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दो साल में न नियुक्ति हुई, न प्रोन्नति नियमावली में संशोधन इसलिए राज्य में हेडमास्टर के 3226 पद में 95% खाली

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Rahul Guru

Ranchi: झारखंड राज्य को बने 19 साल हो चुके हैं. लेकिन यहां कार्यरत माध्यमिक व प्राइमरी स्कूलों के शिक्षक अभी भी बिहार की प्रमोशन नियमावली के तहत ही काम कर रहे हैं. इस नियमावली में अभी तक संशोधन नहीं किया गया है.

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यही वजह है कि राज्य के स्कूलों में हेड मास्टर के 3226 पद सृजित होने के बाद भी मात्र 130 हेडमास्टर ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 3226 सृजित पदों में से वर्तमान में 3096 पद खाली हैं. राज्य में मात्र पांच ही ऐसे जिले हैं, जहां प्राइमरी स्तर पर एक-एक हेडमास्टर काम कर रहे हैं.

सीधी नियुक्ति के लिए दो साल पहले निकला था आवेदन

गौरतलब है कि राज्य के स्कूलों में हेडमास्टर की नियुक्ति हो सके इसके लिए जेपीएससी ने सीधी नियुक्ति के लिए आवेदन मंगवाये थे. सरकार ने 23 फरवरी 2017 को 668 हेडमास्टर पदों के लिए विज्ञापन निकाला था.

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अपरिहार्य कारण का हवाला देते हुए सरकार ने 18 सितंबर 2019 को 668 हेडमास्टरों की नियुक्ति वाले विज्ञापन को रद्द कर दिया है. सीधी नियुक्ति के अलावा प्रोन्नति कर हेडमास्टर के सीटों को भरना था, लेकिन प्रोन्नति नियमावली में संशोधन नहीं होने की वजह से ऐसा करना संभव नहीं हो पाया.

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क्या कहती है नियमावली

बिहार की प्रमोशन नियमावली-1993 ही राज्य में शिक्षकों की प्रोन्नति को देख रही है. इस नियम के तहत प्रोन्नति के लिए शिक्षकों को ग्रेड फोर में सात साल का कार्य अनुभव होना चाहिए.

जानकारी के मुताबिक, यहां कार्यरत शिक्षक ग्रेड फोर में तो हैं, पर समय-समय पर प्रोन्नति नहीं मिल पाने की वजह से उनके पास सात साल का अनुभव नहीं मिल पाता है. शिक्षक संघ के मुताबिक, इस नियमावली में संशोधन कर अधिकांश पदों को भरा जा सकता है.

सात जिलों में एक भी हेडमास्टर नहीं

जानकारी के अनुसार, राज्य के 24 जिलों में सात ऐसे जिले हैं, जहां के मीडिल स्कूलों में एक भी स्थायी हेडमास्टर नहीं हैं. इन जिलों में हजारीबाग, चतरा, सरायकेला, लोहरदगा, रामगढ़, साहेबगंज व पाकुड़ शामिल हैं. इसके अलावा प्राइमरी स्कूलों की बात करें तो रामगढ़, कोडरमा, पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा व जामताड़ा में एक-एक स्थायी हेडमास्टर है.

शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक कार्यों में पड़ रहा असर

गौरतलब है कि स्कूलों में हेडमास्टर के नहीं होने से शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक कार्यों पर असर पड़ रहा है. वहीं जो शिक्षक कार्यरत हैं, उन पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा हुआ है.

लगभग हर माह हेडमास्टर रिटायर भी हो रहे हैं. लेकिन उनकी जगह नियुक्ति नहीं की जा रही है. राज्य के मीडिल स्कूलों में हेडमास्टर के कुल पदों में से केवल 5 फीसदी ही सेवा दे रहे हैं, जबकि 95 फीसदी पद खाली हैं.

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