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झारखंड में मार्च माह से नहीं मिला है पांच हजार कर्मचारियों को मानदेय

केंद्र से आंवटन प्राप्त नहीं होने के कारण रुका है मानदेय.

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Ranchi : सूबे के 2211 शीर्ष परिवार कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत आने वाले सभी कर्मियों की आर्थिक स्थिति फिर एक बार डगमगाने लगी है. इन कर्मियों को बीते सात माह से मानदेय नहीं मिला है. जिससे कर्मचारियों की आर्थिक स्थित खराब होती चली जा रही है. कर्मचारियों की हालत इतनी खराब हो गई है कि मजबूरन हड़ताल और धरना प्रदर्शन करना पड़ रहा है.

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सरकार को हमारी पीड़ा नहीं दिखती : भोला प्रसाद

जिला सांख्यिता भोला प्रसाद बताते है कि प्रत्येक वित्तीय वर्ष ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हो जाती है. वर्ष 2009 से हम कर्मचारियों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है. इस वित्तीय वर्ष भी मार्च से मानदेय नहीं मिला है. प्रसाद बताते है, मानदेय को लेकर हर वर्ष धरना, प्रदर्शन, हड़ताल आदि करने के बाद फिर वेतन देने की कवायद शुरु होती है. इस बार भी लगता है वही करना होगा. क्योंकि सरकार को हमारी पीड़ा ऐसे नहीं दिखती है, मजबूरन हड़ताल और धरना प्रदर्शन करना पड़ जाता है. प्रसाद का कहना है कि हम लोगों का भी घर परिवार है. वेतन नहीं मिलने पर बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, घर का राशन सभी पर आफत आ जाती है.

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सात महीने से नहीं मिला कर्मचारियों को मानदेय

2211 शीर्ष परिवार कल्याण परिवार के अंतर्गत सूबे में पांच हजार कर्मचारी कार्यरत है. राजधानी रांची में लगभग तीन सौ कर्मचारी काम करते है. इन सभी को वेतन नहीं मिला है. जिला में जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, जिला आरसीएच पदाधिकारी, जिला मास मीडिया, रांची शहरी परिवार कल्याण केंद्र के कर्मचारी है. जो वेतन के बगैर नियमित रुप से अपनी ड्यूटी कर रहे है. 2211 शीर्ष परिवार में शहरी एंव ग्रामीण क्षेत्र के स्वास्थ्य कर्मियों की बहाली हुई है. लेकिन कर्मियों के इस वर्ष का आवंटन नहीं होने के कारण मानदेय रुका हुआ है. कर्मचारियों का कहना है कि राज्य सरकार से मानदेय की मांग करने पर सरकार कहती है, केंद्र से फंड नहीं आया जिसके कारण मानदेय रुका हुआ है. वहीं स्वास्थ्य सचिव हर बार दो-तीन दिन में वेतन दिलाने का आश्वासन देते है.

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कर्ज लेकर परिवार का कर रहे है भरण-पोषण

जिला मास मीडिया ईकाई में कार्यरत उर्मिला लकड़ा ने बताया कि हम सभी स्वास्थ्य विभाग के सभी निर्देशों का पालन करते हुए सरकारी लक्ष्य को पूरा करने के लिए निरंतर सेवा देते रहते हैं. लेकिन सरकार हम सभी कर्मचारियों के साथ सौतेला व्यवहार करती है. उन्होंने कहा कि वेतन का भुगतान समय पर नहीं होने के कारण अपने बच्चों को पढ़ाने-लिखाने और घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए कर्ज का सहारा लेना पड़ रहा है.

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पुरुषोत्तम यादव ने कहा कि समय पर वेतन नहीं मिलने के कारण वे अपने परिवार का भरण-पोषण करने में असमर्थ हो गये हैं. स्वास्थ विभाग में कार्यरत कर्मियों के लिए अपने बच्चों की शिक्षा संबंधी जरूरतों को भी पूरा करना मुश्किल हो रहा है. लेकिन सरकार द्वारा अब तक स्थिति में सुधार लाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गयी है.

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