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झारखंड मुखिया संघ की मांग, ग्राम पंचायतों को किया जाये सुदृढ़

राज्यभर के सांसदों-विधायकों को लिखी चिट्ठी

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Ranchi: झारखंड मुखिया संघ ने राज्य के सभी विधायको और सांसदों को पत्र लिख कर ग्राम पंचायतों और लोकतान्त्रिक विकेंद्रीकरण को सुदृढ़ करने की मांग की है. मुखिया संघ का कहना है कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचित जन प्रतिनिधियों का विशेष महत्व है. चाहे वो सांसद हो, विधायक या फिर पंचायती राज प्रतिनिधि, गांव से लेकर देश तक के विकास की जिम्मेवारी इनके हाथों में हैं.

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लेकिन झारखंड में ग्राम पंचायत आज भी सुदृढ़ नहीं है. 32 सालों बाद 2010 में पंचायती राज सरकार चुनी गई. वही आठ सालों बाद भी स्थानीय शासन प्रणाली को कोई अधिकार नहीं है. यहां तक कि ग्राम पंचायत स्तरीय कर्मी जैसे रोजगार सेवक, पंचायत सेवक, जेई आदि की प्रशासनिक जवाबदेही प्रखंड प्रशासन के प्रति है ना कि ग्राम पंचायत के प्रति.  इसके लिए ग्राम पंचायत को मजबूत करना जरुरी है.

क्या है मांगें

झारखंड में ग्राम पंचायत को सुदृढ़ करने की मांग को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि मुखिया संघ की मांग है कि ग्राम/आदिवासी विकास समिति के गठन व कार्यान्वयन सम्बंधित सभी निर्देश तुरंत रद्द किये जाए. इसके साथ ही ग्राम पंचायत स्तरीय सभी कर्मियों और सेवा प्रदतातों का वित्तीय व प्रशासनिक नियंत्रण ग्राम पंचायतों को दिया जाए. इसके अलावे मनरेगा योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति का अधिकार ग्राम पंचायतों को दिया जाए और MIS की व्यवस्था पंचायत भवन में भी सुनिश्चित की जाये. राज्य वित्तीय आयोग को सक्रिय किया जाए और त्रि-स्तरीय पंचायती राज सरकारों के निधि दिया जाए. वही पेसा कानून अविलम्ब लागू हो और पेसा का नियमावली बनाया जाए. इसके साथ ही सभी जन- कल्याणकारी योजनाओं का आधार से जुड़ाव समाप्त किया जाए

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पेंशन राशि में हो बढ़ोतरी

मुखिया संघ की मांग है कि जन वितरण प्रणाली और सामाजिक सुरक्षा पेंशन का सार्वभौमिकरण किया जाए और पेंशन की राशि को बढ़ाकर 2000 रुपये किया जाए. सभी एकल महिलाओं और आदम जनजाति के परिवारों को अन्त्योदय राशन कार्ड दिया जाए. निजी राशन डीलरों को हटाकर ग्राम पंचायतों और महिला संगठनों को राशन वितरण की जिम्मेवारी दी जाए. इसके साथ ही मद्ध्यान भोजन में बच्चों को प्रति सप्ताह 5 दिन अंडा दिया जाए. वही नरेगा मज़दूरी दर को बढ़ाकर कम-से-कम राज्य के न्यूनतम मज़दूरी दर के बराबर किया जाए.

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