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झारखंड हाइकोर्ट का फैसला, बिहार के लोगों को राज्य में नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ

Ranchi: बिहार के लोगों को झारखंड में आरक्षण देने को लेकर झारखंड हाइकोर्ट का बड़ा फैसला सोमवार को आया है. बिहार के निवासियों को झारखंड में किसी प्रकार का आरक्षण नहीं मिलेगा.

लार्जर बेंच के दो जजों ने इस संबंध में सोमवार को फैसला सुनाया. यह व्‍यवस्‍था बिहार के सभी मूल निवासियों पर लागू होगी, हालांकि हाइकोर्ट के इस लार्जर बेंच के एक जज का आदेश इन दोनों जजों से अलग था. बिहार के रहनेवाले रंजीत कुमार ने झारखंड पुलिस बहाली में आरक्षण का लाभ मांगा था.

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फैसले को रखा गया था सुरक्षित

इस मामले की सुनवाई पिछले वर्ष 18 अक्टूबर को हाईकोर्ट में हुई थी. सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था. झारखंड हाइकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एचसी मिश्र, अपरेश कुमार सिंह तथा बीबी मंगलमूर्ति की खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रखा था.

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झारखंड में एससी और ओबीसी के रूप में आरक्षण मिलने की याचिककर्ता ने दी थी दलील

याचिकाकर्ता ने ये दलील थी कि एकीकृत बिहार, वर्तमान बिहार और मौजूदा झारखंड में उनकी जाति अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के रूप में शामिल है. इसलिए वर्तमान झारखंड में उन्हें एससी और ओबीसी के रूप में आरक्षण मिलना चाहिए.

याचिककर्ता ने यह भी दलील थी कि पिछले कई सालों से वह झारखंड क्षेत्र में रह रहे हैं. नये राज्य झारखंड के निर्माण के बाद 15 नवंबर 2000 से वह लगातार झारखंड में हैं. उन्होंने कहा कि सिर्फ इसलिए उन्हें आरक्षण के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता है कि वह बिहार के स्थायी निवासी हैं.

सरकार की ओर से इस दलील का विरोध किया गया था और कहा गया था कि झारखंड के स्थायी निवासी को ही राज्य की आरक्षण नीति के तहत लाभ दिया जा सकता है. दूसरे राज्यों के लोगों को उस राज्य की आरक्षण नीति का लाभ सिर्फ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ही दिया जा सकता है.

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