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झारखंड के खेत भी हो जायेंगे स्मार्ट, डिजिटल मिट्टी बढ़ायेगी 20 प्रतिशत पैदावार

झारखंड की मिट्टी इंटरनेट से होगी कनेक्ट

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Ranchi : स्मार्ट फोन के बारे में तो खूब जाना, इस्तेमाल किया, पर क्या कभी स्मार्ट खेत के बारे में सुना है? जी हां, कृषि उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए अब इंटरनेट को सीधा मिट्टी से जोड़ा जा रहा है. इंटरनेट के सीधे मिट्टी से जुड़ जाने से किसानों को बहुत लाभ होगा. झारखंड एग्रीकल्चर एंड फूड समिट के दूसरे और अंतिम दिन शुक्रवार को किसानों के साथ संवाद के दौरान एंटरप्रेन्योर विनोद कुमार, जो दि इंटरनेट थिंग के को-फाउंडर हैं, ने बताया कि फिलहाल दो उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए इंटरनेट ऑफ थिंग्स का इस्तेमाल किया जा रहा है. पहला मछली उत्पादन और दूसरा खेतों में उगायी जानेवाली फसल पर भी सीधा इस्तेमाल हो सकेगा. जो आनेवाले दिनों में फसल की पैदावार को 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ा देगा.

कैसे होता है प्रयोग, क्या है फायदा

मिट्टी को सीधा इंटरनेट से जोड़ने क लिए एक डिवाइस का प्रयोग किया जा रहा है. मछली उत्पादन होनेवाले स्थान पर इस डिवाइस को पानी में डाल दिया जाता है, जिसमें सेंसर लगा होता है. वहीं, खेतों की मिट्टी में भी इसे लगाया दिया जाता है. यह डिवाइस आपको खेतों की मिट्टी की स्थिति क्या है, यह बतायेगा. यह पीएच लेवल भी बतायेगा. पानी कब दिया जाना है, कितना दिया जाना है, सबकुछ बताता है यह डिवाइस. यह डिवाइस 24×7 डिसॉल्व ऑक्सीजन को मॉनिटर करता है. अगर ज्यादा से कम रहता है, तो आपको आपके फोन पर सूचित करता है, जिसके बाद उसमें एडिटर्स ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने या घटाने की जरूरत होने पर आप अपने फोन से सीधा ऑपरेट कर सकते हैं. इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से यह पता लग जाता है कि पानी कब खराब होगा.

झारखंड को पड़ेगी मल्टिपल सेंसर की जरूरत

ड्रोन की मदद से किसानों की फसल पर छिड़काव भी किया जाता है. ड्रोन में कैमरा होने के कारण यह भी पता चल जाता है कि किस फसल में कितना कीड़ा लगा है और कितना छिड़काव किया जाना है. इंटरनेट ऑफ थिंग्स के विनोद ने बताया कि झारखंड में मल्टिपल सेंसर की जरूरत पड़ेगी. यह कंपनी झारखंड सरकार के साथ करार कर चुकी है और झारखंड के किसानों को इंटरनेट से जोड़ेगी. यह तकनीक स्वीडन और इजरायल में प्रयोग की जा रही है.

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