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झारखंड: पंचायत चुनाव में फल-फूल रहा माननीयों का ‘घर-परिवार’!

Amit Jha

Ranchi: राज्य में तीसरी दफा गांव की सरकार बनाने की कवायद जारी है. 60 हजार से अधिक पदों पर जनप्रतिनिधि चुने जा रहे हैं. एक चरण का चुनाव 14 मई को हो चुका है. इस चुनाव के बहाने माननीय भी अपनी अपनी जड़ों को मजबूत करने में जुटे हैं. संताल से लेकर कोल्हान तक ऐसे कई उदाहरणों को देखा जा सकता है. घर परिवार के सदस्य चुनावी मैदान में उतरे हैं. पहले चरण के बाद हुई मतगणना में कई ऐसे निर्वाचित प्रतिनिधि सामने आये हैं जिनके घरों से लोग विधानसभा में भी क्षेत्र की आवाज बुलंद कर रहे हैं.

सिमडेगा विधायक भूषण बाड़ा की पत्नी जोसिमा खाखा ने पाकरटांड़ ब्लॉक (सिमडेगा) से जिला परिषद चुनाव में जीत हासिल की है. विधायक नलिन सोरेन की पत्नी जायस लुप्सी बेसरा ने लगातार दूसरी बार काठीकुंड से जिला परिषद सदस्य के तौर पर जीती हैं. ऐसे ही और भी उदाहरण हैं जिनसे दिखता है कि विधानसभा सदस्य के तौर पर जवाबदेही उठाने वाले प्रतिनिधि पंचायत चुनाव के बहाने अपने जड़ों की गहराई परखने के साथ साथ अपनी अगली पीढ़ी को राजनीति का बैटन थमाने में लगे हैं. सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की चचेरी बहन रेखा सोरेन भी गोला पूर्वी क्षेत्र से जिला परिषद के लिए चुनी गई है.

 

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अरविंद तिग्गा मुखिया कोलचकड़ा पंचायत प्रखंड चक्रधरपुर, विधायक सुखराम उरांव के भतीजे
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गांव से लेकर जिले तक बना रहे साख

जिला परिषद चुनाव से लेकर पंचायत समिति और मुखिया के पदों पर भी कई ऐसे नाम खड़े हुए हैं जिनका प्रोफाइल बहुत जबर्दस्त है. हालांकि ग्राम पंचायत सदस्य के तौर उनकी रुचि नहीं दिखी है. बरही विधायक उमा शंकर अकेला के बेटे रवि शंकर यादव उर्फ रवि अकेला ने जिला परिषद चुनाव के लिये चौपारण भाग-2 से जीत हासिल की है. चक्रधरपुर विधायक सुखराम उरांव के भतीजे अरविंद तिग्गा चक्रधरपुर ब्लॉक के कोलचकेड़ा पंचायत से मुखिया चुने गये हैं. बंदगांव ब्लॉक से जसमिन हमशय ने जिला परिषद सदस्य के तौर पर सफलता पायी है. उनके स्व पति लाल सिंह मुंडा झारखंड आंदोलनकारी रहे थे. साथ ही जिला 20 सूत्री सदस्य भी थे.

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गिरिडीह में पूर्व विधायक रहे राजकुमार यादव की भाभी अनीता देवी गावां ब्लॉक के बिस्नी टिकर पंचायत से मुखिया पद के लिये ताल ठोक रही हैं. नामकुम प्रखंड (रांची) से जिला परिषद का चुनाव लड़ रही आरती कुजूर भी एक दिलचस्प उदाहरण हैं. उनके पिता स्व उमरांव साधो कुजूर दो टर्म विधायक (1977, 1981) रहे थे. ऐसे में राजनीतिक की समृद्ध विरासत को आरती ने करीब से देखा है. 2010, 2015 के बाद एक बार फिर वे चुनाव में जीत हासिल करने को उतरी हैं. सत्ता का विकेंद्रीकरण हो, ग्राम सभा की बात सर्वोपरि हो, इसे देखते हुए वे अपनी ओर से पूरे दमखम के साथ चुनावी मैदान में हैं.

कांग्रेस का गढ़ हुआ मजबूत

विधायक भूषण बाड़ा ने अपनी पत्नी की जीत पर कहा कि यह जीत जनता एवं कार्यकताओं की जीत है. इस जीत के बहाने से दिखा कि स्थानीय लोगों में कांग्रेस पार्टी के प्रति जोरदार भरोसा है. आगे भी जनता, पार्टी कार्यकर्ताओं के सहयोग से कांग्रेस पार्टी हर चुनाव जीतेगी. जोसिमा के मुताबिक यह जीत भूषण बाड़ा पर विश्वास, कांग्रेस की नीति-नीयत और निर्णयों पर जनता के अपार विश्वास का नतीजा है. जनता ने जिस विश्वास और भरोसे के साथ उन्हें जिताया है, उस पर खरा उतरने का प्रयास किया जाएगा. भूषण और कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर विकास की नई गाथा लिखने का प्रयास किया जाएगा.

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