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विधानसभा चुनाव को लेकर भाकपा माओवादी ने अपनी सक्रियता बढ़ाई

Ranchi: झारखंड में अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाकपा माओवादी ने झारखंड में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है.

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चुनाव में बाधा पहुंचाने की नीयत से ये संगठन राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में एक बार फिर अपने पुराने साथियों को एकजुट करने में लगा हुआ है. हाल के दिनों में नक्सलियों की बढ़ती सक्रियता बढ़ने के संकेत मिल रहे है.

नक्सलियों की सक्रियता दे रहे खतरनाक संकेत 

विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के कुछ हिस्सों में नक्सलियों की सक्रियता खतरनाक संकेत दे रहे हैं. जानकारी के अनुसार जंगली-पहाड़ी इलाकों में हार्डकोर नक्सलियों के दस्तों का जमावड़ा होने लगा है.

निशाने पर सुरक्षाबलों के साथ उनके ठिकाने-कैंप, आने-जाने के रूट व अन्य जगह हैं. आशंका है कि मतदान या चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने के लिए नक्सली बड़ी वारदातों को अंजाम दे सकते हैं. खासकर अपने गढ़ में नक्सलियों का अगल-अलग दस्ता विभिन्न जगहों पर हमले या हिंसा की तैयारी में लगा है. इसके आहट भी मिलने लगे हैं.

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लोकसभा चुनाव में नक्सलियों के मंसूबे नहीं हुए थे कामयाब

लोकसभा चुनाव के दौरान नक्सलियों ने लोकसभा चुनाव बहिष्कार की घोषणा की थी. लेकिन सुरक्षा बल की मुस्तैदी के चलते नक्सलियों के मंसूबे कामयाब नहीं हो पाये थे.

लोकसभा चुनाव के दौरान नक्सली छिटपुट घटनाओं को छोड़कर किसी भी बड़ी घटनाओं का अंजाम देने में सफल नहीं हो पाये थे.

ट्राई जंक्शन में बड़े नक्सलियों का है जमावड़ा

ट्राई जंक्शन में सरायकेला जिले के कुचाई व दलभंगा, खूंटी का अड़की और रांची का तमाड़ थाना क्षेत्र से सटा इलाका आता है. इसी इलाके में रायसिंदरी और जंब्रो पहाड़ी भी है.

इन इलाकों में कई बड़े नक्सली और उनका दस्ता अपना ठिकाना बनाये हुए है. चाईबासा के सारंडा जंगल के बाद यह दूसरा सबसे सेफ इलाका नक्सलियों ने बनाया है.

बताया जा रहा है कि इन ट्राई जंक्शन में एक एक करोड़ के चार इनामी नक्सली किशन उर्फ प्रशांत बोस, अनमोल उर्फ समर, मिसिर बेसरा व असीम मंडल उर्फ आकाश के दस्ते का जमावड़ा है.

गौरतलब है कि रांची, खूंटी और सरायकेला जिलों से सटे नक्सलियों के ठिकानों (ट्राई जंक्शन) पर झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ संयुक्त कार्रवाई करेगी. इसका खाका तैयार हो चुका है.

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झारखंड के इन जिलों में है सक्रिय माओवादियों का दस्ता

  • गढ़वा, लातेहार व गुमला के सीमावर्ती क्षेत्र में विमल यादव और बुद्धेश्वर यादव का दस्ता सक्रिय है.
  • चाईबासा, सरायकेला, छोटानागपुर और गोयलकेरा में माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य व एक करोड़ का इनामी किशन दा उर्फ प्रशांत बोस, अनमोल उर्फ समर जी, मेहनत उर्फ मोछू, चमन उर्फ लंबू, सुरेश मुंडा व जीवन कंडुलना,असीम मंडल और महाराजा प्रमाणिक का दस्ता सक्रिय है.
  • गिरिडीह-जमुई और कोडरमा-नवादा बॉर्डर पर सैक सदस्य करुणा, पिंटू राणा व सिंधू कोड़ा का दस्ता सक्रिय है.
  • हजारीबाग-चतरा-गया बॉर्डर पर माओवादी रिजनल कमेटी सदस्य इंदल गंझू और आलोक का दस्ता सक्रिय है.
  • बोकारो जिला के बेरमो अनुमंडल के नक्सल प्रभावित चतरोचट्टी और जगेश्वर बिहार थाना के जंगली क्षेत्र में एक करोड़ का इनामी माओवादी नेता मिथिलेश सिंह दस्ता सक्रिय है.
  • औरंगाबाद, पलामू, गया, चतरा बॉर्डर पर सैक सदस्य संदीप दस्ता, संजीत और विवेक का दस्ता सक्रिय है.

