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झारखंड को 14वें वित्त आयोग की दूसरी किस्त 600 करोड़ रुपये मिलने में होगी देर, पंचायतों का विकास होगा बाधित

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  • पहली किस्त जारी करने में स्टेट ने की देर, इसका असर पंचायत के विकास योजना पर होगा
  • अधिकारी बना रहे हैं दबाव, पंचायतें जल मीनार पर खर्च करेंगी राशि
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Ranchi : झारखंड में पंचायती राज व्यवस्था लालफीताशाही का शिकार है. इसका दुष्प्रभाव पंचायत में चलनेवाले विकास कार्य पर पड़ रहा है. भले ही सीएम रघुवर दास ने योजना बनाओ अभियान के दौरान गांव में योजना बनाये जाने पर जोर दिया था, लेकिन योजनाओं के क्रियान्वयन की हकीकत राज्य में कुछ और दिख रही है. सरकार की लालफीताशाही की वजह से पंचायत को समय पर 14वें वित्त अयोग से मिलनेवाली राशि नहीं मिल पायी. वहीं, दूसरी किस्त का भी टोटा दिख रहा है. 14वें वित्त अयोग से मिली पहली किस्त को जारी करने में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा देर की गयी, जिस कारण 2018-19 की दूसरी किस्त मिलने में देर होगी. वहीं, दूसरे राज्यों को दूसरी किस्त मिल गयी है, जिसमें बिहार भी शामिल है.

क्या काम किये जाने हैं पंचायतों में 14वें वित्त अयोग से मिली राशि से

पंचायतों को जल आपूर्ति, सीवरेज व ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता, जल निकासी, सामुदायिक परिसंपत्तियों का रख-रखाव, सड़कों, फुटपाथों, स्ट्रीट लाइट, कब्रिस्तान व श्मशान घाटों के रखरखाव पर यह राशि खर्च करनी है. पंचायतों को समय पर राशि नहीं मिलने से ग्राम पंचायतों द्वारा किये जानेवाले विकास कार्य प्रभावित तो होंगे ही, साथ ही अधिकारियों द्वारा राशि खर्च करने का दबाव भी पंचायतों पर पड़ेगा. इससे कई तरह की अनियमितता होने की संभवना बनी रहती है, जिसे रोका नहीं जा सकता.

कब मिली पंचायतों को राशि की पहली किस्त

केंद्र से मिलनेवाली 14वें वित्त आयोग की राशि कई जिलों में नवंबर में पंचायत में पहुंची है, जबकि इस राशि की पहली किस्त जून-जुलाई में मिल जानी चाहिए थी. वहीं, वित्तीय वर्ष 2018-19 की दूसरी किस्त दिसंबर- जनवरी में पंचायत को मिलने का समय निर्धारित है. लेकिन, विभाग के अधिकारियों की वजह से मार्च से पहले राशि मिलना मुश्किल दिख रहा है. पूर्व में आवंटित राशि के उपयोगिता प्रमाणपत्र के बिना केंद्र दूसरी किस्त की राशि आवंटित नहीं करेगी.

क्या कहते हैं पंचायत के मुखिया

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इधर, मुखियाओं का कहना है कि पंचायतों में राशि आने के बाद जलमीनर बनाने का दबाव अधिकारियों द्वारा दिया जा रहा है. इस कारण गांव के विकास के लिए अन्य आवश्यक कार्य 14वें वित्त अयोग के निर्देश के आलोक में राज्य में नहीं हो पा रहे हैं. राज्य सरकार के रवैये से प्रतीत होता कि पंचायतें सरकार की प्रथामिकता सूची में नहीं हैं. भले ही राज्य के सीएम गांव के विकास की बात करते हैं. जब केंद्र से मिलनेवाले संसाधन राज्य में समय पर पंचायत को आवंटित नहीं होते हैं, तो इससे पंचायत के विकास की बात को समझा जा सकता है. वहीं, पहली किस्क का उपयोगिता प्रमाणपत्र समय पर नहीं भेजने पर दूसरी किस्त की राशि सही समय पर केंद्र जारी नहीं करेगा. 14वें वित्त आयोग की राशि की पहली किस्त के तौर पर झारखंड सरकार द्वारा 14 अगस्त 2018 को पत्र जारी किया गया था, लेकिन पत्र जारी होने के बाद सात जिलों में ही वित्त वर्ष 2018-19 की राशि पंचायत को मिली थी. बाकी बचे 17 जिलों को पहली किस्त की राशि नवंबर में पंचायतों को मिली है.

दूसरी किस्त मिलने में थोड़ा विलंब होगा : पंचायती राज निदेशक

पंचायती राज निदेशक विनय राय ने बताया कि पंचायतों को वित्तीय वर्ष 2018-19 की दूसरी किस्त पंचायतों को मिलने में थोड़ा विलंब होगा. देर से 14वें वित्त आयोग की राशि पंचायत को मिलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि समय से राशि अगर नहीं मिली है, तो फिर भी पंचायत इसका उपयोग कर सकती है, क्योंकि इस राशि को मार्च एंड तक ही उपयोग करने की बाध्यता नहीं है. पंचायतों को वित्तीय वर्ष 2018-19 की दूसरी किस्त भी जल्द पंचायतों को मिलेगी.

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