Ranchi

#Jharkhand की जेलों में मैनपावर की भारी कमी, कर्मियों की कमी से हो चुकी है कई आपराधिक घटनाएं

Ranchi: मैनपावर की भारी कमी से जूझ रही है झारखंड की जेले. झारखंड की जेलों में जेल अधीक्षक, जेलर और कक्षपाल की भारी कमी है. राज्य गठन को 20 साल होने को हैं, लेकिन इतने वर्षों के बावजूद भी झारखंड की सभी जेलों को जेल अधीक्षक, जेलर और कक्षपाल नहीं मिल पाया है.

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मैन पावर की कमी जेलों की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बन रही है. कक्षपाल से लेकर जेलर तक के पद अनुबंध पर चल रहे हैं. अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कमी की वजह से जेल ब्रेक से लेकर कई तरह की अपराधिक घटनाएं घट चुकी हैं.

राज्य की जेलों में मैनपावर की भारी कमी

राज्य की जेलों में बंद कैदियों का आंकड़ा अभी 18 हजार से अधिक है,जबकि राज्य की जेलों में करीब साढ़े सोलह हजार बंदियों के रखने की ही क्षमता है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में ज्यादा लोड वाले जेलों से कैदी कम लोड वाले जेलों में शिफ्ट हुए हैं, इसके बावजूद सभी जेलों में क्षमता से अधिक बंदी हैं.

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इन बंदियों को व्यवस्थित करने में जेलों के मैनपावर की कमी आड़े आ रही है. स्वीकृत बल की तुलना में वर्तमान बल बेहद कम है. जेल अधीक्षक के 10, जेलर के 21, कक्षपाल के 1340 पद रिक्त पड़े हुए हैं, जो यह बताने के लिए काफी हैं कि राज्य की जेलों में मैनपावर की भारी कमी है.

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अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कमी से हो चुका है जेल ब्रेक

जेल अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कमी की वजह से जेल ब्रेक से लेकर कई तरह की अपराधिक घटनायें घट चुकी हैं. 17 अगस्त 2011 को सरायकेला जिला जेल से दो नक्सली सहित छह विचारधीन कैदी भाग गये थे. जेल ब्रेक की यह दूसरी घटना थी. इसी जेल में पहली बार 2007 के अंतिम महीने में सात विचाराधीन कैदी फरार हो गये थे.

19 जनवरी 2011 को कोल्हान प्रमंडल मुख्यालय चाईबासा जेल से तीन हार्डकोर नक्सली फरार हो गये थे. इसी तरह से 2006 में कोडरमा जेल से तीन, 2007 में चास जेल से एक, 2008 में देवघर से एक, 2009 में गुमला से एक विचाराधीन कैदी के फरार होने की खबर मिली थी.जबकि जनवरी 2008 में जमशेदपुर स्थित घाघीडीह जेल के भीतर एक विचारधीन कैदी की हत्या रिवाल्वर से कर दी गयी थी और जून 2019 में जमशेदपुर जेल में मनोज सिंह नाम के कैदी की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. जो जेल सुरक्षा पर एक गंभीर सवाल है.

झारखंड में है 29 जेल

झारखंड में 7 सेंट्रल जेल, 16 मंडल कारा, 5 उपकारा और एक ओपन जेल है. राज्य के 7 सेंट्रल जेल- रांची, हजारीबाग, जमशेदपुर, दुमका, डालटनगंज, गिरिडीह और देवघर हैं. वहीं 16 मंडल कारा- धनबाद, चाईबासा, सरायकेला, गढ़वा, लातेहार, चतरा, कोडरमा, बोकारो (चास), जामताड़ा, पाकुड़, गोड्डा, साहेबगंज, सिमडेगा, लातेहार और गुमला जिले में है. 5 उपकारा- खूंटी, तेनुघाट, रामगढ़, राजमहल, मधुपुर में हैं और राज्य का एकमात्र ओपन जेल हजारीबाग में है.

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