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झारखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग में 9 महीने से लटका है ताला, सभी पद भी खाली

Ranchi : राज्य के 56 लाख बच्चों को न्याय दिलाने वाला झारखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है.  करीब नौ महीने से झारखंड बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष सहित सभी छह पद खाली पड़े हुए हैं. बीते वर्ष अप्रैल महीने में आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद अब तक सरकार की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया है. ऐसे में बच्चों के अधिकार और उनकी सुरक्षा को लेकर सरकार के रवैये पर सवाल उठने लगे हैं.

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बाल संरक्षण आयोग के ठप हो जाने से कई मामले में सुनवाई है बंद

बाल संरक्षण आयोग का कार्यकाल खत्म हो जाने से बीते वर्ष 22 अप्रैल 2019 के बाद से आयोग की सारी गतिविधियां ठप पड़ गयी हैं. राज्य के लगभग 56 लाख बच्चों की इस प्रतिनिधि संस्था के निष्क्रिय पड़ जाने से स्कूलों की मॉनिटरिंग, बच्चों से जुड़े आपराधिक और गैर आपराधिक मामलों की सुनवाई भी बंद है.

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जानकारी के मुताबिक, महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग तक जो आवेदन पहुंचे हैं. उनमें 38 अध्यक्ष पद के लिए है. आवेदनों की स्क्रीनिंग और साक्षात्कार जैसी प्रक्रिया से गुजरने के बाद आयोग का पुनर्गठन संभव हो सकेगा. विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद जिससे पुनर्गठन का यह मामला खटाई में पड़ गया है.

आयोग में कुल 7 पद स्वीकृत

झारखंड बाल संरक्षण आयोग में एक अध्यक्ष सहित कुल सात पद स्वीकृत हैं. जिनमें पिछले 3 वर्षों से अध्यक्ष सहित तीन सदस्य ही काम कर रहे थे. बाकी के तीन पद खाली पड़े हुए थे. 20 अप्रैल तक 3 सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो गया. जबकि 22 अप्रैल को अध्यक्ष आरती कुजूर का भी कार्यकाल पूरा हो चुका है.

जिसके बाद से बाल संरक्षण आयोग के सभी पद खाली पड़े हुए है. गौरतलब है कि बाल संरक्षण आयोग के कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व ही आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष आरती कुजूर ने सरकार को पत्र भेजकर आयोग के पुनर्गठन के लिए कार्यकाल को एक्सटेंशन देने का अनुरोध किया था. लेकिन एकेशटेंशन नहीं मिल पाया था. जिससे आयोग में पिछले नौ महीने से ताला लटका है.

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तीन महीने पहले प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए थी

जानकारी के अनुसार, अध्यक्ष और सदस्यों का पद रिक्त होने के साथ ही राज्य में आयोग की गतिविधियां पूरी तरह से ठप पड़ गयी है. हालांकि, नियमानुसार नये सिरे से अध्यक्ष और सदस्यों को बहाल करने की प्रक्रिया तीन महीने पहले ही शुरू करनी चाहिए थी.

जानकारी के अनुसार, आयोग की ओर से पद रिक्त होने की जानकारी पिछले मार्च में ही सरकार को दे दी गयी थी. लेकिन इसके बाद भी अध्यक्ष और सदस्यों को बहाल करने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई थी.

बाल संरक्षण आयोग का दायित्व

18 वर्ष तक के बच्चों को संवैधानिक अधिकार मुहैया कराने के लिए बाल संरक्षण आयोग का गठन झारखंड में 18 जून 2012 को हुआ. आयोग को राष्ट्रीय स्तर पर तय होने वाली बाल संरक्षण से संबद्ध नीतियों, संचालित कार्यक्रमों और इससे संबद्ध प्रशासनिक गतिविधियों पर सीधे हस्तक्षेप की शक्ति प्रदान की गयी है.

व्यवहार न्यायालय की ही तरह बच्चों के अधिकार से जुड़े मामलों की सुनवाई भी बाल संरक्षण आयोग कर सकता है.

 

मानव तस्करी के शिकार हुए बच्चों की रेस्क्यू पर पड़ रहा असर

झारखंड में एक ओर जहां मानव तस्करों के खिलाफ लगातार अभियान चलाये जा रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ तस्कर बेलगाम होते जा रहे हैं. उन्हें रोक पाना पुलिस और प्रशासन के बूते से बाहर की बात नजर आ रही है.

रूरल एरिया के सीधे-साधे लोगों को डरा-धमकाकर और दहशत फैलाकर चुप करा दिया जा रहा है. साथ ही नाबालिग बच्चों को काम के नाम पर दूसरे राज्यों में भेज दिया जा रहा है. झारखंड में मानव तस्करी का कारोबार जोरों पर है.

अमूमन रोजान कोई ना कोई बच्चा मानव तस्करी का शिकार हो रहा है. झारखंड बाल संरक्षण आयोग मानव तस्करी के शिकार हुए बच्चों की रेस्क्यू कराने में अहम भूमिका निभाता है. लेकिन बाल संरक्षण आयोग के सभी पद खाली रहने के कारण मानव तस्करी के शिकार हुए बच्चों की रेस्क्यू कराने पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है.

वहीं तरह-तरह का झांसा देकर झारखंड के बच्चों की महानगरों में खरीद-बिक्री भी जारी है. हालांकि, मानव तस्करी के विरुद्ध कार्रवाई भी कम नहीं हुई. लेकिन रेस्क्यू कर लाये गये बच्चे फिर महानगरों तक पहुंच जाते हैं.

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2 Comments

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