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झारखंड: 24 में 22 जिलों में सक्रिय साइबर अपराधी, इनसे है पूरा देश परेशान

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Ranchi: झारखंड में साइबर अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं. जामताड़ा साइबर अपराध के लिए पूरे देश में अपनी अलग पहचान तो बना ही चुका है. लेकिन, इस बीच हैरत करने वाली एक और बात सामने आयी है. झारखंड के 24 में से 22 जिलों में साइबर अपराधी सक्रिय हो गये हैं. यहां लगातार बढ़ रहे साइबर अपराध पर पुलिस अंकुश लगाने में विफल साबित हो रही है.

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झारखंड के साइबर अपराधियों से है पूरा देश परेशान

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झारखंड के साइबर अपराधियों से पूरा देश परेशान है. देश का हर राज्य खौफ में है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 22 दिसंबर 2017 से 31 अगस्त 2018 तक महज आठ माह में 19 राज्यों के 431 लोगों को झारखंड के साइबर अपराधियों ने ठगा है. सबसे ज्यादा निशाना मध्यप्रदेश के 240 लोगों को बनाया गया. अभी कुछ साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद पढ़े-लिखे सहयोगियों के गैंग का खुलासा हुआ. जिसने साढ़े सात करोड़ से अधिक की ठगी की है.

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पुलिस के रडार पर 410 साइबर अपराधी

झारखंड अपराधियों के गढ़ माने जाने वाले 22 जिलों के करीब 410 साइबर अपराधी पुलिस के रडार पर हैं. जिनमें मुख्य रूप से देवघर में 126, जामताड़ा में 90, गिरिडीह में 56, धनबाद में 48 व दुमका में 36 साइबर अपराधी शामिल हैं. पुलिस जांच में यह बात सामने आयी है.

पुलिस के लिए चुनौती बने साइबर अपराधी

साइबर अपराधी लगातार पुलिस को चुनौती दे रहे हैं. झारखंड के जामताड़ा, देवघर, गिरिडीह, धनबाद, दुमका और हजारीबाग जिले देश भर की पुलिस के रडार पर हैं. यहां के साइबर अपराधी लगातार पुलिस को चुनौती दे रहे हैं. देश भर में लोगों के बैंक खाते से रुपये उड़ाने वाले साइबर ठगी के अधिकतर आरोपी जामताड़ा जिले के करमाटांड़ और पड़ोसी थाना क्षेत्र नारायणपुर से ताल्लुक रखते हैं. इस इलाके से हाल में की गयी साइबर ठगी के पुलिस रिकॉर्ड इस बात को साबित करते हैं. इन दोनों थाना क्षेत्रों में साइबर क्राइम की पड़ताल के लिए दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, अंडमान-निकोबार, ओड़िशा, जम्मू कश्मीर समेत देश के अधिकांश राज्यों की पुलिस पहुंच चुकी है. हर दिन किसी न किसी राज्य व जिले की पुलिस यहां साइबर आरोपियों की खोज में आती है.

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ग्रामीण लड़कियां भी साइबर अपराध में सक्रिय

मिली जानकारी के मुताबिक साइबर अपराध में अब ग्रामीण लड़कियां भी शामिल हो रही हैं. समय के हिसाब से साइबर आरोपी खुद को अपडेट कर अपराध के तरीके भी बदल रहे हैं. पहले तो बैंक अधिकारी बनकर एटीएम नंबर व पिन मांगकर ठगी की जाती थी, वहीं अब अब साइबर अपराधी ग्राहकों को बैंक अकाउंट से आधार लिंक कराने की बात कहते हैं. झांसा देकर आधार नंबर व ओटीपी की जानकारी लेने के बाद उसका अकाउंट ही साफ कर देते हैं. इसके बाद दूसरे स्तर पर गिरोह के सदस्य पैसे ट्रांसफर कर देते हैं.  तीसरे स्तर पर सदस्य पैसे की निकासी व ऑनलाइन खरीदारी करते हैं. साइबर क्राइम से जुड़े युवा-किशोर अधिक पढ़े-लिखे भी नहीं हैं, लेकिन फर्राटेदार अंगरेजी व खड़ी हिंदी बोल लेते हैं.

बदला साइबर अपराध करने का तरीका

स्थानीय पुलिस की कार्रवाई के भय से साइबर अपराधियों ने अब अपराध का तरीका भी बदल लिये हैं. मिली जानकारी के अनुसार महंगी गाड़ियों के शीशा बंद  कर अपराधी लांग ड्राइव पर निकल जाते हैं. गाड़ी के अंदर से ही फोन पर लोगों को फंसाते हैं. फिर दूर के किसी एटीएम से पैसे निकाल लेते हैं. इससे पुलिस को लोकेशन निकालने और पहचान करने में कठिनाई होती है.

रांची के लोग भी हो रहे हैं ठगी के शिकार

राजधानी रांची के लोग आये दिन साइबर ठगी के शिकार हो रहे हैं. रांची साइबर थाना साइबर अपराधियों को पकड़ने में जूझ रहा है. इसका मुख्य कारण है कि प्रशिक्षित विशेषज्ञों की कमी होना. प्रशिक्षण के नाम पर आइटीएस (इंवेस्टिगेशन ट्रेनिंग स्कूल) खानापूर्ति कर रहा है. साइबर थाने में सुधार करने जरूरत है. साइबर अपराध के मामले पिछले दो सालों में 790 मामले दर्ज किये गये हैं. इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है.

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