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मातृ मृत्यु दर कम करने में झारखंड की लंबी छलांग, राज्य को मिला प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अवार्ड

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Ranchi:  झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार हो रहा है. तमाम कमियों के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है. इससे राष्ट्रीय स्तर पर भी झारखंड की छवि बदलने लगी है. राज्य सरकार की ओर से सुरक्षित मातृत्व के क्षेत्र में शुरु किए गए काम की सराहना केंद्र सरकार ने भी की है. शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने झारखंड को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अवार्ड दिया. स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव निधि खरे ने नई दिल्ली में यह पुरस्कार प्राप्त किया.

क्या है प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अवार्ड ?
यह पुरस्कार मैटरनल डेथ यानि मातृ मृत्यू दर कम करने के लिए किए गये प्रयासों के लिए दिया जाता है. झारखंड ने मातृ मृत्यु दर कम करने के मामले में शानादार काम किया है. होटल हयात में आयोजित कार्यक्रम में मातृत्व सुरक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले राज्यों को पुरस्कृत किया गया. पिछले साल सबसे अंतिम पायदान पर रहने वाला झारखंड, मृत्यु दर कम करने के मामले में 9 वें स्थान पर आ गया है.

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अब भी राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है मातृ मृत्यू दर
प्रधान सचिव निधि खरे ने बताया कि विभागीय कर्मियों ,सहिया ,एएनएम की मेहनत की वजह से यह दर घट कर 208 से 165 हो गया है. राष्ट्रीय औसत 130 है. इसे राष्ट्रीय औसत से कम करने के लिए लगातार काम जारी है. विभागीय सचिव निधि खरे ने मातृ शिशु मृत्यु दर नियंत्रित करने के लिए खासतौर पर टास्क सौंपा है. सुरक्षित मातृत्व के लिए नर्सों तैनाती ज्यादा की गई है. एल वन डिलीवरी प्वाइंट की संख्या में बढोतरी की गई है. साल 2006-7 में जहां इसकी संख्या 656 थी, वर्तमान में यह संख्या 1553 हो गई है. समाज कल्याण विभाग की योजनाओं के साथ समन्वय स्थापित किया गया है. सहिया के माध्यम से सुरक्षित मातृत्व के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. आधारभूत संरचना को मजबूत किया जा रहा है.

प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर भी दे रहे योगदान
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील की थी कि निजी प्रैक्टिस करने वाले डाक्टर भी हर महीने की नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं की मुफ्त स्वास्थ्य जांच करें. झारखंड में इसका व्यापक असर हुआ है. पीएमसएमवाई के तहत निजी प्रैक्टिस करने वालों ने सकारात्मक भागीदारी गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण में निभाई है. इसके तहत 30 हजार हाई रिस्क प्रिगनेंसी वाले केस की पहचान की गई है. झारखंड ने समय पर मेडिकल केयर की व्यवस्था करके सुरक्षित मातृत्व में रिकॉर्ड सुधार किया है.

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मातृ मृत्यू दर राष्ट्रीय औसत से कम करना लक्ष्य
प्रधानमंत्री सुरक्षित अभियान की टीम अवार्ड पाकर उत्साहित है. प्रधान सचिव निधि खरे ने बताया कि लगातार सुधार का काम जारी है. सहिया से लेकर अधिकारी तक मातृ शिशु मृत्यु दर कम करने के अभियान में लगे हैं. इसका परिणाम सामने आने लगा है. कुछ महीने में मातृ मृत्यु दर कम करने वाला झारखंड अग्रणी राज्य होगा. हमारी कोशिश यह दर राष्ट्रीय औसत से कम करने की है. उन्होने कहा कि पुरस्कार मिलना राज्य के लिए गौरव का क्षण है, लेकिन इससे हमारी जिम्मेदारी बढ़ गई है.

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