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Jharkhand News: अनुसूचित जिलों में 100 फीसदी आरक्षण के नियम रद्द करने की फाइल राजभवन में, हो रही समीक्षा

संकल्प रद्द होते ही राज्य में खुलेंगे नई नियुक्ति के दरवाजे

NIKHIL KUMAR

Ranchi: रघुवर दास की सरकार में बनी नियोजन नीति रद्द होने के बाद अब झारखंड में अटकी हुई नौकरियों के दरवाजे फिर से खुल जायेंगे. हेमंत सरकार के पांच माह पूर्व के निर्णय के आलोक में कार्मिक विभाग ने राज्य के 13 अनूसचित जिलों में 2016 से लागू 100 फीसदी आरक्षण के नियम को रद्द करने के लिए फाइल राजभवन भेज दी है. राजभवन में इसकी समीक्षा हो रही है. वहां से सहमति मिलते ही 2016 की नियोजन नीति को रद्द करने का संकल्प जारी कर दिया जायेगा. इसके साथ ही नयी नियुक्ति के लिए नये सिरे से विज्ञापन निकाले जा सकेंगे.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हाल में एक माह के अंदर नियुक्ति पर लगी रोक हटाने संबंधी घोषणा की थी. सीएम ने नयी नियोजन नीति बनाने को भी कहा है,जिसका प्रारूप तैयार हो रहा है. अधिकारियों का कहना है कि जब तक प्रारूप नहीं बनता है तब तक 2016 के पहले की नीति से नियुक्तियां हो सकेंगी. इसी आलोक में कार्मिक विभाग ने पहल तेज कर दी है.

दरअसल, झारखंड कैबिनेट ने पूर्व की सरकार की बनी नियोजन नीति को रद्द करने का फैसला लिया है. इसके तहत राज्य में 2018 में बनी 11 गैर अनुसूचित जिलों में लागू नियोजन नीति रद्द हो चुकी है. वहीं, 13 अनुसूचित जिलों में नियोजन नीति को रद्द करने का फैसला फरवरी माह में ही लिया गया था,लेकिन संकल्प जारी नहीं होने की वजह इन जिलों में तृतीय व चतुर्थ वर्गीय पदों पर 100 फीसदी आरक्षण का आदेश अभी तक निरस्त नहीं हो सका.

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पूर्व की नीति लागू हुई तो बाहरी को भी मौका

यदि 2016 के पहले की नीति लागू होती है तो झारखंड के स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूसरे जिले और बाहरी लोगों को नियोजन में मौका मिल सकता है. राज्य स्तर की तृतीय व चतुर्थ वर्गीय नौकरी में वे शामिल हो सकेंगे. पहले की नीति में 100 फीसदी आरक्षण की बाध्यता नहीं थी. ऐसे में सभी लोग राज्य की बहालियों में भाग ले सकेंगे.
बता दें कि सितंबर 2020 में हाइकोर्ट के आदेश के आलोक में झारखंड सरकार ने पूर्व की नियोजन नीति को रद्द करने का निर्णय लिया है. साथ ही नियुक्तियों के लिए निकाले गये विज्ञापन भी रद्द करने का आदेश भी दिया गया है. इसी के तहत गैर अनुसूचित 11 जिलों में 9,149 नियुक्ति के विज्ञापन रद्द कर दिए गये हैं,वहीं 13 अनुसूचित जिले के आठ हजार विज्ञापन अभी तकनीकी रूप से रद्द नहीं हुए हैं, क्योंकि,अभी तक इसका संकल्प जारी नहीं हुआ है.

अब तक की नियुक्तियों में 98 फीसदी नौकरी झारखंडियों को ही मिली

सरकार ने एक अब तक हुई नियुक्तियों पर एक सर्वे कराया है. सभी विभागों से नियुक्तियों की विवरणी की समीक्षा की गयी है. अधिकारिक सूत्रों के अनुसार झारखंड में अब तक जितनी भी बहालियां हुई हैं उनमें दूसरे राज्यों से काफी कम संख्या के लोग झारखंड में नौकरी करने को इच्छुक दिखे. जिला व स्थानीय स्तर पर डोमेसाइल नीति के तहत आरक्षित वर्ग में 50 प्रतिशत नियुक्ति स्थानीय को ही मिली है. वहीं, अनारक्षित कोटे के 50 फीसदी में भी 95 से 98 फीसदी नौकरी भी झारखंड में रहने वाले लोगों को मिला है. ऐसे में पुरानी नीति लागू होती भी है तो झारखंड के लोगों की ही अधिक नियुक्ति होने के आसार हैं.

क्या है मामला

झारखंड सरकार ने वर्ष 2016 में तृतीय और चतुर्थवर्गीय पदों पर नियुक्ति के लिए नियोजन नीति बनाई थी. इसमें अनुसूचित जिलों की नौकरी में उसी जिले के निवासियों की नियुक्ति का प्रावधान है. इस नीति के तहत गैर अनुसूचित जिले के लोग आवेदन के लिये अयोग्य हैं. इधर, गैर अनुसूचित जिले में सभी जिले के लोग आवेदन कर सकते थे. सरकार की इस नीति को सोनी कुमारी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और इसे समानता के अधिकार का हनन बताया था. सरकार के इस फैसले से किसी खास जिले के लोगों के लिए सारे पद आरक्षित हो गए.

संविधान के अनुसार किसी भी पद को शत प्रतिशत आरक्षित नहीं किया जा सकता. प्रार्थी ने अदालत को बताया था कि गैर अनुसूचित जिले की रहने वाली और अनुसूचित जिले में शिक्षक के पद के लिए आवेदन किया था, लेकिन उनका आवेदन रद्द कर दिया गया. हाईकोर्ट ने इसके बाद नियोजन नीति को रद्द करने का फैसला सुनाया था.

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