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झारखंडः 3 साल में जेल कस्टडी में 156 लोगों ने गंवायी जान

Ranchi : राज्य में पिछले तीन सालों में न्यायिक हिरासत (जेल कस्टडी) में 156 लोगों ने अपनी जान गंवायी है. इसके अलावा 10 लोगों की जान पुलिस कस्टडी में गयी है. राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने यह डाटा तैयार किया है. उसकी मानें तो 1 अप्रैल, 2018 से 31 मार्च, 2021 की अवधि में देश भर में 5221 लोगों की जान न्यायिक हिरासत (जेल की सजा पा चुके लोग) में गयी. इसके अलावा पुलिस कस्टडी में भी 348 लोगों को जान गंवानी पड़ी है. कुल मिला कर न्यायिक हिरासत और पुलिस कस्टडी में 5569 लोगों की जान जाने की खबर है.

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यूपी टॉप पर, लद्दाख नीचे

पिछले तीन सालों (2019-20-2021) के आंकड़ों को देखें तो हिरासत (पुलिस और न्यायिक) में मारे गये लोगों के मामले में यूपी टॉप पर है. यहां 2019 में पुलिस कस्टडी में 12, 2020 में 3 औऱ 2021 में 8 लोग मारे गये.

न्यायिक हिरासत में क्रमशः 452, 400 औऱ 443 लोगों को जान गंवानी पड़ी है. इसी तरह से बड़े आंकड़ों वाले राज्यों में मध्य प्रदेश (475), महाराष्ट्र (397), पंजाब (294), पश्चिम बंगाल (250), गुजरात (244), राजस्थान (240), तमिलनाडु (232), बिहार (232), ओडिसा (223), दिल्ली (153), केरल (100) जैसे राज्य शामिल हैं.

झारखंड में पुलिस हिरासत में 2019 में 3, 2020 में 2 और 2021 में 5 लोग मारे गये हैं. इसके अलावे इन्हीं तीन सालों में क्रमशः 64, 43 और 49 लोगों की जान गयी है. बड़े राज्यों की तुलना में पूर्वोत्तर राज्य बहुत पीछे हैं.

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यहां कुल 20 से भी कम केस रजिस्टर्ड हुए हैं. इनमें त्रिपुरा (13), सिक्किम (7), मणिपुर (7), नागालैंड (7) मेघालय (15) जैसे राज्य हैं.

जम्मू और कश्मीर में 22, गोवा में 6, अंडमान निकोबार में 2, चंडीगढ़ में 8, दमन और दीव में 1, पुडुचेरी में 2 केस सामने आये हैं. लद्दाख, लक्षदीप में इस मामले में एक भी केस रजिस्टर नहीं हुआ है.

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हिरासत में मारे जाने पर मुआवजा भी

पिछले दिनों सांसद विकास रंजन भट्टाचार्य ने सदन में सरकार से पुलिस और न्यायिक हिरासत में मारे गये लोगों के संबंध में जानकारी मांगी थी. इस पर केंद्रीय मंत्री (गृह राज्य) नित्यानांद राय ने बताया कि देशभर में 5500 से अधिक लोगों की जान इन मामलों में गयी है. 2018 से अब तक (जून, 2021) हिरासत में मारे गये लोगों के 593 केस में आर्थिक मुआवजा भी दिये जाने की प्रक्रिया जारी है. इसके एवज में 15,90,74,998 रुपये की अनुशंसा की जा चुकी है.

न्यायिक हिरासत में मारे गये मौतों के चार मामले में संबंधित लोक सेवकों के स्तर से चूक हुई. ऐसे में उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गयी. चूककर्ता लोक सेवकों के मामले में यह कार्रवाई संबंधित राज्य सरकार द्वारा की जानी होती है.

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