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बाल संरक्षण के लिए चार वर्षों में झारखंड को मिले 30 करोड़, खर्च हुए 29.58 करोड़

RanchI :  भारत सरकार ने बाल श्रमिकों, लावारिस, असुरक्षित, नशे के शिकार, आपराधिक गतिविधियों में लिप्त अथवा ट्रैफिकिंग के शिकार बच्चों के रेस्क्यू एवं पुनर्वास के लिए विगत 4 वर्षों में झारखंड को 29 करोड़ 60 लाख 59 हजार रुपये जारी किये हैं. बाल संरक्षण स्‍कीम के अंतर्गत जारी इस रकम में से झारखंड सरकार ने विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से विगत 4 वर्षों में 29 करोड़ 58 लाख 64 हजार रुपये की राशि खर्च की है. राज्यसभा में सांसद महेश पोद्दार के एक प्रश्न के उत्तर में गुरुवार को केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने यह जानकारी दी है. श्री पोद्दार को बताया गया कि केंद्र सरकार छत्रक समेकित बाल विकास सेवा के अंतर्गत राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों को सहायता अनुदान के रूप में वित्‍तीय सहायता प्रदान कर रही है.

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2017–18 के दौरान राज्य को केंद्र से 1714. 57 लाख रुपये मिले

झारखंड को इस मद में वित्‍तीय वर्ष 2014-15 में 36.03 लाख रुपये प्राप्त हुए, जबकि इस अवधि में 87.32 लाख रुपये का व्यय हुआ. 2015-16 में 369.88 लाख रूपये मिले जबकि खर्च 387.42 लाख रूपये हुए. 2016-17 में केंद्र की ओर से झारखंड को इस मद में 840.11 लाख रुपये मिले जबकि 842.14 लाख रुपये व्यय किये गये. 2017–18 के दौरान राज्य को केंद्र से 1714. 57 लाख रुपये मिले और खर्च 1641. 76 लाख रुपये का हुआ. स्‍कीम के क्रियान्‍वयन के लिए राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों को दिये गये सहायता अनुदान के संबंध में उपयोग प्रमाण पत्र देना होता है.

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श्री पोद्दार ने सरकार से असुरक्षित श्रेणी के बच्चों के रेस्क्यू और पुनर्वास के लिए भारत सरकार द्वारा खर्च की गयी धनराशि का ब्यौरा मांगा था. साथ ही उन्होंने यह जानना चाहा था कि ऐसे बच्चों की देखरेख और पुनर्वास का काम कर रही संस्थाओं की निगरानी की क्या व्यवस्था है.

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राज्‍य सरकारें राज्‍य और जिले के लिए निरीक्षण समितियां गठित करेंगी

मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने बताया कि ऐसे बच्‍चों की देखरेख करनेवाली संस्थाओं का किशोर न्‍याय (बच्‍चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 अर्थात जेजे एक्ट के अंतर्गत राज्‍य सरकार द्वारा पंजीकृत होना अनिवार्य होता है. सभी राज्‍य सरकारें राज्‍य और जिले के लिए निरीक्षण समितियां गठित करेंगी. इस प्रकार की निरीक्षण समितियां आबंटित क्षेत्र में बच्‍चों को रखने वाले सभी केंद्रों का तीन माह में कम से कम एक बार एक टीम बनाकर अनिवार्य रूप से दौरा करेंगी.  दल में कम से कम 3 सदस्‍य होंगे,जिनमें से कम से कम एक सदस्‍य महिला होगी तथा एक अन्‍य सदस्‍य चिकित्‍सा अधिकारी होगा और यह दल इस प्रकार के दौरों के निष्‍कर्षों के बारे में अपनी रिपोर्टें दौरे के एक सप्‍ताह के भीतर जिला बाल संरक्षण इकाई अथवा राज्‍य सरकार को आगामी कार्रवाई के लिए प्रस्‍तुत करेगा.

निरीक्षण समिति द्वारा अपनी रिपोर्ट प्रस्‍तुत कर दिये जाने के पश्‍चात जिला बाल संरक्षण इकाई अथवा राज्‍य सरकार द्वारा एक माह के भीतर उपयुक्‍त कार्रवाई की जायेगी और राज्‍य सरकार को अनुपालन रिपोर्ट प्रस्‍तुत की जायेगी.  अधिनियम के निष्‍पादन का मूल दायित्‍व राज्‍य/संघ राज्‍य क्षेत्र का है।

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