ये बड़े नक्सली भी हैं निशाने पर

झारखंड-छत्तीसगढ़ बोर्डर पर आठ सक्रिय नक्सली हैं जिनमें से कुछ के नाम हैं- 

  • संतोष उर्फ विश्वनाथ-सैक सदस्य- 25 लाख का इनामी.
  • उमेश यादव उर्फ विमल- सैक सदस्य, 25 लाख इनामी.
  • सौरभ यादव मारकस बाबा- सैक सदस्य, 25 लाख का इनामी.
  • नवीन उर्फ सर्वजीत यादव- आरसीएम, 15 लाख इनामी.
  • मृत्युंजय जी उर्फ फ्रेश भुईंया-जोनल कमांडर, 10 लाख इनामी.
  • भवानी उर्फ सुजाता- जोनल कमांडर, 10 लाख इनामी.

झारखंड-पश्चिम बंगाल बोर्डर पर तीन हार्डकोर नक्सली हैं जिनमें से कुछ के नाम हैं-

  • मदन महतो-आरसीएम, 15 लाख का इनामी.
  • रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन मार्डी- आरसीएम, 15 लाख इनामी.

झारखंड-ओड़िशा बोर्डर पर छह नक्सली दे रहे चुनौती

  • लालचंद हेंब्रम उर्फ अनमोल- सैक सदस्य, 25 लाख इनामी.
  • चमन उर्फ लंबू- सैक सदस्य, 25 लाख इनामी.
  • मोछू उर्फ मेहनत- आरसीएम, 25 लाख इनामी.
  • गुलशन सिंह मुंडा उर्फ सुभाष मुंडा- एसजेडएम, 05 लाख इनामी.

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देश के 30 अति नक्सल प्रभावित जिलों में 13 झारखंड के जिले

झारखंड में भले पहले की तुलना में नक्सली कमजोर पड़ गये हैं और झारखंड पुलिस लगातार नक्सलियों के खात्मे के लिए अभियान चला रही है. इसके बावजूद भी देश के 30 नक्सल प्रभावित जिलों में 13 जिले झारखंड के हैं. जो सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिलों की सूची में हैं.

सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिले के मामले में झारखंड पहले स्थान पर है, तो वहीं छत्तीसगढ़ के 8 जिले सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिलों के साथ दूसरे स्थान पर है.

झारखंड के सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिलों में खूंटी, गुमला, लातेहार, सिमडेगा, पश्चिम सिंहभूम, रांची, दुमका, गिरिडीह, पलामू, गढ़वा, चतरा, लोहरदगा और बोकारो है. सरायकेला,पूर्वी सिंहभूम, हजारीबाग,धनबाद, गोड्डा भी नक्सलवाद की समस्या से जूझ रहे हैं.वहीं कम संवदेनशील जिलों में कोडरमा, जामताड़ा, पाकुड़ और रामगढ़ है. जबकि देवघर-साहेबगंज नक्सल प्रभावित नहीं माना गया है.

हाल के दिनों में नक्सलियों की बढ़ी सक्रियता

  • 2 अक्टूबर 2019: चतरा जिले के वशिष्ठ नगर थाना क्षेत्र के चतरा बाराचट्टी बॉर्डर इलाके पर गुवे-बेंगवातेरी जंगल में बुधवार को पुलिस व नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई.मुठभेड़ में दोनों ओर से दर्जनों राउंड गोलियां चली.
  • 4 अक्टूबर 2019: रांची के दशम फॉल जंगल में सुरक्षाबल और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई जिसमें झारखंड जगुआर के 2 जवान शहीद हो गये.
  • 5 अक्टूबर 2019: गुमला के चैनपुर थाना क्षेत्र में पुलिस का मुखबिर बताकर नक्सलियों ने बृजमोहन सिंह की हत्या कर दी.

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