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#JharkhandElection: बिना चुनावी मेनिफेस्टो जारी किये मैदान में हैं भाजपा, कांग्रेस, झामुमो और झाविमो

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Ranchi: झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 का दंगल जारी है. पार्टियों के स्टार प्रचारकों ने भी मोर्चा संभाल लिया है. एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी चालू हो चुका है. पांच चरणों में होने वाले चुनाव के तीन चरणों का नामांकन लगभग पूरा हो चुका है.

दूसरे चरण तक के लिए उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह भी आवांटित कर दिया गया है. चुनाव की एक परंपरा रही है, वोटरों को लुभाने के लिए पार्टियां कई तरह के वादे और घोषणाएं करती हैं. भले उसे पूरा करे ना करे.

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लेकिन इस बार राज्य की चार बड़ी पार्टियां अब तक चुनावी घोषणापत्र जारी नहीं कर सकी है. राज्य में सक्रिय सिर्फ आजसू ने ही अपना चुनावी घोषणा पत्र ‘संकल्प पत्र’ के नाम से जारी किया है.

भाजपा चुनावी मंच से राष्ट्रवाद और हिंदुत्व को दे रही हवा

भाजपा ने चुनावी घोषणापत्र तो जारी नहीं किया, लेकिन चुनावी मंच से पार्टी के दिग्गज नेता राष्ट्रवाद और हिंदुत्व को हवा देने की शुरुआत कर चुके हैं. लोहरदगा और मनिका में अपनी चुनावी सभा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने अयोध्या में आसमान छूती राम मंदिर बनाने की बात कह चुके हैं.

लोकसभा चुनाव के दौरान भी राष्ट्रवाद हावी रहा था. पिछले घोषणापत्र के वादों को भाजपा इस बार के अपने चुनावी घोषणापत्र में शामिल करती है या नहीं यह भी देखना रोचक होगा, क्योंकि पिछले घोषणापत्र में भाजपा ने कई बड़े वादे किये थे जिसे पूरा नहीं किया है.

हालांकि चुनाव के मंच से गुरुवार को अमित शाह ने राज्य के पिछड़ों को लुभाने के लिए आबादी के हिसाब से आरक्षण देने की बात कही है.

कांग्रेस भी घोषणापत्र से बना रही है दूरी

कांग्रेस राज्य में 30 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ रही है. चुनावी घोषणापत्र तो दूर है ही प्रचार में दंभ भरने के लिए बड़े नेता भी अब तक दूर हैं. वहीं भाजपा के बड़े नेता लगातार मैदान में बने हैं. कांग्रेस ने अब तक अपना घोषणापत्र जारी नहीं किया है.

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पहले चरण में महागठबंधन की ओर से कांग्रेस सबसे अधिक छह सीटों पर चुनाव लड़ रही है. बिना घोषणापत्र के किस आधार पर कांग्रेस वोट मांग रही है यह बड़ा सवाल है. अब तक कांग्रेस वर्तमान सरकार को भी घेर पाने में लगभग नाकाम ही रही है.

सोशल मीडिया पर जेएमएम कर रहा वादे

झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन अपने सोशल मीडिया फेसबुक और ट्विटर के माध्यम से सरकार बनाने के बाद कई मुद्दों को हल करने की बात तो कहते हैं, पर उनकी पार्टी ने भी अब तक विधिवत तरीके से कोई घोषणापत्र जारी नहीं किया है.

झामुमो चुनाव के पहले से ही रोजगार नहीं मिलने पर बरोजगारी भत्ता सहित कई चीजें देने की बात कह रही है. पारा शिक्षक, आंगनबाड़ी वर्कर, जेपीएससी सहित कई मुद्दों से जुड़ी बातों को कहती आ रही है पर देखना जरुरी है कि इन बातों को पार्टी अपने चुनावी घोषणापत्र में शामिल करती है या नहीं.

झारखंड विकास मोर्चा ने सिर्फ एक घोषणा की थी कि मैट्रिक पास करने वाले सभी छात्रों को टैब देगी. शिक्षा संबंधी वादों के अलावा कोई और घोषणा झाविमो ने नहीं की है. अब तक बाबूलाल मरांडी की पार्टी ने भी कोई घोषणपत्र जारी नहीं किया है. पहले महागठबंधन के साथ मिलकर घोषणापत्र जारी करने की बात थी, पर अब झाविमो महागठबंधन से अलग होकर चुनावी मैदान में है.

आजसू ने आरक्षण बढ़ाने और ग्रेजुएट युवाओं को प्रति माह 2100 देने की कही है बात

आजसू ने अपने चुनावी घोषणापत्र में राज्य में आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने का वादा किया है. वहीं स्नातक पास सभी बेरोजगारों को रोजगार तलाशने के लिए पांच साल तक 2100 देने की बात कही है. इसके अलावा पर्यटन और संस्कृति को बचाने के लिए भी बेहद ही लुभावने वादों को अपने घोषणापत्र में शामिल किया है.

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