न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

18 वर्षों में 17.79 प्रतिशत बढ़ा झारखंड का बजट 

2001-02 में सरकार ने 4800.12 करोड़ का बजट किया था प्रस्तुत,अब भी गैर योजना खर्च में नहीं हो रही है कमी

1,493

Ranchi: झारखंड सरकार का बजट आकार अलग राज्य के गठन के बाद से 17.79 फीसदी बढ़ गया है. 15 नवंबर 2000 को अलग झारखंड राज्य का गठन किया गया था. तत्कालीन वित्त सचिव लक्ष्मी सिंह के नेतृत्व में 2001-02 का बजट पास किया गया था. उस समय बजट का आकार 4800.12 करोड़ था. पहले बजट में सरकार की तरफ से 70 करोड़ से अधिक का मुनाफा दिखाया गया था. तब से लेकर आज तक बजट प्रावधान यानी योजना खर्च और गैर योजना खर्च में 10 प्रतिशत से अधिक की सलाना बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी.

अब सरकार की तरफ से सेक्टर आधारित बजट प्रस्तुत किया जा रहा है. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मंगलवार 22 जनवरी को 2019-20 का बजट प्रस्तुत किया. कल प्रस्तुत किये गये बजट का आकार 85,429 करोड़ था. इसमें योजना मद के लिए 52,283 करोड़ और गैर योजना के लिए 33,145 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. सरकार की तरफ से कृषि, ऊर्जा, सामाजिक सुरक्षा, सिंचाई और सड़क पर विशेष ध्यान दिया गया है.

आंकड़ों के लिहाज से गैर योजना खर्च में हो रही वृद्धि

आंकड़ों पर गौर करें, तो 2001-02 के बाद से अब तक लगातार गैर योजना खर्च में बढ़ोत्तरी हो रही है. गैर योजना खर्च में झारखंड सरकार के कर्मियों का वेतन भत्ता, पेंशन, केंद्र से मिलनेवाले अनुदान का ब्याज और अन्य एजेंसियों से लिए गए कर्ज के ब्याज भुगतान की राशि शामिल है. तत्कालीन मुख्य सचिव वीएस दुबे ने कई बार गैर योजना मद के खर्च को 90 फीसदी से कम करने की बातें कही थीं. सरकार को गैर योजना मद के खर्च को कम कर, विकासोन्मुख योजनाओं को आगे बढ़ाने की बातें कही थीं.

SMILE

18 वर्षों में नहीं बन पाया अपना सचिवालय और नयी राजधानी

18 वर्षों में झारखंड सरकार अपना सचिवालय और नयी राजधानी नहीं बना पायी. झारखंड के साथ अलग हुए छत्तीसगढ़ में नयी राजधानी रायपुर में विकसित कर ली गयी है. वहीं उत्तराखंड की राजधानी देहरादुन का भी काफी विस्तार हो गया है.

कैसे बढ़ा खर्च

नियंत्रक सह महालेखाकार (कैग) की रिपोर्ट और राज्य सरकार द्वारा योजना आयोग (अब नीति आयोग) को भेजी गयी रिपोर्ट में बढ़ते खर्च का स्पष्ट उल्लेख किया गया है.

वित्तीय वर्ष

कुल एक्सपेंडिचर(करोड़ में)

योजना खर्च (करोड़ में)

गैर योजना खर्च (करोड़ में)

 

2001-024800.121261.873538.25
2002-035509.481026.204483.27
2003-045405.931090.994314.95
2004-056975.911980.184995.73
2005-068490.822138.436352.39
2006-079063.942431.896632.25
2007-0810831.972979.887852.09
2008-0912876.903813.209063.70
2009-1015128.243758.4811369.76
2010-1117944.736003.8111940.92
2011-1220991.597646.2913445.30
2012-1328125.4211489.8016635.62
2013-1430453.0711926.4018508.67
2014-1559762.39
2015-16—-—–
2016-17 63502.6926437.3437065.35

 

2017-1875653—–—–
2018-1980200—–—–
2019-20854295282333145

 

इसे भी पढ़ेंः आंकड़ों से समझें कैसे खोखला है 2020 तक सभी बेघरों को आवास देने का सीएम रघुवर दास का दावा ?

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
%d bloggers like this: