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कांट्रैक्ट कार्यों में छह फीसदी अधिक जीएसटी से संवेदक परेशान, विभागों से भुगतान की मांग

18 जुलाई से नयी व्यवस्था लागू होते ही बढ़ी परेशानी

Ranchi : जुलाई के मध्य से देश भी जीएसटी की नयी दरें लागू हो चुकी है. नयी दरें अलग-अलग सेक्टर को प्रभावित कर रही है. जिससे खाद्यान्न तो मंहगे हुए है. वहीं निर्माण कार्य में भी असर देखा जा रहा है. केंद्र सरकार ने सरकारी कामों के अनुबंध पर जीएसटी छह फीसदी बढ़ा दी है. ऐसे में सरकारी विभागों में कार्य करने वाले कांट्रक्टरों को छह फीसदी अधिक जीएसटी भुगतान करना होगा. जो पहले 12 फीसदी थी. वहीं, जीएसटी भुगतान अब 18 फीसदी की जायेगी. नयी व्यवस्था 18 जुलाई से लागू हो चुकी है. ऐसे में राज्य के कांट्रैक्टर्रस की समस्या बढ़ गयी है. क्योंकि नयी व्यवस्था के लागू होने से जो कांट्रैक्टर पहले 12 फीसदी जीएसटी भुगतान कर रहे थे, उन्हें अब 18 फीसदी भुगतान करना पड़ रहा है.

निर्माण कार्य में पड़ सकता है असर

कुछ कांट्रैक्टरों से बात करने से जानकारी मिली कि सरकारी विभागों के साथ पहले किये गये अनुबंध कार्य की दर प्रभावित होने से संवेदक जीएसटी 18 फीसदी भुगतान करने में असमर्थता महसूस कर रहे हैं. क्योंकि निमार्ण कार्य में कांट्रैक्ट लंबे समय के होते है. ऐसे में निर्माण कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होने की संभावना तो है ही, साथ ही निर्माण कार्य से जुड़े रोजगार में भी असर पड़ सकता है. जीएसटी दर में अचानक हुए बदलाव के कारण 6 फीसदी अतिरिक्त कर का बोझ संवेदकों पर पड़ गया है. कांट्रैक्ट आमतौर पर दीर्घकालिक अनुबंध होते हैं. जहां प्राक्कलित राशि अनुबंध के आरंभ में ही तय कर ली जाती हैं. जिससे कांट्रैर्क्टस की समस्या बढ़ गयी है. बता दें पिछले दिनों चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से मुख्य सचिव को पत्र लिखकर विभागों की ओर से ही जीएसटी के अतिरिक्त छह फीसदी राशि के भुगतान की मांग की गयी है.

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सभी क्षेत्र में बढ़ी जीएसटी

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18 जुलाई से देश में महंगाई और बढ़ गयी है. केंद्र सरकार ने जीएसटी दरों में वृद्धि कर दी है. आलम ये है कि आवश्यक खाद्य सामग्री से लेकर किताब कॉपी तक के दाम बढ़ गये है. सरकार ने प्री पैक्ड या लोकल प्रोड्क्टस पर 5 फीसदी जीएसटी की वृद्धि की है. जो पहले जीएसटी के दायरे में नहीं आते थे. ऐसे में मिल्क प्रोड्क्ट्स लेकर जरूरती वस्तुओं की खरीद पर लोगों को अधिक भुगतान करना पड़ रहा है.

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