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बॉलीवुड और भोजपुरी फिल्मों को आसानी से मिलती है सरकारी सब्सिडी, उपेक्षित हैं झारखंड के स्थानीय सिनेमा और कलाकार

अब झारखंडी कलाकार ठगा सा महसूस कर रहे हैं

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Ranchi: झारखंड में कला और फिल्मस के क्षेत्र में स्थाीनीय लोक संस्कृीति और कलाकारों को बढ़ावा देने के लिए रघुवर सरकार ने झारखंड फिल्मम नीति तो बना दिया, लेकिन अब झारखंडी कलाकार ठगा सा महसूस कर रहे हैं. झारखंड में फिल्मो नीति के तहत अब तक कई हिंदी, भोजपुरी और नागपुरी फिल्मोंस का निर्माण हुआ और उन्हें फिल्मी नीति के तहत सब्सिडी भी मिली. बावजूद इसके यहां झारखंड के सालों से म्यूमजिक, निर्देशन और एक्टिंग के क्षेत्र में सालों से काम करने वाले आर्टिस्ट उपेक्षित महूस कर रहे हैं.

स्थानीय कलाकारों को यूज करते हैं बॉलीवुड के फिल्मकार
नागपुरी और खोरठा भाषा में बनने वाली म्यूॉजिक वीडियो अलबम में 18 सालों से काम करने वाली झारखंड की पॉपुलर एक्ट्रे स वर्षा ने बताया कि अभी झारखंड में फिल्मोंे के लिए बाहर की बडी टीमें काम कर रही हैं. उनकी टीम में पहले से तय रहता है कि कौन क्याम रोल करेगा और यहां के लोगों को वो कैरेक्टंर रोल या साइड रोल में ही यूज करते हैं. एक मूवी एक मूवी आई थी ‘काशी अमरनाथ’ उसमें मैंने सिर्फ बंजारन सांग ही किया था. वैसे मुझे छोटे मोटे रोल का ऑफर मिलता है जिसे मैं मना कर देती हूं.


धोखे का शिकार हो रहे स्थानीय कलाकार
झारखंड में बनने वाले नागपुरी, भोजपुरी और हिन्दीम फिल्मोंल में म्यूहजिक देने वाले सिद्धार्थ रॉय का कहना है कि झारखंड की फिल्मर नीति से हमें बहुत ही उम्मी‍द थी कि हम जैसे पुराने अनुभवी कलाकारों के साथ नये कलाकारों को भी फायदा मिलेगा. लेकिन अब बहुत दुखी हैं. अब तो यहां बहुत सारे कलाकारों के साथ ऐसी घटनायें घट रहीं हैं कि किसी का चेक बाउंस हो गया, किसी को मेहनाताना नहीं मिला. फिल्म नीति के लिए जो कमिटी बनी है वह कैसे बनी यह किसी स्थाहनीय कलाकारों को नहीं बताया जा रहा है. फिल्मि नीति को लेकर बहुत लोग नाखुश हैं. यहां बहुत ऐसे कलाकार हैं जो अपनी जमीन बेचकर फिल्में बनाईं, आज वो सब्सिडी के लिए जाते हैं तो उन्हेंत वह लाभ देने के लिए दौडाया जाता है, दस्तानवेज मांगे जाते हैं. आज हम अपने ही राज्यं में झारखंड की संस्कृनति बचाने के लिए फिल्‍में बनाते हैं लेकिन सब्सिडी नहीं ले पा रहे हैं. बाहर की बॉलीवुड और भोजपुरी फिल्मोंि को कोई भी परेशानी नहीं होती है और आसानी से सरकारी सब्सिडी मिल जाती है.

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‘मोर गांव मोर देश’ को मिली सब्सिडी
अभी आने वाले 13 जुलाई को झारखंड के कुछ एक सिनेमाघरों में नागपुरी फिल्मम ‘मोर गांव मोर देश’ प्रदर्शित होगी. फिल्म को झारखंड फिल्मफ नीति के तहत सब्सिडी के लिए भी मंजूरी मिली है. इस फिल्म’ के प्राड्यूसर और डायरेक्ट र अश्विनी कुमार ने बताया कि ‘बहुत जरूरी है कि यहां के कलाकार शिक्षित हों. यह बात सही है कि यहां के कलाकार झारखंड में फिल्म बनाने वाले बाहरी टीमों के द्वारा ठगी के शिकार हो रहे हैं. इस तरह के काम में दलाल किस्म‍ के लोगों की भूमिका रहती है. बाहर के लोगों को यहां के बारे में कुछ पता नहीं होता है. उन्हेंक यहां कुछ जरूरत होती है तो वो यहां के किसी को पकड लेते हैं. बीच का आदमी सभी तरह की बारें को रखता नहीं है. ऐसे में यहां के लोगों को चाहिये कि बिना एग्रीमेंट के काम नहीं करना चाहिए और पहले से यह तय करना चाहिए कि क्या मेहताना मिलना चाहिये. और अगर कोई ठगी होता है तो सही जगह पर आवाज उठाना चाहिये.

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