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Jharkhand News: अवैध उत्खनन पर लगाम लगाना सरकार के लिये टेढ़ी खीर, लगातार बढ़ रहे हैं मामले

पांच साल में 838 से बढ़कर 3229 पहुंचा आंकड़ा

Ranchi: तमाम प्रयासों के बावजूद राज्य के विभिन्न हिस्सों में अवैध उत्खनन का कारोबार जारी है. सरकार के लिये अवैध उत्खनन पर लगाम लगाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है. पहले अवैध खनन केवल कोयले तक ही सीमित था लेकिन अब इसका दायरा बढ़ गया है. बालू, बॉक्साइट, पत्थरों की भी अवैध खुदाई का सिलसिला शुरू हुआ है. तस्करों ने इसे आय का जरिया बना लिया है. इसकी आड़ में राज्य में अवैध गतिविधियां भी बढ़ गयी हैं. सरकारी आंकड़े इसकी गवाही देते हैं. झारखंड में डेढ़ साल के अंदर अवैध पत्थर, कोयला,बालू खनन से संबंधित 500 से अधिक केस दर्ज हुये है. वर्ष 2016-17 में अवैध उत्खनन का मामला 838 रहा था, जो बढ़ कर वर्ष 2019-20 में 3229 हो गया.

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2686 एफआईआर व 1070 मामले न्यायालय में

सरकार के आंकड़ों पर गौर करें तो पांच सालों अवैध उत्खनन से संबंधित 2686 एफआईआर दर्ज किये गये हैं. जबकि, 1070 मामले न्यायालय में चल रहे हैं. प्रशासन ने अवैध उत्खनन के खिलाफ कार्रवाई कर अब तक 10031 वाहन जब्त किये हैं. वहीं, सरकार द्वारा अब तक 4183.045 लाख की वसूली की गयी है.

 

वर्षवार अवैध उत्खनन के मामले

वर्ष                          मामले

2016-  17               838

2017-18                 2772

2018-19                 3132

2019-20                3269

 

कानूनी कार्रवाई का डर नहीं

अवैध उत्खनन को लेकर सरकार और माफिया आमने-सामने हैं. विधानसभा में भी इसे लेकर गहमा-गहमी होती रही है. सरकार के मुताबिक माफियाओं के खिलाफ वह कानूनी कार्रवाई कर रही है. लगातार अवैध उत्खनन में लगे माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है लेकिन, माफियाओं को इसका डर नहीं है. केवल वाहनों को जब्त कर स्थानीय प्रशासन अपनी जिम्मेदारी का इतिश्री समझ कर काम कर रहा है.

 

राज्य स्तरीय टास्क फोर्स का भी हुआ था गठन, पर कुछ नहीं होता

अवैध उत्खनन पर अंकुश लगाने को लेकर सरकार के स्तर पर राज्य स्तरीय टास्क फोर्स का भी गठन किया गया था. लेकिन राज्य में वो भी कारगर साबित नहीं हो रहा है.

 

स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से भी इंकार नहीं

अवैध उत्खनन में स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता है. कई जिलों में जिला टास्क फोर्स द्वारा कार्रवाई में स्थानीय पुलिस को शामिल नहीं किया गया है. इसका ताजा उदाहरण आदित्यपुर में हुई कार्रवाई है. जहां टास्क फोर्स ने अवैध बालू से लदे ट्रक को पकड़ा और थाने ले जाया गया. पर इस पूरे कार्रवाई में स्थानीय पुलिस को दूर रखा गया.

 

विधायक ममता देवी ने भी कई बार पुलिस प्रशासन पर सवाल खड़े किये

रामगढ़ की विधायक ममता देवी ने कई बार अवैध उत्खनन को लेकर आवाज उठायी है. यही नहीं उन्होंने स्थानीय पुलिस की गतिविधियों पर भी सवाल खड़ा कर चुकी है.

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