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चारा घोटाला : झारखंड अपर मुख्य सचिव एवं बिहार पूर्व डीजीपी के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश निरस्त

पूर्व सांसद राणा की जमानत याचिका खारिज.

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Ranchi : झारखंड उच्च न्यायालय ने झारखंड के अपर मुख्य सचिव सुखदेव सिंह एवं बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) डी पी ओझा को चारा घोटाले में भारी राहत देते हुए उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के विशेष सीबीआई अदालत का आदेश निरस्त कर दिया.

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झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने सीबीआई अदालत द्वारा इनके खिलाफ जारी समन निरस्त कर दिया. सीबीआई अदालत ने सुखेदव सिंह व डी पी ओझा को चारा घोटाला मामले में आरोपी बनाने के लिए समन जारी किया था जिसको उन्होंने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी.

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इस मामले में संज्ञान लेना न्यायसंगत नहीं : अदालत

अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि बिना अभियोजन स्वीकृति के सीबीआई अदालत द्वारा इस मामले में संज्ञान लेना न्यायसंगत नहीं है. साथ ही इनके खिलाफ साक्ष्य उतने पर्याप्त नहीं है कि अदालत द्वारा आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा-319 का इस्तेमाल किया जाए. इसलिए सीबीआई अदालत के समन के आदेश को निरस्त किया जाता है.

सुनवाई के दौरान सुखदेव सिंह के अधिवक्ता राहुल कुमार ने अदालत को बताया था कि इस मामले में सीबीआई अदालत ने फैसला सुनाने के बाद उनको आरोपी बनाने के लिए समन जारी किया है जो गलत है.

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चारा घोटाले से जुड़े मामले 

आईएएस सुखदेव सिंह 22 जून 1993 को देवघर के डीसी बने थे और अगस्त 1994 तक वहां के उपायुक्त रहे. लेकिन चारा घोटाले से जुड़े मामले 1991 से लेकर 1993 तक के हैं.

सीबीआई अदालत ने सुखदेव सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम कानून (प्रिवेंशन ऑफ करप्शन) के तहत संज्ञान लेते हुए समन जारी किया था. जबकि इस मामले में पहले से अभियोजन की स्वीकृति ही नहीं ली गई है.

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पूर्व सांसद आर के राणा को झटका

पूर्व सांसद आर के राणा को झटका देते हुए चारा घोटाले के चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी के मामले में सीबीआई अदालत से उनको मिली सजा के खिलाफ उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई है. राणा चारा घोटाले के चाईबासा कोषागार से गबन के मामले में सजा पाने के बाद फिलहाल बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में बंद हैं.

झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अवधेश कुमार सिंह की पीठ ने राणा की जमानत याचिका खारिज कर दी और कहा कि इस मामले में अभी उन्हें जमानत देना न्यायसंगत नहीं होगा.

आर के राणा ने चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी मामले में जमानत याचिका दाखिल की थी.

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एक मामले में मिल चुकी है जमानत

इससे पूर्व सुनवाई के दौरान आर के राणा की ओर से कहा गया कि चाईबासा के ही एक मामले में उनको पहले जमानत मिल चुकी है. उस मामले में आरोप व साक्ष्य एक ही थे. इसलिए इस मामले में भी उन्हें जमानत दी जाए. सीबीआई की ओर से इसका विरोध किया गया. जिसके बाद न्यायालय ने आर के राणा की जमानत याचिका खारिज कर दी.

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