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सरना धर्मकोड को लेकर मंगलवार को विधानसभा में प्रस्ताव लायेगी झारखंड सरकार

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♦दूसरे दिन 2584.84 करोड़ का अनुपूरक बजट पास

Ranchi : झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन के दूसरी पाली में पहला अनुपूरक बजट पास हो गया. पहला अनुपूरक बजट 2584.84 करोड़ रुपये का लाया गया है. दूसरी पाली में अनुपूरक बजट पर चर्चा की गयी. वहीं सदन के तीसरे दिन मंगलवार को झारखंड सरकार सरना धर्मकोड को लेकर सदन में प्रस्ताव लेकर आयेगी. सदन के बाहर मीडिया से बात करते हुए वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने यह जानकारी दी है. सरना धर्मकोड लागू करने को लेकर आदिवासी समुदाय के लोग लगातार आंदोलनरत हैं. झामुमो ने अपने चुनावी घोषणापत्र में भी यह वादा किया था कि राज्य में सरना धर्मकोड लागू करेंगे. अब विधानसभा से प्रस्ताव पास करा कर राज्य सरकार केंद्र सरकार को भेजेगी.

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भूखल घांसी के परिवार के तीन लोगों की भूख से मौत का मामला उठा

अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान भूखल घांसी की भूख से मौत का मामला भी उठा. बिनोद सिंह और लंबोदर महतो ने चर्चा के दौरान कहा कि सरकार की संवेदनहीनता इसी से समझी जा सकती है कि आखिर इस पर संज्ञान लिया नहीं गया. अगर संज्ञान लिया गया होता तो भूखल घांसी के बेटे और बेटी की मौत सात महीने के दौरान भूख या भूख जनित बिमारियों से नहीं होती. साथ ही बिनोद सिंह ने कहा कि सरकार को रिक्तियों को भरने पर विचार करना चाहिए. राज्य में करीब सात लाख के करीब बेरोजगार हैं. साथ ही मजदूरों को लेकर राज्य सरकार की कोई नीति नहीं है. सरकार को इस पर विचार करना चाहिए.

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कैबिनेट से बिल पास हो जाता है और मंत्री कहते हैं गलती से हो गयाः भानू

भानू प्रताप शाही ने कटौती प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कहा कि झारखंड सरकार कैबिनेट से लैंड म्यूटेशन बिल पास कर देती है और सदन में मंत्रीजी कहते हैं गलती से हो गया अजीब विडंबना है. इसको लेकर सीपी सिंह ने कहा कि शायद कैबिनेट के सदस्यों को अंग्रेजी नहीं समझ आया होगा. साथ ही भानु प्रताप शाही ने कहा कि राज्य सरकार हर बार कहती है कि केंद्र सरकार पैसा नहीं दे रही है. तो सरकार को अपने चुनावी घोषणापत्र में यह लाना चाहिए था कि केंद्र सरकार पैसा देगी तब हम कुछ करेंगे.

15वें वित्त आयोग का पैसा भेजा, पर अबतक खर्च को लेकर जारी नहीं है गाइडलाइन

भानू प्रताप शाही ने कहा कि राज्य सरकार ने ग्रामीण विकास विभाग को 15वें वित्त आयोग के तहत पैसा दिया है. पर आश्चर्य वाली बात है कि 15वें वित्त आयोग के पैसों के खर्च के लिए अभी तक कोई गाइडलाइन नहीं बनायी गयी है. इसलिए पैसे विकास कार्यों में खर्च नहीं किये जा सकेंगे. ये पैसे मुखिया, पंचायत समिति सदस्यों वार्ड सदस्य, जिला परिषद को विकास कार्य के लिए जारी किये गये हैं. भानू प्रताप शाही ने कहा कि यह सरकार जानबूझ कर गाइडलाइन जारी नहीं कर रही है, सरकार पंचायत चुनाव के लिए अधिसूचना आने के बाद गाइडलाइन जारी करेगी. इसके अलावा उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास विभाग बांग्लादेश भेजनेवाला विभाग हो गया है.

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