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आधा दर्जन मामलों में दांव पर है झारखंड सरकार की प्रतिष्ठा

Akshay Kumar Jha

Ranchi: हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के दो साल पूरा होने को हैं. कोरोना की वजह से कामकाज और विकास की रफ्तार धीमी पड़ी, जो फिर से पटरी पर आ रही है. गठबंधन की पार्टियों से ऑन रिकॉर्ड पूछा जाए तो जवाब मिलेगा कि सरकार स्मूदली चल रही है, लेकिन ऑफ द रिकॉर्ड ऐसा नहीं है. कुछ महीने पहले गठबंधन में दरार की बात मीडिया में आयी तो खुद हेमंत सोरेन ने कहा कि यह सब मीडिया की ही उपज है. इधर, बीजेपी पर हमेशा सरकार गिराने की साजिश रचने का आरोप लगता रहा है. खुद बीजेपी के सीनियर नेता कई बार सरकार गिराने की बात करते मीडिया में देखे जा चुके हैं. सरकार के दो साल के कार्यकाल में लिये गये कई निर्णयों और तय की गयी नीतियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं. कहा जा रहा है कि इन नीतियों की वजह से सरकार की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. कई मुद्दों पर राज्य सरकार और केंद्र के बीच टकराव की भी स्थिति बनी है.

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इन मामलों में हेमंत सरकार की प्रतिष्ठा दांव पर

निशिकांत बनाम हेमंतः गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे और हेमंत सोरेन के बीच का घमासान जगजाहिर है. मधुपुर चुनाव के दौरान यह और परवान चढ़ा. निशिकांत दुबे ने देवघर डीसी मंजूनाथ भजंत्री पर चुनाव के दौरान राज्य सरकार के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया. चुनाव के दौरान निशिकांत दुबे की शिकायत पर चुनाव आयोग ने डीसी को चार दिनों के लिए पद से हटा दिया. छह महीने बीत जाने के बाद निशिकांत पर सोशल मीडिया में आपत्तिजनक कमेंट करने के आरोप में डीसी ने पांच एफआईआर करायी. इसकी शिकायत एक बार फिर से चुनाव आयोग को बीजेपी की तरफ से की गयी.

चुनाव आयोग ने देवघऱ डीसी से जवाब मांगा. जवाब संतोषजनक नहीं होने की बात कहकर चुनाव आयोग ने देवघर डीसी को तत्काल हटाने का आदेश दिया और 15 दिनों के अंदर कार्रवाई करने का राज्य सरकार को निर्देश दिया है. इस मामले जनता के बीच जो मैसेज गया है वो साफ है कि दो सियासी दिग्गजों की जंग में एक ब्यूरोक्रेट की बलि चढ़ गयी. जाहिर तौर पर बीजेपी इसे अपनी जीत के तौर पर देख रही है. राज्य सरकार चाहे या न चाहे, उसे देवघर डीसी को हटाना पड़ेगा.

नियुक्ति नियमावलीः सरकार बनने से पहले ही जेएमएम की तरफ से बड़े पैमाने पर नौकरियां और रोजगार देने का वादा किया गया था. सरकार बनने के बाद हेमंत ने 2021 को नियुक्तियों का वर्ष घोषित किया. साल बीत गया, सरकारी विभागों में छिटपुट नियुक्तियों को छोड़ दें, तो बड़े पैमाने पर रिक्त पदों पर नियुक्ति अब तक नहीं हो पायी है. राज्य कर्मचारी चयन आयोग के जरिए होनेवाली नियुक्तियों के लिए सरकार की तरफ से जो नियुक्ति नियमावली बनायी गयी है, उसके अनुसार अब झारखंड से ही मैट्रिक और इंटर पास करने वालों को यहां नौकरी मिलेगी.

लेकिन यह शर्त भी उन्हीं के लिए है, जो आरक्षण की श्रेणी में नहीं आते हैं. इस नियमावली को तैयार करने के लिए जब फाइल विधि विभाग को भेजी गयी तो विभाग की तरफ से इसपर संवैधानिक प्रावधानों के प्रतिकूल बताया गया था. बावजूद इसके सभी विभागों की तरफ से इसी तर्ज पर नियमावली तैयार की जा रही है. अब मामला कोर्ट में है. पहली ही सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार की इस नियमावली पर कई सवाल खड़े किये हैं. अगर कोर्ट ने इसपर प्रतिकूल आदेश दिया तो यह सरकार के लिए बड़ा सेटबैक हो सकता है.

