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Jharkhand: कोविड ने लगा दिया टीबी मरीजों के इलाज पर ब्रेक, नहीं मिल रहा पोषण डाइट

Ranchi: कोरोना के कहर के बीच टीबी मरीजों के मिलने का सिलसिला भी जारी है. स्पेशल ड्राइव के तहत कई मरीजों में टीबी के लक्षण पाए गए थे। जब उनकी टेस्टिंग कराई गई तो टीबी की पुष्टि हुई और उनका इलाज भी शुरू कर दिया गया, लेकिन कोविड की थर्ड वेव ने इन मरीजों के इलाज पर ब्रेक लगा दिया. वहीं उनकी प्रापर ढंग से मॉनिटरिंग भी नहीं हो पा रही है.

इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले चार महीने से पोषण डाइट के लिए दी जाने वाली राशि नहीं भेजी जा रही है. इस वजह से मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है.
बताते चले कि टीबी के मरीजों को हर महीने दवाओं के अलावा सप्लीमेंट्स के लिए 500 रुपए देने का प्रावधान किया गया है. जिससे कि उन्हें दवा के साथ अच्छा सप्लीमेंट मिले और जल्दी रिकवर हो.

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ज्यादातर स्टाफ कोविड ड्यूटी में

इस बीमारी की मॉनिटरिंग के लिए अलग विभाग है. जहां पर डॉक्टरों से लेकर स्टाफ व मरीजों को दवा खिलाने वालों की पूरी टीम है, लेकिन कोविड के बढ़ने के कारण टीबी विभाग के स्टाफ को कोविड ड्यूटी में तैनात कर दिया गया है. इस वजह से टीबी विभाग के काम में देरी हो रही है. वहीं मरीजों की प्रापर मॉनिटरिंग भी नहीं हो पा रही है. कई स्टाफ अपना चार्ज दूसरों को देकर जा रहे है जिससे कि कागजी काम चलता रहे.

सहिया को लगाया गया वैक्सीनेशन में

मरीजों को डॉट्स की ओर से दवा उपलब्ध कराई जाती है. ऐसे में दवा का छह महीने से लेकर उनकी बीमारी के हिसाब से 24 महीने तक दवाएं चलती है. ऐसे में दवा एक दिन भी न छूटे इसके लिए सहिया को उनके घरों तक दवाएं पहुंचाने का काम दिया गया, लेकिन कोविड के दौरान उन्हें वैक्सीनेशन अभियान में लगा दिया गया है. इस वजह से मरीज खुद से दवा लेने के लिए सेंटर तक जा रहे है.

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एक साल में मिले 6500 नए मरीज

पिछले साल डोर टू डोर अभियान के तहत 9880 मरीजों को ढूंढने का लक्ष्य रखा गया था. चूंकि अब टीबी के मरीज जागरूक हुए है और खुद से सामने भी आ रहे है. ऐसे में इंफेक्शन फैलने की संभावना को देखते हुए ही ड्राइव की शुरुआत की गई. जिसके तहत एक साल में 9880 मरीज रांची में ढूंढने का लक्ष्य था. कोविड के कारण 6500 नए मरीज ही टीम ढूंढ पाई, लेकिन ये आंकड़ा भी विभाग के कान खड़े करने के लिए काफी हो गया.

2025 में टीबी खत्म का लक्ष्य

जिले व राज्य से 2025 तक टीबी को जड़ से खत्म करने लक्ष्य सरकार ने रखा है. इसके लिए जिले के शहरी व ग्रामीण इलाके में मरीजों की पहचान और इलाज का अभियान भी चल रहा है. लेकिन विभाग की सुस्त मॉनिटरिंग और पोषण नहीं मिलने से मरीजों को रिकवर होने में समय लगेगा. वहीं मरीज मॉनिटरिंग नहीं होने की स्थिति में इंफेक्शन दूसरों को बांट सकते हैं. ऐसे में 2025 में टीबी को पूरी तरह से खत्म करना विभाग के लिए बड़ी चुनौती होगी.

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डिस्ट्रिक्ट टीबी ऑफिसर डॉ एस मंडल ने कहा कि हमारे ज्यादतर स्टाफ कोरोना की ड्यूटी में लगा दिए गए हैं. इस वजह से काम प्रभावित हो रहा है. लगातार टीबी के केस बढ़ रहे हैं. डाइट के लिए राशि फिलहाल नहीं भेजी जा रही है. फंड का कुछ इश्यू है जो जल्द ही दूर हो जाएगी. स्टाफ के बिना हम कुछ कर नहीं सकते.

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