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Jharkhand News: स्वास्थ्य मंत्री का दावा फेल, नहीं आई जिनोम सीक्वेंसिंग मशीन

Ranchi: झारखंड में कोरोना की रफ्तार थम गई है. रोजाना मिलने वाले संक्रमितों का आंकड़ा 200 के नीचे आ गया है. इधर, कोरोना की रफ्तार थमते ही स्वास्थ्य विभाग भी सुस्त पड़ गया है. जिनोम सीक्वेंसिंग मशीन खरीदारी का मामला ठंडे बस्ते में चला गया. मशीन खरीदारी के मद्देनजर स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता द्वारा किए गए दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं. राज्य में जिनोम सीक्वेंसिंग मशीन इंस्टाल नहीं हो पाने को व्यवस्था को दुरुस्त करने के नाम पर स्वास्थ्य विभाग लोगों के जीवन से खिलवाड़ कहा जा सकता है. बताते चलें कि इस मशीन से वायरस का वैरिएंट पता लगाने के अलावा कई तरह के जांच की सुविधा मिलेगी. जिसका लाभ इलाज के लिए आने मरीजों को मिलेगा. वहीं रिसर्च में भी काफी मदद मिलेगी.

फाइलों में ही उलझ गई मशीन

कोरोना के अलग-अलग वैरिएंट के आने के बाद से ही स्वास्थ्य विभाग जिनोम सीक्वेंसिंग की खरीदारी की योजना बना रहा था. इस बीच झारखंड में थर्ड वेव की दस्तक हो गई. वहीं ओमिक्रोन के भी मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ गई. आनन फानन में टेस्टिंग के लिए जिनोम सीक्वेंसिंग मशीन का आर्डर तो कर दिया गया लेकिन उसके बाद की प्रक्रिया फाइलों में ही अटकी रह गई. आज स्थिति यह है कि खरीदारी की ही प्रक्रिया अधर में लटकी है तो मशीन आना दूर की बात है.

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Sanjeevani

सप्लाई का दावा हो गया फेल

2020 के मार्च में कोरोना की दस्तक के बाद से लगातार मरीजों के मिलने का सिलसिला जारी है. ऐसे में आइसीएमआर की गाइडलाइन के तहत रिम्स से हर महीने रैंडम सैंपल आइएलएस भुवनेश्वर भेजा जाता रहा है. जिससे कि यह पता लगाया जा सके कि संक्रमितों में कौन सा वैरिएंट एक्टिव है. इसी के लिए जिनोम सीक्वेंसिंग मशीन की एक महीने के अंदर सप्लाई कर दी जाएगी, लेकिन यह दावा पूरी तरह से फेल हो गया.

अभी भी भुवनेश्वर भेजा जा रहा सैंपल

आज भी मशीन के नहीं आने के कारण सैंपल टेस्टिंग के लिए आईएलएस भुवनेश्वर ही भेजे जा रहे हैं. इस चक्कर में 20 दिन तक का समय लग रहा है. वहीं रिपोर्ट आने तक डॉक्टरों और मरीजों के पास इंतजार करने के अलावा कोई चारा नहीं है. बताते चलें कि आइसीएमआर की एक्सपर्ट्स की टीम ने दिसंबर में रिम्स का निरीक्षण किया था. साथ ही रिम्स में जिनोम सीक्वेंसिंग मशीन लगाने के लिए सही जगह बताई थी.

हाईकोर्ट की फटकार भी बेअसर

जिनोम सीक्वेंसिंग मशीन की खरीदारी नहीं किए जाने पर राज्य सरकार के जवाब पर झारखंड हाईकोर्ट ने पिछले महीने सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी की थी. जिसमें कहा गया था कि कोरोना की तीसरी लहर लगभग आ चुकी है, जब लोग मरने लगेंगे तब मशीन की खरीद की जाएगी. साथ ही 2 सप्ताह का समय देते हुए मशीन इंस्टालेशन करते हुए कोर्ट को अवगत कराने का निर्देश दिया था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को हाई कोर्ट की फटकार से भी कोई फर्क नहीं पड़ा.

एनएचएम प्रोक्योरमेंट सेल के नोडल आफिसर डॉ अनिल कुमार ने बताया कि मशीन का आर्डर किया गया था. लेकिन कुछ तकनीकी कारण से अभी तक मशीन के आने पर फिलहाल रोक लग गई है. कुछ सिविल वर्क के लिए प्रक्रिया भी चल रही है. जिसकी फाइल विभाग को भेजी गई है. मशीन की खरीदारी को लेकर फिलहाल कुछ बता पाना मुश्किल है.

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