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झारखंड : विभाग की करनी से स्कूलों को मिली दो साल की अनुदान राशि हो गयी लैप्स

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Ranchi : राज्य के युवाओं को बेहतर शिक्षा मिलें, इसके लिए राज्य के मुख्यमंत्री ने सूबे को एजुकेशन हब बनाने की बात की थी. लेकिन यहां शिक्षा की स्थिति ये है कि जो पैसे स्कूलों के लिए आवंटित की जाती है वो भी स्कूलों को नहीं मिल पा रहा.

वित्त रहित स्कूलों की स्थिति राज्य में काफी खराब हो चली है. इस वित्तिय वर्ष के लिए अनुदान संचालित स्कूलों के लिए राज्य सरकार की ओर से 92 करोड़ रूपये आवंटित की गई. जिन्हें वित्त रहित अनुदान से संचालित स्कूलों में छात्रों की संख्या के अनुसार वितरण करना था. लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से इन स्कूलों को 33 करोड़ रूपये ही आवंटित किए गए.

जबकि पिछले साल ही राज्य सरकार ने महंगाई को देखते हुए वित्तरहित स्कूलों को मिलने वाले अनुदान की राशि में वृद्धि की थी. जिसके बाद विभाग को 92 करोड़ मिलें. जबकि इसके पूर्व के सालों में राज्य सरकार की ओर से 85 करोड़ रूपये आवंटित किए गए थे.

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नियमावली को ताक में रखते हुए विभाग ने बनाए नियम

अनुदान नियमावली 2004 और संशोधित नियमावली 2015 के तहत अनुदान संचालित स्कूलों को कक्षा छह से दस तक के प्रत्येक छात्रों की संख्या के आधार पर अनुदान दी है. जबकि साल 2018 में स्कूली शिक्षा साक्षरता विभाग ने अपने से निर्देश जारी कर दिया कि अनुदान के लिए मात्र नौवीं और दसवीं कक्षा के छात्रों की संख्या के हिसाब से अनुदान दिया जाएगा.

जिससे पिछले साल भी इन स्कूलों को अनुदान नहीं मिल पाया था. राज्य में अनुदान की अर्हता पूरी करने वाले स्कूलों की संख्या लगभग दो सौ है. वहीं लगभग दो हजार शिक्षक अनुदान सही से नहीं मिल पाने के कारण प्रभावित हो रहे हैं. बता दें कि राज्य में वित्तरहित स्कूलों की अर्हता में स्कूल कैंपस में पर्याप्त कक्षाएं, मैदान, बैंच डेस्क और शिक्षक समेत अन्य अर्हताएं अनिवार्य है.

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पूर्व में दो बार लैप्स कर चुकी है राशि

हालांकि इस वित्तिय वर्ष के लिए विभाग की ओर से नवंबर माह से इन स्कूलों को आवेदन भराया जा रहा था. अनुदान की राशि इन स्कूलों को साल में एक बार दी जाती है. इसके पूर्व वित्तिय वर्ष 2017-18 और 2018-19 के लिए 85-85 करोड़ राशि आवंटित की गई थी. मार्च खत्म होते ही अनुदान की राशि लैप्स कर जाती है.

वहीं वर्तमान वित्तिय वर्ष की राशि दी गई. जो विभाग में ही लैप्स कर गई. राज्य के किसी भी स्कूल को इस राशि का लाभ नहीं मिला. जबकि अनुदान संचालित स्कूलों के शिक्षकों को वेतन अनुदान राशि से ही दी जाती है. कई स्कूलों को अर्हता नहीं होने के कारण बंद कर दिया गया है.

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क्या है नियमावली

2004 की अनुदान नियमावली और 2015 की संशोधित अनुदान नियमावली के अनुसार इंटर स्कूलों को दिये जानेवाले अनुदान 200 से 500 छात्रों पर एक लाख 40 हजार रुपये, 501 से 1000 पर एक लाख 80 हजार रुपये, 1001 से 2000 छात्रों पर दो लाख 40 हजार रुपये और 2001 से ऊपर होने पर चार लाख रुपये है.

इसी तरह उच्च विद्यालयों में 200 से 500 छात्रों पर 60 हजार रुपये, 501 से 1000 छात्रों पर 80 हजार रुपये और 1001 से ऊपर होने पर एक लाख 20 हजार रुपये का प्रावधान है. प्राथमिक विद्यालयों में 200 से 500 छात्रों पर 30 हजार रुपये, 501 से 1000 पर 40 हजार रुपये और 1001 से ऊपर छात्र संख्या होने पर 60 हजार रुपये देने का प्रावधान है.

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सचिव ने कहा जानकारी नहीं

इस संबध में जब स्कूली शिक्षा साक्षरता विभाग के प्रधान सचिव अमरेंद्र प्रताप सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस संबध में जानकारी नहीं है. नियम कानून के तहत ही अनुदान दी गई होगी.

वहीं वित्तरहित शिक्षक संघर्ष मोर्चा के सचिव मंडल सदस्य रघुनाथ सिंह ने कहा कि विगत कुछ सालों से अनुदान संचालित स्कूलों की स्थिति बदतर होती जा रही है. विभिन्न जिलों के साथ मिल कर इस संबध में हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है.

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