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झारखंड : डायन के नाम पर हुई 1800 हत्याएं, आंकड़ों में टॉप पर सरायकेला-चाईबासा

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Ranchi : झारखंड में जादू टोना, अंधविश्वास और डायन बिसाही के शक में हत्या और प्रताड़ना के मामले नहीं थम रहे हैं. पिछले एक वर्ष के दौरान झारखंड में अंधविश्वास और जादू-टोना के शक में 30 लोगों की हत्या कर दी गयी है. यह आंकड़े पुलिस के हैं. जबकि स्थिति इससे ज्यादा खराब है.

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कई ऐसे मामले हैं जो पुलिस तक पहुंचते ही नहीं हैं 1990 से 2000 तक झारखंड के कई इलाकों में डायन के नाम पर 522 महिलाओं की निर्मम हत्या की गई थी. लेकिन झारखंड अलग राज्य बनने का बाद डायन के नाम पर होने वाली हत्याओं की संख्या में काफी इजाफा हो गया. 2000 से लेकर 2019 के ताजा आंकड़ो के अनुसार अबतक 1800 महिलाएं मार दी गई हैं. जिसमें सबसे अधिक आंकड़ा चाईबासा और सरायकेला का है. जहां कुल 233 महिलाओं की हत्या कर दी गयी.

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अलग राज्य बनने के बाद हुई 1800 महिलाओं की हत्या

झारखंड गठन के बाद से अब तक डायन बिसाही के आरोप में 1800 महिलाओं की हत्या की जा चुकी है. राज्य के लिए ये कलंक है. पर, इस मुद्दे पर समाज अभी तक जागरूक नहीं हो सका है. इस गंभीर समस्या के निराकरण के लिए कई लोग और कई संस्थाएं लड़ाई लड़ रही हैं.

पर, ये कुप्रथा गांवों में इस तरह से फैली हुई है कि लोग इससे बाहर ही नहीं निकल पा रहे. तमाम तरह की योजनाओं और कई संस्थाओं के द्वारा काम किए जाने के बावजूद भी इस कुप्रथा को लोगों के दिमाग से नहीं निकाला जा सका है.

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अधिनियम बनने के बाद भी घटनाओं में कमी नहीं

डायन के नाम पर औरतों के साथ जुल्म करने वाले लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि वे ऐसा करके इस सामाजिक बीमारी को और बढ़ावा ही दे रहे हैं. डायन बताकर महिलाओं को मारने और उसके परिवार को प्रताड़ित करने की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है.

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हद तो तब हो जाती है, जब डायन बताकर महिला को मल-मूत्र पिलाया जाता है, निर्वस्त्र कर उसका सामूहिक दुष्कर्म किया जाता है. सर मुंडवाकर मुंह काला कर गांव में घूमाया जाता है. कई बार तो गांव से निकाल भी दिया जाता है. इस सामाजिक कुरीति को खत्म करने के लिए राज्य में डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम 2001 बना. इसके बावजूद ऐसी घटनाओं में कमी नहीं आ रही है.

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इन क्षेत्रों में महिलाएं बनी सबसे ज्यादा डायन हत्या की शिकार

डायन बिसाही के नाम पर झारखंड के रांची, खूंटी,सरायकेला,गुमला, देवघर लोहरदगा और लातेहार में सबसे ज्‍यादा महिलायें हत्‍या की शिकार हुई हैं. सरायकेला में डुमरा एक ऐसा गांव है जहां विधवा और बुजुर्ग महिलाओं को डायन बिसाही के नाम पर प्रताड़ित करना आम बात है. वहां आधी रात को ग्रामीण ढोल नगाड़ों के साथ महिलाओं को डायन के नाम पर परेशान करते हैं.

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हाल के महीनों के कुछ मामले

  • 1 सितंबर 2018 गुमला के सिसई थाना क्षेत्र की बोंडो पंचायत अरको महुवा टोली निवासी दंपती 65 वर्षीय शाहदेव उरांव और 60 वर्षीय बिगनी देवी की हत्या कर दी गयी थी.
  • 20 सितंबर 2018 को बुंडू में बुधनी देवी के डायन होने के शक में उसके भतीजे ने कुल्हाड़ी से मार कर हत्या कर दी थी.
  • 12 नवंबर 2018 चाईबासा के चक्रधरपुर प्रखंड के कुरुलिया गांव के रंजीत प्रधान ने रिश्ते में उसकी सास लगने वाली 50 वर्षीय मनुप्यारी देवी को डायन बताकर धारदार हथियार से मार कर हत्या कर दी थी.
  • 23 दिसंबर 2018 बारूडीह तमाड़ के रहनेवाले फलिंद्र लोहरा ने अंधविश्वास में आकर अपनी सास सुकरू देवी की टांगी से मारकर हत्या कर दी थी.
  • 20 फरवरी 2019 गुमला थाना से महज चार किमी दूर पुग्गू खोपाटोली गांव में शाम को 65 वर्षीय बंधैन उरांइन की गांव के ही ललित उरांव ने पत्थर से कूचकर हत्या कर दी थी.
  • 21 फरवरी 2019 कोडरमा के मरकच्चो में दो महिलाओं को डायन बिसाही के आरोप में जिंदा जलाने की कोशिश को पुलिस ने नाकाम कर दिया. ग्रामीणों ने दोनों महिलाओं को घेर लिया था. उन्हें खंभे से बांध कर मिट्टी तेल से नहला भी दिया था. लेकिन, तभी पुलिस पहुंच गयी और एक बड़ी घटना टल गयी थी.
  • 26 मई 2019 सरायकेला जिले के राजनगर थाना क्षेत्र के कृष्णापुर गांव में डायन के नाम पर नौ पुरुषों की घर से निकालकर पिटाई की गयी. सामूहिक रूप से उनका जबरन मुंडन भी कर दिया गया था.

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