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झारखंड में सरकार नहीं प्राइवेट प्लेयर्स बेचेंगे शराब, होगी पुरानी व्यवस्था बहाल

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Ranchi: उत्पाद विभाग की नीति को देखकर कहा जा सकता है कि लौट कर बुद्धु घर को आए. जी हां, ऐसा इसलिए कि सरकार ने महज 16 महीने में ही अपनी नीति को बदलने का फैसला ले लिया है. पुरानी व्यवस्था बहाल करने के लिए विभाग दिशा-निर्देश जारी कर रहा है. झारखंड के उत्पाद विभाग ने 28 नवंबर को उत्पाद सचिव राहुल सिन्हा एवं उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग की अध्यक्षता में आहुत बैठक में कई निर्देश जिला के उत्पाद विभाग को दिया है.

सभी निर्देशों को देखने के बाद अब यह साफ हो गया है कि राज्य में शराब के मामले में पुरानी व्यवस्था बहाल होने जा रही है. एकबार फिर से झारखंड में शराब दुकानों की बंदोबस्ती होगी. रघुवर सरकार ने 14 जुलाई 2017 को एक कानून पास किया था. कानून के मुताबिक सूबे में शराब बेचने का काम अब सरकार को करना था. पूरे धंधे से प्राइवेट लोगों को बाहर कर दिया गया था. ऐसा करने के पीछे सरकारी दलील थी कि शराब व्यवसाय पर हावी सिंडिकेट का खात्मा हो जाएगा. सरकार नकली शराब बेचने पर रोक लगाएगी और सरकारी खजाने में इजाफा होगा. लेकिन इन तीनों बातों में से एक भी बात पूरी नहीं हुई.

मांगी गयी है पुरानी व्यवस्था की रिपोर्ट

बैठक के दौरान यह निर्देश दिया गया कि आने वाले वित्त वर्ष 2019-20 के लिए बंदोबस्त होने वाली दुकानों का आंकलन किया जाए. आंकलन की सूची मुख्यालय को 29 नवंबर को गूगल शीट के माध्यम से उपलब्ध कराई जाए.

– आंकलन करते हुए निम्न कारकों का अवश्य संज्ञान लिया जाए.

1) जो भी प्रस्तावित दुकान हो वो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक हो.

2) दुकानों की संख्या 2016-17 की दुकानों से कम नहीं हो बल्कि और अधिक हो.

3) ऐसे क्षेत्र जहां 2016-17 तक शराब की दुकान नहीं थी और वहां महुआ और अवैध शराब की ब्रिकी हुआ करती थी. उन जगहों पर भी शराब दुकान खुले इस बात का पूरा ध्यान रहे.

4) हाट बाजार, मेला क्षेत्र,बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, प्रखंड मुख्यालय आदि जैसे जगह जहां अवैध शराब की बिक्री होती हो वहां भी दुकानों को खोलना सुनिश्चित करें. ताकि अवैध व्यापार पर लगाम लग सके.

चार दिसंबर को होगी उत्पाद विभाग की अहम बैठक

28 नवंबर की बैठक में जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो, रांची, हजारीबाग, रामगढ़, गिरिडीह, देवघर और पलामू के सहायक आयुक्त उत्पाद या अधीक्षक उत्पाद को निर्देश दिया गया है कि वो चार दिसंबर को 10:30 बजे बैठक के लिए मुख्यालय आएं. कहा गया है कि बैठक में राजस्व हित के मद्देनजर संभावित दुकानों एवं समूह से संबंधित विवरणी भी लायी जाए.

सभी जिला उत्पाद पदाधिकारी उक्त दुकानों के अनुसार समूह के साथ दुकानों की विवरणी भी तैयार कर लेंगे. शीघ्र ही इसकी विवरणी मुख्यालय द्वारा मांगी जाएगी. समूह निर्धारित करते हुए शत-प्रतिशत बंदोबस्ती, राजस्व हित एवं एक समूह में 1,2 या अधिकतम 3 दुकान ही रह सकते हैं, इसका अवश्य ध्यान रखेंगे.

1432 दुकानों की बजाय फिलहाल चल रही 504 दुकानें

शराब की बिक्री जैसे ही सरकार के हाथों में आयी. शराब दुकानों में भीड़ लगनी शुरू हो गयी. लेकिन सरकार को इस बीच भारी घाटे का सामना करना पड़ा. दरअसल जब प्राइवेट प्लेयर्स शराब बेचते थे तो उस वक्त शराब 1432 शराब की दुकान थी. लेकिन सरकार ने इसे घटा कर 504 कर दिया. इसी वजह शराब की दुकानों पर भीड़ ज्यादा देखी जाने लगी. लेकिन मुनाफे के मामले में सरकार मुंह के बल गिरी.

घाटे की नीति को समझने के लिए उत्पाद विभाग के सीनियर अधिकारियों को गोवा, छत्तीसगढ़, दिल्ली जैसे राज्यों का दौरा कराया गया. इन राज्यों का दौरा करने के बाद विभाग अब इस नतीजे पर पहुंची है कि फिर से एक बार शराब प्राइवेट प्लेयर्स ही बेचेंगे.

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