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दूसरे राज्यों से पौधा नहीं खरीदेगी झारखंड सरकार, पौधा खरीद में करोड़ों रूपये होंगे खर्च

RANCHI: झारखंड सरकार पौधों की खरीद के लिए करोड़ों रुपये खर्च करेगी. कोरोनाकाल में शुरू हुई बिरसा हरित ग्राम योजना के लिए पौधों की खरीद की जायेगी. झारखंड में 28 हजार एकड़ भूमि में इस वित्तीय वर्ष 2021-22 में पौधारोपण करना है इसके लिए बड़े पैमाने पर पौधों की जरूरत होगी. ऐसे में झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग ने पौधों की खरीद के लिए नर्सरियों के चयन की प्रक्रिया प्रारंभ की है. 21 नर्सरियों में से 18 नर्सरियों को तकनीकी रूप से सक्षम माना गया. इन नर्सरियों से ही पौधों की खरीद की योजना बनायी गयी है. विभाग पूरी जांच के बाद बड़े पैमाने पर इन नर्सरियों को कांट्रेक्ट देगा. ग्रामीण विकास विभाग ने नर्सरियों के चयन के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट मांगा है. जिसमें आम,अमरूद, नींबू के पौधे लिए जायेंगे. पौधा खरीद के बाद इसकी देखरेख की जिम्मेदारी जिले के उपायुक्त को सौंपी गयी है. आने वाले समय में इन फलदार वृक्षों को ग्रामीणों को पट्टा पर दिया जायेगा.

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इन्हें तकनीकी रूप से पाया गया सही

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पिछली बार 16 करोड़ के पौधे लगे थे

 

पिछले वित्तीय वर्ष में 16 करोड़ की लागत से पौधे की खरीद की गयी थी. करीब 28 हजार एकड़ भूमि में पौधे लगाये गये थे. पौधों की खरीद झारखंड की कुछ नर्सरियों के अलावा दूसरे राज्यों से की गयी थी. हालांकि, सरकार ने इस बार दूसरे राज्यों से पौधा नहीं खरीदने का फैसला लिया है.

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26 हजार एकड़ में लगाये जायेंगे पौधे

 

झारखंड बिरसा हरित ग्राम योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रारंभ की गयी थी. इस वित्तीय वर्ष में 26 हजार एकड में आम,अमरूद,नींबू के साथ मिश्रित फल बागवानी का लक्ष्य रखा गया है.  इस योजना के तहत प्रत्येक जिले में 1400-1500 एकड़ भूमि चिन्हित की गयी है. इस योजना को मनरेगा से जोड़ दिया गया है. एक आकलन के अनुसार इस योजना से तीन साल बाद 50 हजार रुपये वार्षिक आय अर्जित किया जा सकता है. इस योजना के तहत पांच लाख परिवारों को 100-100 पौधे दिए जायेंगे. इसके तहत राज्य भर में पांच करोड़ पौधे लगाये जायेंगे.

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रख-रखाव के अभाव में खराब हो रहे पौधे

 

रख-रखाव के अभाव में कई पौधे खराब हो रहे हैं. समय पर खाद नहीं दिया जा रहा है. सही तरीके से फेसिंग नहीं की जा रही. वहीं, पौधों के आसपास उग आये घास-फूस नहीं हटाने से पौधे मर रहे हैं. मिली जानकारी के अनुसार हजारों पौधे देख-रेख के अभाव में खराब हो चुके हैं. बड़े पैमाने पर लाखों की बर्बादी हुई. विभाग ने निरीक्षण में भी इसे पकड़ा था, इसक बाद सभी जिलों को पौधों की देखभाल करने का निर्देश दिया.

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