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झारखंड: कृषि मंडी बिल की वापसी के लिए दिल्ली जाएंगे चैंबर के प्रतिनिधि, राज्यपाल से भी लगाएंगे गुहार

Ranchi: कृषि विपणन शुल्क विधेयक को खाद्यान्न व्यापारियों में आक्रोश है. मुख्य रूप से चैंबर ऑफ कॉर्मस विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष, अधिकारियों और मंत्रियों से वार्ता कर रहा है. हालांकि पंडरा बाजार समिति के व्यापारियों ने विधेयक वापस नहीं होने पर आंदोलन की तैयारी की थी. लेकिन चैंबर ऑफ कॉर्मस की ओर से इस पर विराम लगाया गया है. चैंबर अध्यक्ष किशोर मंत्री ने बताया कि फिलहाल व्यापारी आंदोलन का रूख नहीं कर रहे है. सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि आंदोलन से पहले सभी स्तरों पर वार्ता की जायेगी. इसके लिए मंगलवार को कृषि सचिव से वार्ता की जायेगी. वहीं 18 जनवरी को चैंबर ऑफ कॉमर्स का एक प्रतिनिधिमंडल कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर से मुलाकात के लिए रवाना होगा. मंत्री ने बताया कि शीर्ष नेताओं से मामले में हस्तक्षेप की मांग की जायेगी. इसके बाद ही आगे की तैयारी की जायेगी. राज्यपाल से मुलाकात को लेकर राजभवन से भी समय की मांग की गयी है. बता दें राज्य सरकार ने दिसंबर में संपन्न विधानसभा सत्र में विधेयक को फिर से पास किया. तभी से व्यापारियों में इस विधेयक को लेकर असंतोष देखा जा रहा है.
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उत्पादन और व्यापार में आयेगा कमी

चैंबर ऑफ कॉमर्स की मानें तो बिल के लागू होने से राज्य में कृषि उपज के उत्पादन, इसके विपणन, संबंधित प्रसंस्करण उद्योग और व्यापार में भारी कमी आयेगी. जिससे किसानों के उपज की स्थानीय मांग घटने से उन्हें अपने उत्पाद की कम कीमत प्राप्त होगी. वहीं सरकार को कृषि शुल्क और जीएसटी से प्राप्त होनेवाले राशि (राजस्व) में कमी आयेगी. पिछले साल मार्च में भी व्यापारियों ने इस बिल का विरोध किया था. तब कृषि मंत्री से मुलाकात कर कृषि शुल्क बिल को वापस करने की मांग की थी. जिस पर मंत्री ने भी चैंबर सदस्यों को आश्वास्त किया था कि बिल वापस लिया जायेगा. लेकिन शीतकालीन विधानसभा सत्र में बिल फिर से लाये जाने पर व्यवापारियों में विरोध है.

राज्यपाल ने किया था वापस

पिछले साल भी राज्य सरकार ने इस बिल को लाया था. व्यापारियों के विरोध के बाद सरकार ने इसे वापस लेने की बात कहीं थी. वहीं, राज्यपाल ने भी मई महीने में इस बिल को राज्य सरकार को संशोधन के लिये भेजा. लेकिन इस विधानसभा सत्र में सरकार ने फिर से इसे लागू कर दिया. बता दें खाद्यान्न व्यापारियों की ओर से लगातार इस मुद्दे पर बैठक हो रही है.

हुआ था विरोध

जानकारी हो कि पिछले साल मार्च में इस बिल को विधानसभा में पारित करने पर व्यापारियों ने विरोध किया था. इस दौरान अप्रैल माह में खाद्यान्न आयात बंद कर दिया गया था. हालांकि दो दिनों के खाद्यान्न आयात बंद होने के बाद ही राज्य सरकार ने व्यापारियों से वार्ता की. सरकार के आश्वासन के बाद व्यापारियों ने खाद्यान्न आपूर्ति सामान्य रखा.

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