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झारखंड : प्रदूषण बोर्ड के चेयरमैन व मेंबर सेक्रेटी की नियुक्ति गलत, ताक पर वाटर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ पोल्यूशन एक्ट

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Ranchi : झारखंड राज्य प्रदूषण बोर्ड के अध्यक्ष अर मेंबर सेक्रेट्री की नियुक्ति ही गलत तरीके से की गई है. राज्य सरकार ने वाटर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ पोल्यूशन एक्ट को ताक में रख कर बोर्ड में चेयरमैन और मेंबर सेक्रेट्री की नियुक्ति की है.

वाटर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ पोल्यूशन एक्ट के सेक्शन(2)(एफ) में स्पष्ट उल्लेख है कि अध्यक्ष और मेंबर सेक्रेटी का पद फुल टाइम (पूर्णकालिक) होगा. जबकि बोर्ड के चेयरमैन एके रस्तोगी वन एवं पर्यावरण विभाग में स्पेशल सेक्रेट्री हैं.

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वहीं प्रदूषण बोर्ड के अध्यक्ष के अतिरिक्त प्रभार में हैं. मेंबर सेक्रेट्री राजीव लोचन बक्शी वन विभाग में सीएफ (वन संरक्षक रांची) के पद पर तैनात हैं और प्रदूषण बोर्ड में मेंबर सेक्रेट्री के अतिरिक्त प्रभार में बने हुये हैं.

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नई नियमावली के तहत नियुक्ति भी नहीं हुई

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पूर्व अध्यक्ष मणिशंकर के हटने के बाद सरकार ने नई नियमावली बनाई. दो बार 2014 और 2016 में विज्ञापन भी जारी किया गया. दोनों बार 20 से अधिक आवेदन भी आये. पर सरकार ने नियुक्ति की प्रक्रिया ही शुरू नहीं की.

बोर्ड में पूर्णकालिक चेयरमैन और मेंबर सेक्रेट्री नहीं होने के कारण विरोधाभास की स्थिति बन गई है. वजह यह है कि चेयरमैन और मेंबर सेक्रेट्री के बोर्ड और विभाग के विभिन्न दायित्व भी परस्पर विरोधाभासी प्रकृति के भी हैं. दोनों दायित्वों का निर्वहन एक साथ करना कानून के अनुरूप भी नहीं है.

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क्यों हटाया गया था पूर्व चेयरमैन एके पांडेय को

सरकार ने पूर्व चेयरमैन सह पीसीसीएफ रैंक के अफसर एके पांडेय को हटा कर एके रस्तोगी को चेयरमैन बना दिया. इसके पीछे वजह थी कि पांडेय इलेक्ट्रोस्टील को सीओटी (कंसंट टू ऑपरेट) नहीं देना चाहते थे.

इसके लिये उन्होंने वन विभाग के अपर मुख्य सचिव इंदू शेखर चतुर्वेदी को पत्र लिखा कि इस मसले पर महाधिवक्ता की राय लेनी चाहिये. इसपर अपर मुख्य सचिव ने कहा कि खुद डिसिजन लें. इसके बाद पांडेय ने बोर्ड के अध्यक्ष पद से रिजाइन कर दिया. पांडेय को रिटायरमेंट के बाद बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था.

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राज्य के कैबिनेट मंत्री सरयू राय मुख्य सचिव को लिख चुके हैं पत्र

इस मसले पर राज्य के कैबिनेट मंत्री सरयू राय ने 10 जनवरी को पूर्व मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी को पत्र लिखा था. पत्र में कहा गया था कि झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष एवं सचिव पद पर नियुक्तियां करते समय विशिष्ट ज्ञानयुक्त पूर्णकालिक पदाधिकारी को ही इन पदों पर पदस्थापित किया जाना चाहिए.

इस संबंध में विधि एवं कानून के प्रावधानों तथा राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हाल ही में पारित आदेश के आलोक में आवश्यक कार्रवाई अपेक्षित है.

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