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थोक शराब नीतिः सरकार बनने के बाद झारखंड में शराब की थोक बिक्री की नीति में बदलाव किया गया. अब थोक शराब का काम निजी हाथों में चला गया. इस नीति को तैयार करने में भी कुछ कायदों की अनदेखी की गयी. पूरा शराब का थोक व्यापार किसी एक सिंडीकेट के हाथों में देने का आरोप लगा. कैसे थोक शराब का काम सिंडीकेट के हाथों में गया इसका खुलासा न्यूज विंग ने ही किया था. इसके बाद बीजेपी की तरफ से राज्यपाल को इसकी शिकायत की गयी. राज्यपाल ने थोक शराब की फाइल अपने यहां मंगायी है. लेकिन खबर लिखे जाने तक फाइल राजभवन पहुंची या नहीं, इस बात की पुष्टि नहीं हो पायी है. कुल मिलाकर अगर राज्यपाल की तरफ से नीति को लेकर आपत्ति जतायी गयी तो निश्चित तौर पर सरकार की प्रतिष्ठा का सवाल बनता है.

टीएसीः ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल का गठन कर लिया गया है. सरकार की तरफ से इस बार जो काउंसिल तैयार की गयी है, उसमें राज्यपाल की भूमिका को खत्म कर दिया गया है. बीजेपी ने इस मुद्दे को भी उठाया, लेकिन जेएमएम की तरफ से छत्तीसगढ़ का हवाला देते हुए इसे जायज ठहराया गया. अब इस मामले को गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने संसद में उठाया है. मामले पर जवाब देते हुए जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा है कि केंद्र के विधि मंत्रालय ने इस बात को माना है कि झारखंड सरकार की तरफ से टीएसी बनाने में नियमों की अनदेखी हुई है. बीजेपी ने इस मुद्दे को भी उठाया, लेकिन जेएमएम की तरफ से छत्तीसगढ़ का हवाला देते हुए इसे जायज ठहराया गया.

अब इस मामले को गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने संसद में उठाया है. मामले पर जवाब देते हुए जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा है कि केंद्र के विधि मंत्रालय ने इस बात को माना है कि झारखंड सरकार की तरफ से टीएसी बनाने में राज्यपाल के कई अधिकारों को दरकिनार किया गया है. उन्होंने आगे कहा कि झारखंड सरकार को उनकी तरफ से सूचित किया जा रहा है कि टीएससी सही ढंग से गठित हो. अगर केंद्र सरकार की दखल के बाद टीएसी में किसी तरह का बदलाव होता है निश्चित तौर सरकार की प्रतिष्ठा पर असर पड़ेगा.

प्रमोशनः राज्य में प्रमोशन पर रोक लगी हुई थी. सीएम हेमंत सोरेन की तरफ से अब रोक हटा ली गयी है. लेकिन डिप्टी कलक्टर से एसडीएम पद पर और एससी-एसटी कर्मियों का प्रमोशन अभी तक नहीं हो पाया है. प्रमोशन का मामला कोर्ट में है. कोर्ट ने हाल ही में अपने फैसले में कहा है कि अगर 15 दिनों के अंदर प्रमोशन नहीं किया जाता है तो मुख्य सचिव को खुद कोर्ट में हाजिरी लगानी होगी. वहीं एससीएसटी प्रमोशन को लेकर गठबंधन की कांग्रेस और जेएमएम में बीच खटास देखी जा रही है. आदिवासी नेता बंधु तिर्की ने चेतावनी दी है कि अगर प्रमोशन नहीं दिया गया तो आदिवासी विधायक इसके लिए सरकार के साथ संघर्ष करेंगे.

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डीवीसी बनाम जेबीवीएनएलः राज्य के सात जिलों में लगातार डीवीसी की तरफ से बिजली कटौती की जा रही है. डीवीसी लगातार जेबीवीएनएल पर अपने बकाया देने का दबाव बना रहा है. वहीं राज्य सरकार की तरफ से कोयले की रॉयल्टी वसूलने का दवाब केंद्र सरकार की इकाइयों पर बनाया जा रहा है. अब इस मामले में एनटीपीसी भी कूद गया है. एनटीपीसी की तरफ से भी राज्य सरकार पर बकाया देने का दबाव बनाया जा रहा है. इस बाबत कंपनी की तरफ से नोटिस भी जारी की गयी है.

 

Nayika

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