुविधाएं नहीं मुहैया करायी जा सकीं, जिसके आधार पर उसे आदर्श ग्राम का दर्जा दिया जा सके. इसके तहत 50 फीसदी से अधिक अनुसूचित जनजाति आबादी बाहुल्य गांवों को चुना गया था.

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झारखंड में 2014 से 2019 तक भाजपा की सरकार थी. दिसंबर अंत में झामुमो के नेतृत्व में बनी सरकार के लगभग डेढ़ साल पूरे हो गये हैं. जाहिर है, भाजपा की पांच साल तक चली सरकार इस योजना को लेकर उदासीन रही और अब डेढ़ साल से चल रही झामुमो-कांग्रेस-राजद सरकार ने भी इस ओर तवज्जो नहीं दिया.

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आदर्श ग्राम घोषित करने के लिए केंद्र की ओर से राज्य सरकार को टाइमलाइन भी काफी पहले दिया जा चुका है. झारखंड में इस योजना के तहत ज्यादातर अनुसूचित जाति बाहुल्य गांव चुने गये थे. केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत झारखंड के कई गांवों में अभी भी कागजों पर डेवलपमेंट प्लान बन रहा है. जिन गांवों में काम शुरू हुआ, वह अभी भी अधूरा है. इसे लेकर केंद्र सरकार ने गहरी नाराजगी जतायी है. केंद्रीय सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण मंत्रालय भारत सरकार के सचिव आर.सुब्रह्मण्यम ने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है. कहा है कि झारखंड में काफी धीमी गति से काम हो रहा है. चयनित 100 गांव को आदर्श ग्राम घोषित करने के लिए सारी प्रक्रिया पूरी कर ली जानी चाहिए थी,लेकिन अभी तक भारत सरकार को आदर्श ग्राम के पारामीटर पर एक भी गांव का नाम फेज वन के तहत प्राप्त नहीं हुआ है, जो चिंता का विषय है.

बता दें कि, प्रधानमंत्री सांसद आदर्श ग्राम योजना की घोषणा के बाद इसे लेकर लोगों में काफी उत्साह था. इस योजना से पूरे देश के सांसदों को तीन-तीन गांवों को गोद लेकर संपूर्ण विकास के लिए योजनाएं चलाने की बात कही गयी थी. लेकिन छह-सात साल बाद भी झारखंड में एक भी गांव आदर्श ग्राम नहीं बन सका. अभी भी इन गांवों में बुनियादी सुविधाएं मुयस्सर नहीं है.

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2019-20 में भी चुने गये गांव का प्लान अधूरा

भारत सरकार ने पीएम आवास योजना के क्रियान्वयन के लिए नये सिरे 2019-20 में गाइडलाइन जारी की और इसके लिए झारखंड के 512 गांवों को आदर्श ग्राम बनाने का लक्ष्य रखा गया. केंद्रीय सचिव ने संशोधित लक्ष्य के काम स्लो होने पर चिंता जतायी है. 512 नये गांवों के चयन के बाद 27.91 करोड़ की राशि का प्रावधान किया गया था. 152 गांवों का चयन 2018-19 का चयन हुआ था. इसमें भी 15.69 करोड़ दिए गये थे. केंद्रीय सचिव ने कहा है कि अभी भी राज्य को आदर्श ग्राम घोषित करने के लिए कई काम बाकी हैं. अभी तक सिर्फ 68 गांवों को लिए विलेज डेवलपमेंट प्लान ही मिला है, जबकि 354 गांवों के प्लान भी अभी तक नहीं बने हैं. 2018-19 व 2019-20 में तो एक भी प्लान भारत सरकार को नहीं भेजा गया है.

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2014-15 में प्रारंभ हुई, मिली थी केंद्रीय सहायता

आदर्श ग्राम बनाने के लिए वर्ष 2014-15 में ही भारत सरकार ने 100 गांवों के लिए 21 करोड़ रुपये आवंटित किए थे. हर गांव में 20 से 21 लाख दिए गये थे. इसके अलावा राज्य सरकार ने भी अपने हिस्से से पांच करोड़ की राशि दी थी. 2019-20 में भी भारत सरकार ने अतिरिक्त सहायता के लिए राशि दी थी. मनरेगा,पीएम आवास, पीएमजीएसवाई,पेयजल आपूर्ति,सोलर योजना सहित अन्य सभी योजनाओं का क्रियान्वयन इन गांवों में प्राथमिकता के तौर पर किया जाना है. अनुसूचित जाति के लोगों के लिए रोजगार भी सृजन करना इसका मुख्य उदेश्य था.

आदर्श ग्राम होते तो ये होता

लोगों को पक्के मकान के साथ- साथ पानी,बिजली,स्वास्थ्य,शिक्षा की व्यवस्था
गरीबी का यथासंभव उन्मूलन, कितु तीन वर्ष के भीतर कम से कम 50 प्रतिशत तक इसके प्रसार में कमी.
सार्वभौमिक प्रौढ़ साक्षरता

100 नामांकन प्रौढ़ साक्षरता

  • शिशु मृत्यु दर प्रति हजार जीवित जन्म में 30 तक तथा मातृ मृत्य दर प्रति लाख में 100 तक कमी
  • सभी पात्र परिवारों के लिए आइएवाई आवासों का आवंटन
  • गांव ग्रामीण विाकस मंत्रालय के पेयजल आपूर्ति विभाग के निर्मल ग्राम पुरस्कार के मानकों को पूरा करना
  • सभी ग्रामवासियों के लिए सुरक्षित पेयजल सुविधा तक पहुंच
  • गर्भवती महिलाएं के लिए 100 प्रतिशत संस्थागत प्रसव. बच्चों का पूर्ण टीकाकरण.
  • गांव को पक्की सड़क के साथ जोड़ना
  • कोई बाल विवाह और बाल श्रम नहीं
  • शराब तथा अन्य नशीले पदार्थो के सार्वजनिक उपयोग पर प्रतिबंध

आदर्श ग्राम के लिए इनका हुआ था चयन

बोकारो-चाकुलिया, गमारया,कौरिया,कोलबेंदी,उदलबानी. देवघर-जमुआ.धनबाद- बैजना,गोलपहलबारी,जमुआ,रामपुर,तेंतुलिया. दुमका- आसनजोर,अस्ताजोरा,बरमनिया,मोखपुर,सिंगुटा. सिमडेगा-केनूगुटू,खरवागढ़ा,सरायकेला-हुतुप,रायमासा,गंदमारा,डिरलोंग,साहेबगंज-नावापारा,मोहनपुर,छोटा सोलबंधा,बेतारी,अनितीकर,पूर्वी सिंहभूम- बानाबुरा,दुधकुंडी,हरिना,लोहामलिया,तुरी,गढ़वा- ओमरो,बयूलिया,जमुआ,कंचनपुर,पुरहे,पाटरोडीह. गोड़डा-बनोधा,बीरिशया,सरवा,जामताड़ा,नगड़ी. रांची-बेंटी,केनाडीह, मलघोंसा,मुरेठा,सिरम इत्यादि.

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