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झारखंड सरकार ने 15वें वित्त आयोग से की 150,002.73 करोड़ की डिमांड, 14वें वित्त आयोग से मिल पाई थी 86.6 फीसदी राशि

झारखंड के पर्यावरण के लिए उतना काम नहीं हो पाया जितना केंद्र सरकार या कंपनियों को करना था- आयोग

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Ranchi: झारखंड राज्य के पास अपनी कुछ यूनिक परेशानियां हैं. जिसे एक सकारात्मक उपचार के जरिए ही ठीक किया जा सकता है. 15वें वित्त आयोग को भी इन परेशानियों पर काम करने की जरूरत है. जिससे इन परेशानियों का समाधान निकल सके. ये अनोखी परेशानियां यहां के जंगल, पर्यावरण और आदिवासियों के साथ हैं. राज्य में 27 फीसदी जनसंख्या आदिवासियों की है. इन समस्याओं को लेकर यहां की सरकार भी गंभीर है. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी इन मामलों को लेकर विस्तृत प्रतिवेदन आयोग को दिया है.

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पिछले आयोग की तुलना में राज्य ने अपनी मांग में बढ़ोतरी की है. इन बातों को 15वें वित्त के चेयरमैन एनके सिंह मीडिया के सामने रख रहे थे. इन बातों को मीडिया के सामने रखने के पहले करीब तीन घंटे तक आयोग के सदस्यों ने सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक की. बैठक में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झारखंड की समस्याओं को आयोग के सामने रखा. उसके बाद करीब एक घंटे आयोग ने विपक्ष और दूसरी पार्टियों के साथ भी बैठक की.

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सरकार ने की 150,002.73 करोड़ की डिमांड

झारखंड सरकार ने 15वें वित्त आयोग से 150,002.73 करोड़ की डिमांड की है. सरकार ने 15 वें वित्त आयोग के पास जो डिमांड रखी है उसमें कृषि, वन और जल के लिए 42598.02 करोड़, सोशल सेक्टर के लिए 17001.39 करोड़, इंफ्रास्ट्रक्चर पर 88199.66 करोड़, वित्त और सामान्य प्रशासन के लिए 2203.66 करोड़ की डीमांड की है. कुल मिला कर सरकार ने 150,002.73 करोड़ की डिमांड 15वें वित्त आयोग से की है. बताते चलें कि 14 वें वित्त आयोग ने झारखंड को 4778.5 करोड़ आवंटित किया था. जिसमें 4279.8 ही झारखंड को मिल पाया. जो पूरे बजट का 89.6 फीसदी राशि है.

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मिनरल रिच स्टेट होने का दंश झेल रहा झारखंडः सरकार

सरकार का मेमोरेंडम आयोग के सामने सीएम की तरफ से पेश किया गया. सरकार ने उस मेमोरेंडम में कई सारी बातों का उल्लेख किया है. लेकिन इस मेमोरंडम में सबसे जरूरी चीज जो दर्शाया गया है, वो यहां के माइनिंग के बाद की परेशानियों की है. बकायदा कई तरह की तस्वीरों के साथ और देश-दुनिया की तुलना झारखंड से करने के बाद सरकार का आयोग को कहना है कि मिनरल रिच स्टेट होने का दंश झारखंड झेल रहा है. यहां के मिनीरल्स का फायदा दूसरे राज्यों को हो रहा है और परेशानियां झारखंड को हो रही है. सरकार ने आयोग के सामने यह सवाल भी उठाया कि आखिर ये माइंस झारखंड के लिए वरदान हैं अभिशाप ?

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सरकार ने माइनिंग को लेकर आयोग से कहा

– माइनिंग के जरिए जो रोजगार झारखंड में मिल रहे हैं वो सिर्फ 2.3 फीसदी है.
– जो भी फायदा माइनिंग से हो रहा है, वो केंद्र सरकार को हो रहा है. क्योंकि झारखंड में माइनिंग के हेडक्वाटर्स नहीं है.
– माइनिंग्स से जो फायदा हो रहा है दूसरे राज्यों को हो रहा है और परेशानियां झारखंड को झेलनी पड़ रही है.
– कृषि योग्य भूमि माइनिंग की वजह से लगातार खराब हो रही है.
– झारखंड का पानी, जमीन और हवा तीनों प्रदूषित हो रहे हैं.
– लोगों का स्वास्थय लगातार खराब हो रहा है.
– झारखंड की मांग करीब 20 फीसदी रॉयल्टी की रही है. लेकिन राज्य को सिर्फ 14-15 फीसदी फायदा हो रहा है.
– 2012 के बाद कोयले की रॉयलिटी पर विचार नहीं हुआ है.
– मिनीरल्स रॉयलिटी जितनी राज्य को मिलती है उससे कई गुणा ज्यादा नुकसान राज्य को हो रहा है.
– सरकार ने रॉयलिटी को 20 फीसदी तक करने का सुझाव दिया.
– 49.7 फीसदी आबादी बीपीएल है. जबकि दूसरे राज्यों में ये आंकड़ा औसतन 37 फीसदी है.

सरकार ने रेवन्यू और शिक्षा को लेकर आयोग से कहा

– सरकार ने आयोग से कहा है कि सरकार चाहती है कि वित्तीय घाटे को रोका जाए.
– वित्तीय घाटे को रोकने के लिए राज्य को विशेष अनुदान मिलना चाहिए. क्योंकि राज्य की खर्च करने की क्षमता बढ़ गयी है.
– वित्तीय क्षमता और खर्च करने की झमता को बराबर करने के लिए स्कीम बनाने की जरूरत है.
– दूसरे राज्यों से तुलना की जाए तो झारखंड शिक्षा पर प्रति व्यक्ति खर्च 23 फीसदी कम हो रहा है. जो करीब 641 रुपए है.
– दूसरे राज्यों से तुलना की जाए तो झारखंड स्वास्थ्य पर प्रति व्यक्ति खर्च 27 फीसदी कम हो रहा है. जो करीब 217 रुपए है.

स्वतंत्र नियामक बनाने की जरूरत

सरकार की तरफ से जो सुझाव 15 वें वित्त आयोग को दिया गया है. उसमें एक स्वतंत्र नियामक बनाने की बात की है. सरकार का कहना है कि यह नियामक फाइनेंस कमीशन से रिसोर्स के लेनदेन को मॉनिटर करेगी. फिलहाल ऐसा कोई बॉडी राज्य में नहीं है. ये भी कहा गया है कि आयोग अपनी तरफ से भी परमानेंट अधिकारी भी दे सकता है, जो वित्त आयोग से लेनदेन को मॉनिटर करे.

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