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Jharkhand : स्टांप ड्यूटी वृद्धि से सालाना 600 करोड़ तक की कमाई होने का अनुमान

पिछले तीन साल में जमीन-फ्लैट की बिक्री से कमाई बढ़ी

Ranchi: झारखंड में पिछले तीन साल से मुद्रांक शुल्क से कमाई बढ़ रही है. राजस्व भूमि सुधार एवं निबंधन विभाग के आंकड़े देखने से स्पष्ट होता है कि विगत 2018-19 में विलेखों, जमीन-फ्लैट के सेल डीड,दान पत्र,पट्टा आदि पर प्रभावी शुल्क से जहां 257 करोड़ तक की कमाई हुई थी. इसमें हर साल लगभग 70-80 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है. 2019-20 में विभाग को विभिन्न शुल्कों से 320 करोड़ व 2020-21 में चार सौ करोड़ की कमाई हुई. ऐसे में यह भी स्पष्ट हो रहा है कि राज्य में हर साल जमीन-फ्लैट की खरीद बिक्री बढ़ रही है.

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अब झारखंड सरकार ने नये सिरे से स्टांप ड्यूटी में वृद्धि की है. इसमें जमीन-फ्लैट के निबंधन में लगने वाले स्टांप ड्यूटी को 2 प्रतिशत से बढ़ाकर छह प्रतिशत किया है,वहीं बिल्डर्स एग्रीमेंट,हलफनामा सहित कई तरह के शुल्क में बढ़ोतरी की गई है. विभाग का मानना है कि इस वृद्धि से सालाना 200 करोड़ रुपये अतिरिक्त आय होने की उम्मीद है. यानि यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इस वित्तीय वर्ष 2021-22 व अगामी वित्तीय वर्ष तक सेल डीड, दान पत्र,विभिन्न प्रकार के पट्टा आदि में लगने वाले स्टांप ड्यूटी से सालाना लगभाग 600 करोड़ तक की आय बढ़ जायेगी. विभाग अब झारखंड वित्त विधेयक 2021 को विधानसभा में पारित करायेगा. विभाग के इस शुल्क बढ़ोतरी से जमीन-फ्लैट की रजिस्ट्री महंगी होगी, अन्य शुल्कों का बोझ भी जनता पर पड़ेगा.

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शेयर-डिबेंचर के मुद्रांक शुल्क में नहीं होगी बढ़ोतरी

दरअसल, झारखंड ने झारखंड वित्त विधेयक 2018 तैयार किया था. इस पर भारत सरकार से भी राय ली गयी थी. वहां से कुछ आपत्तियां आयी थी,जिसके बाद नये सिरे से संशोधित विधेयक 2021 तैयार किया है. अधिकारियों ने बताया कि नये विधेयक में शेयर-डिबेंचर जिनपर मुद्रांक शुल्क में संशोधन पर भारत सरकार ने आपत्ति की थी उसे प्रस्तावित विधेयक से हटा दिया गया है. विभाग ने इसके अलावा बिहार मनोरंजन ड्यूटी कोर्ट फीस तथा मुद्रांक अधिमान संशोधन अधिनियम के तहत लगने वाले 110 प्रतिशत अधिभर को भी हटा दिया है.

पड़ोसी राज्यों ने पहले ही वृद्धि की

भारतीय मुद्रांक अधिनियत, 1899 की अनुसूचित 1 ए के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के विलखों के लिए मुद्रांक शुल्क निर्धारित है. झारखंड गठन के बाद इनमें किसी प्रकार की कोई बढ़ोतरी नहीं की गयी थी,जबकि पड़ोसी राज्य बिहार,छत्तीसगढ़ आदि राज्य इसमें पहले ही बढ़ोतरी कर चुके हैं.

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