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1000 करोड़ रुपये पूंजी वाली कंपनी होगी झारखंड अन्वेषण एवं खनन निगम लिमिटेड

खान विभाग ने जारी किया संकल्प, खनिज के अन्वेषण, उत्पादन व नीलामी में भी लेगी भाग

Special Correspondent

Ranchi: राज्य सरकार ने झारखंड अन्वेषण एवं खनन निगम लिमिटेड का गठन कर दिया है. इस संबंध में खान एवं भूतत्व विभाग ने संकल्प जारी कर दिया है. इस कंपनी को राज्य सरकार के शत-प्रतिशत अनुदान के साथ अनुषंगी कंपनी के रूप में गठित किया गया है.

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जेइएमसीएल की प्राधिकृत पूंजी कम से कम 1000 करोड़ रुपये की होगी, जो आवश्यकतानुसार निगम को उपलब्ध करायी जायेगी. प्रारंभिक जमा पूंजी निगम के द्वारा निर्धारित की जायेगी. यह कंपनी खनिज के अन्वेषण के साथ-साथ खनिज उत्पादन, नीलामी आदि कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी.

जारी संकल्प के अनुसार कंपनी अन्वेषण के आधार पर नियमानुसार भूतात्विक प्रतिवेदन तैयार करना एवं उसका प्रकाशन भी करेगी. राज्य के अंतर्गत एवं अन्य राज्यों के  खनिज ब्लॉकों के नीलामी में भाग लेना, खनिज ब्लॉकों के नीलामी के लिए निविदा एवं वित्तीय निविदा को तैयार करने संबंधी काम भी यह कंपनी करेगी. इसके अलावा खनन योजना की पर्यावरणीय स्वीकृति के प्रस्ताव आदि क्षेत्र में परामर्श भी देगी.

खनन का कार्य व खनिज का उत्पादन के साथ-साथ खनिजों का विपणन एवं बिक्री का काम भी यह कंपनी करेगी. निगम के निदेशक मंडल में अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक एवं निदेशक होंगे. स्वतंत्र निदेशक भी होंगे जिन्हें राज्य सरकार मनोनीत करेगी.

राज्य सरकार के द्वारा निगम को सौंपे गए खनिज ब्लॉक के अन्वेषण कार्य के व्यय का वहन प्रतिपूर्ति राज्य सरकारके अनुदान से होगा.

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ये काम होंगे प्रमुख

  • राज्य के अंतर्गत खनिज उपलब्धता वाले क्षेत्रों पर अभी भी  भूतात्विक अन्वेषण नहीं हुआ ,जिनका मानक स्तर पर अन्वेषण कार्य.
  • सभी परिसमाप्त, परित्यकर, कालतिरोहित अथवा अनिर्णित खनन पट्टों पर अन्वेषण कार्य.
  • राज्य के अनेक खनिजों जिसमें कोयला, लौह अयस्क,  मैगनीज, ग्रेफाइट,लाइम स्टोन, डोलोमाइट आदि के कोर ड्रिलिंग के औसत गहराई को ध्यान में रखते हुए प्रति वर्ष 1.5 लाख मीटर कोर ड्रिलिंग का लक्ष्य के साथ 50 लाख मीटर कोर ड्रिलिंग का काम.
  • उक्त 50 लाख कोर ड्रिलिंग के अलावा अन्य अन्वेषण गतिविधियां जिसमें रिमोट सेंसिंग स्टडी, जियोलॉजिकल मैपिंग, जियोफिजिकल अन्वेषण, कोर लॉगिंग, डाटा सैँपजिंग,विशेषण,रिर्जव व अनरिर्जव माइंस का आकलन इत्यादि.

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