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झारखंड में 10 हजार से अधिक वारंटी हैं फरार, पुलिस नहीं कर पा रही है गिरफ्तार

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Ranchi: झारखंड में करीब 10 हजार से अधिक अपराधी फरार हैं. इन सभी फरार अपराधियों के खिलाफ पुलिस के रिकॉर्ड में कई मामले दर्ज हैं. इन सभी मोस्‍ट वांटेड  अपराधियों को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पा रही है. इस संबंध में 4 अक्टूबर को पुलिस मुख्यालय में एक महत्‍वपूर्ण बैठक भी हुई. बैठक में इसी मुद्दे पर केंद्र में रखकर चर्चा की गयी. डीजीपी डीके पांडेय ने राज्य के सभी एसपी, एसएसपी, रेंज डीआईजी, आईजी और एडीजी के साथ बैठक की. बैठक में फरार अपराधियों की गिरफ्तारी और मालखानों में पड़े हथियारों के निष्पादन के बारे में चर्चा हुई.

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देसी हथियार बने मालखाने का बोझ

राज्य सभी जिलों के मालखानों में जब्‍त किये गये 5000 से अधिक देसी हथियार हैं. पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को यह लक्ष्य दिया है कि 10 दिनों के भीतर 75 फीसदी स्थायी वारंट का तामिला कर देना है. मालखानों में दो तरह के हथियार जब्त हैं. नियमित हथियार और देसी हथियार. देसी हथियारों को कानूनन नष्ट करने की प्रक्रिया पूरी करनी है, वहीं नियमित हथियार के मामले में न्यायालय के नियम के अनुसार सीआईडी में जमा करना है.

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हाईकोर्ट के द्वारा रिपोर्ट मांगे जाने को लेकर बुलाई गयी थी बैठक

झारखंड हाईकोर्ट द्वारा वारंटी और मालखाना की वर्तमान रिपोर्ट मांगे जाने को लेकर डीजीपी ने बैठक बुलाई गई थी. इसमें झारखंड के सभी जिलों के एसपी, क्षेत्र के आईजी, डीआईजी पुलिस मुख्यालय में पदस्थापित डीआईजी, आईजी, एडीजी मौजूद थे. बैठक में अपराध अनुसंधान विभाग, विशेष शाखा, एटीएस के अफसर भी शामिल हुए.

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क्या है हाईकोर्ट का ऑर्डर

झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार से पुलिस के द्वारा जब्त किये गये हथियारों की इंट्री और उनके निस्तारण के लिए सरकार से एक विस्तृत कार्य योजना मांगी है. इस मामले को लेकर कोर्ट ने कई पुलिस अधिकारियों को कोर्ट तक बुलाया है. इसके अलावा कोर्ट ने सरकार से 70 दिनों में जवाब मांगा है कि राज्य में कितने वारंटी फरार हैं और अब तक झारखंड पुलिस ने कितने वारंटी को पकड़ा है.

गृह सचिव, डीजीपी सहित कई एसपी हुए थे कोर्ट में हाजिर

हाइकोर्ट के जस्टिस कैलाश प्रसाद देव की अदालत ने आर्म्स एक्ट में सजायाफ्ता की ओर से दायर क्रिमिनल अपील याचिका पर सुनवाई के दौरान बरामद हथियार को गंभीरता से लेते हुए आर्म्स रूल 2016 के इम्पलीमेंटेशन को लेकर राज्य के गृह सचिव, डीजीपी सहित कई एसपी को 1 नवंबर को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया था.

कोर्ट ने क्‍या दिया निर्देश

पूरे राज्य में जितने हथियार बरामद हुए हैं. उसे लेकर आर्म्स ब्यूरो बनाये जाने के प्रावधान हैं. धारा 103 और धारा 104 के तहत राज्य में क्या कर्रवाई हो रही है और किस तरीके से सरकार आगे कार्रवाई करेगी. इसी की को लेकर हाइकोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने गृह सचिव को 3 दिनों में प्रारंभिक रिपोर्ट देने का निर्देश देते हुए मामले का कैसे निष्पादन हो यह तय करने का निर्देश दिया है. मामले की प्रोसीडिंग के दौरान कोर्ट ने सीजर लिस्ट के अनुरूप बरामद हथियारों की जांच के लिए टीम में न्यायिक, प्रसाशनिक और पुलिस अधिकारियों को शामिल करने की बात कही है. 5 नवंबर को कोर्ट के समक्ष सरकार को ब्लू प्रिंट तैयार करने का निर्देश दिया गया था.

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