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#JharkhandElection: पलामू प्रमंडल की 9 सीटों पर 8 विधायकों की प्रतिष्ठा दांव पर, हारे तो कई की राजनीति हो जायेगी खत्म

Dilip Kumar

Palamu: झारखंड विधानसभा के लिए पहले चरण में 30 नवंबर को पलामू प्रमंडल की नौ सीटों पर चुनाव होना है. इस चुनाव में आठ विधायकों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. ये विधायक चुनाव मैदान में ताल ठोंक रहे हैं और इन्हें अपनी कुर्सी बचाने के लिए कड़ी चुनौतियों से गुजरना पड़ रहा है.

यह चुनाव कई विधायकों का राजनीति भविष्य भी तय करेगा. चुनाव जीतने वालों में नयी शक्ति का संचार होगा. कुछ समय तक के लिए उम्मीदवारों की संबंधित सीट पक्की हो जायेगी.

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Sanjeevani

डालटनगंज सीट पर आलोक और केएन में कड़ी टक्कर

बात करें पलामू जिले के डालटनगंज विधानसभा सीट की तो यहां सीटिंग विधायक आलोक चैरसिया कड़े मुकाबले में फंसे नजर आ रहे हैं. एक तरफ उन्हें गठबंधन की ओर से कांग्रेस प्रत्याशी केएन त्रिपाठी कड़ी टक्कर दे रहे हैं तो दूसरी ओर भाजपा से बगावत कर चुनाव मैदान में उतरे जिला परिषद उपाध्यक्ष संजय सिंह और झाविमो के प्रत्याशी डा. राहुल अग्रवाल भी श्री चौरसिया के किले में सेंधमारी करते नजर आ रहे हैं.

विश्रामपुर सीट पर लड़ाई हाईप्रोफाइल

जिले की विश्रामपुर विधानसभा सीट पर लड़ाई काफी हाईप्रोफाइल है. यहां से भाजपा के विधायक सह राज्य के स्वास्थ्य मेंत्री रामचन्द्र चंद्रवंशी चुनाव लड़ रहे हैं. उन्हें कांग्रेस के कद्दावर नेता चन्द्रशेखर दुबे उर्फ ददई दुबे और झाविमो की प्रत्याशी अंजू सिंह से कड़ी चुनौती मिल रही है.

सिंचाई सुविधाओं की कमी और अपर्याप्त अनियमित बिजली आपूर्ति से किसान बहुत परेशान हैं. विश्रामपुर क्षेत्र में स्थापित स्वास्थ्य केन्द्रों में डॉक्टर नदारद हैं. अब भवन का मुंह देख कर मरीज बेचारा गढ़वा-डालटनगंज जाने को मजबूर हो जाता है. ऐसे में रामचन्द्र चन्द्रवंशी के लिए जीत का ताज पहनना कांटो भरा हो सकता है.

राधाकृष्ण किशोर के समक्ष अपना किला बचाने की चुनौती

छतरपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक राधाकृष्ण किशोर के सामने अपना किला बचाने की चुनौती है. पिछला चुनाव उन्होंने भाजपा के टिकट पर लड़ा था. अपेक्षाकृत अच्छा काम करने के बावजूद भाजपा ने उनका टिकट इस बार काट दिया और राजद के पूर्व सांसद मनोज भुइयां की पत्नी पुष्पा देवी को थमा दिया.

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क्षुब्ध श्री किशोर कहां रूकने वाले थे, आजसू का दामन थाम वो उतर गये चुनाव मैदान में. श्री किशोर को भाजपा के साथ-साथ राजद प्रत्याशी से भी चुनौती मिल रही है. यह चुनाव राधाकृष्ण किशोर का राजनीतिक भविष्य भी तक करेगा. कई मौकों पर विधायक किशोर कह चुके हैं कि यह चुनाव वे भाजपा के अन्याय के खिलाफ अंतिम बार लड़ रहे हैं.

पांकी में कांग्रेस विधायक की प्रतिष्ठा दांव पर

पांकी विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां भी कांग्रेस विधायक देवेन्द्र सिंह उर्फ बिट्टु सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर है. उन्हें भाजपा से कड़ी टक्कर मिल रही है. क्षेत्र के कद्दावर नेता डा. शशिभूषण मेहता ने चुनाव से ठीक पहले भाजपा का दामन थामकर मास्टर स्ट्रोक लगा दिया है और वे अब तक मजबूत स्थिति में दिख रहे हैं.

हुसैनाबाद में विधायक कुशवाहा शिवपूजन मेहता की जबरदस्ती घेराबंदी

हुसैनाबाद में सीटिंग विधायक कुशवाहा शिवपूजन मेहता इस बार दल बदल कर मैदान में उतरे हैं. पिछला चुनाव उन्होंने बहुजन समाज पार्टी से लड़ा था. लेकिन इस बार वे आजसू पार्टी के सिपाही बनकर मैदान में हैं. राजद प्रत्याशी संजय कुमार सिंह यादव, भाजपा समर्थित उम्मीदवार विनोद सिंह और एनसीपी के कमलेश सिंह ने उनकी जबरदस्त घेराबंदी की है, जहां से निकलना उनके लिए मुश्किल लग रहा है.

गढ़वा में सत्येन्द्र तिवारी के मुश्किल हालात

गढ़वा विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो, यहां के भाजपा विधायक सत्येन्द्र नाथ तिवारी मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. झामुमो उम्मीदवार मिथिलेश ठाकुर उन्हें कड़ी टक्कर देते नजर आ रहे हैं. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मिथिलेश ठाकुर के लिए अबतक कई जनसभा को संबोधित कर चुके हैं. ऐसे में गढ़वा सीट को बचाकर रखना सत्येन्द्र तिवारी के लिए किसी टफ नजर आ रहा है.

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भवनाथपुर सीट पर भानू प्रताप शाही की प्रतिष्ठा फंसी

भवनाथपुर के विधायक भानुप्रताप शाही की प्रतिष्ठा दांव पर है. उनको अपनी कुर्सी बचाने के लिए कड़ी परीक्षा से गुजरना पड़ रहा है. उनपर 120 करोड़ के दवा घोटले का आरोप है. कई मौकों पर चुनावी सभा में भानू का विरोध भी हो चुका है.

यह चुनाव भानू के लिए उनका राजनीतिक भविष्य भी तय करेगा. इस सीट से निर्दलीय और भाजपा के नेता रहे अनंत प्रताप देव, लोजपा की रेखा चौबे, बसपा से कुख्यात अपराधी ताहिर अंसारी की पत्नी सोगरा बीवी भी विधायक की जबरदस्ती घेराबंदी कर रखे हैं.

उधर, लातेहार में विधायक प्रकाश राम अपनी जीत को लेकर हर तरह के हथकंडे अपना रहे हैं. उन्हें पूर्व मंत्री और झामुमो उम्मीदवार बैद्यनाथ राम से कड़ी टक्कर मिल रही है. वैद्यनाथ राम भाजपा में लंबे समय से रहे हैं.

टिकट नहीं मिलने पर झामुमो में शामिल हो गए थे. ऐसे में इस सीट पर प्रकाश को भीतरघात का भी सामना करना पड़ सकता है. इन सबको अपनी कुर्सी बचाने के लिए कड़ी परीक्षा से गुजरना पड़ रहा है.

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