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केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति मिलने के बाद झारखंड के लौह अयस्क खदानों की होगी नीलामी

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  • सारंडा सुरक्षित वन क्षेत्र में अवस्थित लौह अयस्क खदानों का मामला
  • जेएसडब्ल्यू, एस्सार, सेल, टाटा स्टील का है नन वर्किंग माइनिंग लीज

Deepak

Ranchi: झारखंड के सारंडा सुरक्षित वन क्षेत्र में लौह अयस्क खदानों की नीलामी केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय की सहमति मिलने के बाद होगी. केंद्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि सारंडा के ससंगदा और कोयना क्षेत्र में वन्य प्राणियों का मूवमेंट सबसे अधिक है, जिसे क्रिटिक्ल जोन घोषित किया गया है. भारतीय इस्पात प्राधिकरण (सेल) का अंकुआ माइंस इसी क्षेत्र में है. जिससे वन प्राणियों की गतिविधियां प्रभावित होती हैं. सारंडा वन क्षेत्र में करमपदा, झिलिंगबुरू, बुद्धाबुरू, बुद्धाबुरू, गुवा, किरिबुरू, मेगाहातूबुरू, अंकुआ, अंकुआ सुकरूलुतुबुरू, अंकुआ (सुरक्षित), घाटकु री जैसे माइनिंग जोन हैं. इनमें से अंकुआ का इलाका सबसे अधिक संवेदनशील है.

अंकुआ, करमपदा में सेल, टाटा स्टील, रूंगटा संस लिमिटेड, झारखंड राज्य खनिज विकास निगम, देबुका भाई बेलजी, विजय ओझा सरीखी कंपनियों के खदान हैं. इनमें से वर्किंग खदान को शर्तों के साथ चलाने की सरकार की योजना है, जबकि नन वर्किंग और रद्द किये गये खदानों की नीलामी होगी. सारंडा हॉट स्पॉट जोन में किसी भी कंपनियों को लौह अयस्क नहीं दिया जा सकता है. केंद्र सरकार ने सारंडा में 90 मिलियन टन ही खनन करने की एक अधिकतम सीमा तय कर दी है.

स्टडी रिपोर्ट में सारंडा को आठ जोन में बांटा गया

केंद्र की तरफ से सारंडा वन क्षेत्र में कैरिंग कैपेसिटी स्टडी रिपोर्ट तैयार की गयी है. इसमें सारंडा वन क्षेत्र को आठ जोन में बांटा गया है. इसमें चाईबासा साउथ फोरेस्ट डिविजन में पांच क्लस्टर आते हैं. इन क्लस्टरों में 53 लौह अयस्क खदान हैं. इनमें 11 लौह अयस्क के खदान ही कार्यरत हैं. 29 नन वर्किंग खदान हैं, जिसमें 18 वैसे लीजधारक भी हैं, जिनका लीज रद्द कर दिया गया है. सारंडा में 18 कंपनियों ने खनन के लिए आवेदन दिया है, जिसमें 14 खनन लीज जारी करने के एडवांस स्टेज में है. तीन कंपनियों को प्रोस्पेक्टिंग लीज दिये जाने का प्रस्ताव भी राज्य और केंद्र सरकार के पास लंबित है.

राज्य सरकार द्वारा रद्द किये गये लौह अयस्क के खनन पट्टे

राज्य सरकार की तरफ से सारंडा वन क्षेत्र में 13 खदान रद्द किये गये हैं. इनमें चंद्र प्रकाश सारडा, केएस आहलुवालिया के दो, कुशाभाऊ एल ठक्कर, केए राठौर, मिसरीलाल जैन एंड संस, रेवती रमन प्रसाद के दो, जनरल प्रोडयूस कंपनी के दो, सिंहभूम मिनरल्स, आर मैक्डील एंड कंपनी, श्रीराम मिनरल्स कंपनी के नाम शामिल हैं. वहीं नन वर्किंग खदान में सेल के 10 खदान, जिंदल साउथ वेस्ट, रूंगटा संस लिमिटेड, टाटा स्टील समेत अन्य कंपनियां शामिल हैं. एनकेपीके, शाह ब्रदर्स के खनन पट्टे रदद् करने की प्रक्रिया चल रही है.

क्या कहते हैं विभागीय सचिव

खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दिकी ने मामले पर कहा कि केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय की हरी झंडी मिलने के बाद सारंडा वन क्षेत्र के रद्द और नन वर्किंग माइंस की नीलामी शुरू होगी. उन्होंने कहा कि इससे पहले भी राज्य सरकार खनन पट्टे को रद्द करने की सभी औपचारिकताएं पूरी कर उसे राज्य गजट में प्रकाशित करने का काम पूरा करेगी.

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