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गोधरा दंगों के दौरान गृहमंत्री रहे झड़ापिया बने यूपी बीजेपी प्रभारी, कभी मोदी के पीएम नहीं बनने के लिए चलाया था कैंपेन

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New Delhi: बुधवार को बीजेपी ने 17 राज्यों के पार्टी प्रभारी की घोषणा की. इन 17 नामों में से एक नाम गोवर्धन झड़ापिया का है, जिनकी राष्ट्रीय राजनीति में इंट्री हुई है. लेकिन इस नाम ने सबको चौंका दिया है. वो इसलिए क्योंकि 2002 दंगों के दौरान गुजरात के गृहमंत्री रहे गोवर्धन झड़ापिया कभी पीएम मोदी के खिलाफ काफी मुखर रहे हैं. नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनने से रोकने के लिए उन्होंने बकायदा कैंपेन चलाया था.

लेकिन बाद में उन्हीं को प्रधानमंत्री बनाने के लिए प्रचार किया और अब एक बार फिर मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए बड़ी जिम्मेदारी मिली है. और अब पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने बड़ी जिम्मेदारी देते हुए उन्हें यूपी का पार्टी प्रभारी नियुक्त किया है. गोवर्धन झड़ापिया के साथ-साथ दुष्यंत गौतम और नरोत्तम मिश्रा को भी उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया गया है.

2007 में बीजेपी से दिया था इस्तीफा

2002 में गुजरात दंगों के दौरान झड़ापिया राज्य के गृहमंत्री थे. उनपर उस दौरान आरोप लगा था कि दंगे रोकने के लिए उन्होंने कठोर कदम नहीं उठाए. इस सांप्रदायिक हिंसा में करीब 1000 मुस्लिम मारे गए थे. जिसके बाद में गोवर्धन झड़ापिया तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के कट्टर आलोचक बन गए थे. दंगे के पांच साल बाद 2007 में उन्होंने भाजपा से इस्तीफा देकर अपनी पार्टी बनाई. इतना ही नहीं, झड़ापिया ने भाजपा के खिलाफ चुनाव भी लड़ा था. बाद में 2012 में झड़ापिया ने नरेंद्र मोदी के एक अन्य आलोचक केशुभाई पटेल से हाथ मिलाया लिया था और उनकी पार्टी में अपनी पार्टी का विलय कर दिया था. जबकि साल 2014 में आम चुनाव से उन्होंने भाजपा का दोबारा दामन थाम लिया था.

कभी थे मोदी के कट्टर विरोधी

2019 चुनाव में बीजेपी ने जिस नेता को इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी है. कभी उनके और पीएम मोदी के रिश्ते में इतनी खटास आ गयी थी कि उन्होंने नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभियान चलाया था. झड़ापिया ने मोदी को प्रधानमंत्री नहीं बनने देने के लिए भी खूब जोर लगाया था. उन्होंने कहा था, ‘हमारी महागुजरात जनता पार्टी (एमजेपी) मोदी को गुजरात की सत्ता से बेदखल करने के लिए आंदोलन जारी रखेगी. एक बार जब वे राज्य में सत्ता खो देंगे तो कभी प्रधानमंत्री बनने का सपना नहीं देख सकेंगे.’

लेकिन 24 फरवरी 2014 को एकबार फिर से बीजेपी का हिस्सा बनने के बाद वो नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए प्रचार करते नजर आये, और अब देश के सबसे अधिक लोकसभा सीट वाले राज्य का जिम्मा पार्टी अध्यक्ष ने दिया है.

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