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झारखंड बिजली वितरण निगम : ओवर ड्राफ्ट हुआ 103 करोड़, 290 करोड़ कर्ज का ब्याज हुआ 370 करोड़, राहुल पुरवार हैं एमडी

कंपनी पर 843 करोड़ रुपये का सरकारी लोन भी है.

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Ranchi : झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम कंपनी पर 103 करोड़ रुपये का ओवर ड्राफ्ट हो गया है. इतना ही नहीं इस कंपनी ने सरकार से 290 करोड़ रुपया लोन लिया. जिसका ब्याज ही अब 370 करोड़ रुपया हो गया है. वहीं कंपनी पर 843 करोड़ रुपये का सरकारी लोन भी है. साथ ही बिजली कंपनियों का करीब 8011 करोड़ का बकाया हो गया है. यह हालात तब है, जब इसके मंत्री खुद मुख्यमंत्री रघुवर दास हैं और इसके एमडी वरिष्ठ आईएएस राहुल पुरवार हैं. कंपनी का गठन वर्ष 2014 में हुआ था. वर्ष 2015 से अब तक इस कंपनी के एमडी के पद पर राहुल पुरवार ही हैं.

इस कंपनी की कुल वैल्यू 5027 करोड़ है. पिछले पांच सालों में कंपनी अपना रेवन्यू नहीं बढ़ा सका. हर माह नुकसान बढ़ता ही जा रहा है. अगर इस तरह के हालात किसी निजी कंपनी में होते, तो कंपनी दिवालिया घोषित हो गयी होती.

कंपनी पर सरकारी लोन 843 करोड़ रुपये है. इसमें स्टाफ सिक्युरिटी डिपोजिट, ऑडिट,  टैक्स ऑडिट, इस्टेबलिशमेंट सहित अन्य मदों का बकाया भी शामिल है. इसका खुलासा झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम की ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है. ऑडिट रिपोर्ट 31 नवंबर 2018 तक का है. गौर करने वाली बात है कि वर्ष 2017 में वितरण निगम कंपनी का सरकारी लोन 412 करोड़ ही था.

ओवर ड्राफ्ट की क्यों पड़ी जरूरत

बिजली वितरण निगम का पहले ओवर ड्राफ्ट नहीं था. लेकिन एक साल के अंदर सरकारी लोन की राशि में दोगुनी बढ़ोतरी हो गई. एक साल पहले सरकारी लोन 152.52 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर लगभग 291 करोड़ हो गया है. वहीं लोन पर ब्याज एक साल पहले 156 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 370 करोड़ रुपये हो गया है.

क्या कहती है ऑडिट रिपोर्ट( 31 नवंबर 2018 तक की स्थिति)

सरकारी लोन : 290.79 करोड़

सरकारी लोन पर ब्याज : 370.26 करोड़

बैंक ओवर ड्राफ्ट : 103.05 करोड़

स्टेबलिसमेंट : 31.62 करोड़

अन्य देय राशि : 5.08 करोड़

अन्य भुगतान : 40 हजार

स्टॉफ सिक्यूरिटी डिपोजिट : 2.66 लाख

अन्य डिपोजिट : 1.06 लाख

ऑडिट, इंटरनल ऑडिट, टैक्स ऑडिट व अन्य देय राशि : 1.41 करोड़

2017 में क्या थी सरकारी लोन की स्थिति

सरकारी लोन : 152.52 करोड़

सरकारी लोन पर ब्याज : 155.99 करोड़

बैंक ओवर ड्राफ्ट : शून्य

इस्टेबिलिसमेंट लाइबिलिटी : 52.30 करोड़

अन्य लाइबिलिटी : 4.81 करोड़

अन्य भुगतान : 54.47 लाख

स्टॉफ सिक्यूरिटी डिपोजिट : 2.48 लाख

अन्य डिपोजिट : 12.99 करोड़

ऑडिट, इंटरनल ऑडिट, टैक्स ऑडिट : 1.26 करोड़

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